Sankashti Chaturthi 2022: संकष्टी चतुर्थी और करवा चौथ दोनों आज, जानिए पूजा मुहूर्त, आरती और महत्व
संकष्टी चतुर्थी का मुहूर्त-महत्व: आज भगवान गणेश का यानि कि कृष्ण पक्ष की चतुर्थी का दिन है, जिसे कि संकष्टी चतुर्थी या अंगार की चतुर्थी कहा जाता है। नाम से अनुरूप से है कि इस दिन भगवान गणेश की पूजा करने से इंसान के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं। इसे कहीं-कहीं गणेश चौथ भी कहते हैं। इस दिन माएं अपने पुत्रों की लंबी आयु के लिए व्रत रखती हैं। आपको बता दें कि आज करवा चौथ भी है, यानी कि आज पति और पुत्र दोनों के लिए काफी अहम दिन है। आज माएं और पत्नियां दोनों ही पूरे दिन निर्जला व्रत रखती हैं और शाम को भगवान गणेश की पूजा और चांद को अर्ध्य देने के बाद अपना व्रत खोलती हैं। आज के दिन मांए सुबह नहा-धोकर विध्नहर्ता की पूजा करती हैं और उनसे अपनी संतान की लंबी उम्री की कामना करती हैं। वैसे तो हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को संकष्टी चतुर्थी होती है लेकिन करवा चौथ की वजह से आज के दिन का महत्व कुछ ज्यादा ही बढ़ गया है। वैसे चतुर्थी तो रात 01: 59 मिनट से लग चुकी है और ये कल सुबह 03:08 मिनट तक रहेगी। इस बीच आप कभी भी पूजा कर सकती हैं।

आज चन्द्रोदय 08:48 PM पर होगा तो उस वक्त व्रत रखने वाली माएं अर्ध्य देकर अपना व्रत खोल सकती हैं। लंबोदर को लड्डू और मोदक दोनों ही काफी पंसद है इसलिए आज के दिन उन्हें इन दोनों में से किसी एक का भोग लगाना चाहिए इससे भगवान गणेश काफी प्रसन्न होते हैं।

गणेश जी पूजा इन मंत्रों से करें
- वक्र तुंड महाकाय, सूर्य कोटि समप्रभ:.
- निर्विघ्नं कुरु मे देव शुभ कार्येषु सर्वदा॥
- ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुंडाय धीमहि तन्नो बुदि्ध प्रचोदयात..
- आर्थिक तंगी से छुटकारा पाने के लिए
- ॐ नमो गणपतये कुबेर येकद्रिको फट् स्वाहा.
- गजाननं भूतगणादिसेवितं कपित्थजम्बूफलचारु भक्षणम्ं.
- उमासुतं शोकविनाशकारकं नमामि विघ्नेश्वरपादपङ्कजम्॥
- एकदन्तं महाकायं लम्बोदरगजाननम्ं.
- विध्ननाशकरं देवं हेरम्बं प्रणमाम्यहम्
गणेश वंदना
- हे एकदंत विनायकं तुम हो जगत के नायकं।
- बुद्धि के दाता हो तुम माँ पार्वती के जायकं।।
- है एकदंत विनायकं तुम हो जगत के नायकम....ॐ हरि ॐ
- गणपति है वकर्तुंडंम, एकदंतम गणपति है,
- कृष्णपिंगाक्षम गणपति, गणपति गजवक्त्रंमम....
- है एकदंत विनायकं तुम हो जगत के नायकम।
- बुद्धि के दाता हो तुम माँ पार्वती के जायकं।।....ॐ हरि ॐ
- गणपति लम्बोदरंम है, विकटमेव भी है गणपति
- विघ्नराजेंद्रम गणपति, हो तुम्ही धूम्रवर्णमंम।।
- है एकदंत विनायकं तुम हो जगत के नायकम।
- बुद्धि के दाता हो तुम माँ पार्वती के जायकं।।....ॐ हरि ॐ
- भालचंद्रम गणपति है, विनायक भी गणपति है,
- गणपति एकादशं है, द्वादशं तू गजाननंम।।
- है एकदंत विनायकं तुम हो जगत के नायकम।
- बुद्धि के दाता हो तुम माँ पार्वती के जायकं।।....ॐ हरि ॐ

पूजा के बाद आरती जरूर करनी चाहिए
- गणेश जी की आरती
- जय गणेश जय गणेश,
- जय गणेश देवा ।
- माता जाकी पार्वती,
- पिता महादेवा ॥
- एक दंत दयावंत,
- चार भुजा धारी ।
- माथे सिंदूर सोहे,
- मूसे की सवारी ॥
- जय गणेश जय गणेश,
- जय गणेश देवा ।
- माता जाकी पार्वती,
- पिता महादेवा ॥
- पान चढ़े फल चढ़े,
- और चढ़े मेवा ।
- लड्डुअन का भोग लगे,
- संत करें सेवा ॥
- जय गणेश जय गणेश,
- जय गणेश देवा ।
- माता जाकी पार्वती,
- पिता महादेवा ॥
- अंधन को आंख देत,
- कोढ़िन को काया ।
- बांझन को पुत्र देत,
- निर्धन को माया ॥
- जय गणेश जय गणेश,
- जय गणेश देवा ।
- माता जाकी पार्वती,
- पिता महादेवा ॥
- 'सूर' श्याम शरण आए,
- सफल कीजे सेवा ।
- माता जाकी पार्वती,
- पिता महादेवा ॥
- जय गणेश जय गणेश,
- जय गणेश देवा ।
- माता जाकी पार्वती,
- पिता महादेवा ॥
- दीनन की लाज रखो,
- शंभु सुतकारी ।
- कामना को पूर्ण करो,
- जाऊं बलिहारी ॥
- जय गणेश जय गणेश,
- जय गणेश देवा ।
- माता जाकी पार्वती,
- पिता महादेवा ॥









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