Rishi Panchami 2021: ऋषि पंचमी 11 सितंबर को, सप्त ऋषियों के पूजन से दूर होंगे कष्ट

नई दिल्ली, 10 सितंबर। प्रतिवर्ष भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि के दिन स्ति्रयां ऋषि पंचमी का व्रत रखती हैं। इस दिन सप्तऋषियों कश्यप, अत्रि, भारद्वाज, विश्वामित्र, गौतम, जमदग्नि और वशिष्ठ की पूजा करने का विधान है। यह पूजा मुख्य रूप से महिलाओं द्वारा ही की जाती है क्योंकि महिलाओं को रजस्वला दोष लगता है और उससे शुद्धि के लिए ऋषि पंचमी व्रत किया जाता है। ऋ षि पंचमी व्रत 11 सितंबर 2021 शनिवार को आ रहा है। इस दिन प्रात: 11.23 बजे तक स्वाति नक्षत्र रहेगा। इसके अलावा प्रात: 6.16 से प्रात: 11.23 बजे तक सर्वार्थसिद्धि योग और 11.23 बजे से रवियोग प्रारंभ होगा। इन योगों में पूजा करना विशेष लाभदायी रहेगा।

Rishi Panchami 2021: सप्त ऋषियों के पूजन से दूर होंगे कष्ट

ऋषि पंचमी का महत्व

ऋ षि पंचमी के दिन महिलाएं प्रात:काल सूर्योदय पूर्व उठकर पवित्र नदियों का जल डालकर स्नान करे। इस दिन आंधीझाड़ा (जंगल में उगने वाली एक झाड़ीनुमा वनस्पति) की पत्तियां सिर पर रखकर स्नान किया जाता है। ऐसी मान्यता है किइस व्रत के प्रभाव से महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान तकलीफ नहीं होती। इसके अलावा इस व्रत को करने का दूसरा महत्व यह है किहिंदू धर्म शास्त्रों में मासिक धर्म के दौरान महिलाओं को पूजन आदि कार्य करने की मनाही होती है। मासिक धर्म के दौरान यदि अनजाने में कोई स्त्री भगवान की तस्वीर, पूजा सामग्री को छू ले तो इस दोष के निवारण के लिए सप्त ऋ षियों का पूजन किया जाता है।

व्रत विधि

एक चौकी पर सप्त ऋषियों की मूर्ति रखें या कुमकुम से चित्र बनाएं। सबसे पहले गणेशजी का पूजन करें, उसके बाद सप्त ऋषियों का पूजन करें। ऋ षि पंचमी की कथा सुनें। इस दिन फलाहार के रूप में मोरधन खाया जाता है। शाम के समय भोजन ग्रहण कर सकती हैं।
पूजन के समय सप्तऋ षियों के नामों का उच्चारण करें-

  • कश्यपोत्रिर्भरद्वाजो विश्वामित्रोय गौतम:।
  • जमदग्निर्वसिष्ठश्च सप्तैते ऋ षय: स्मृता:।।
  • गृ•न्त्व‌र्ध्य मया दत्तं तुष्टा भवतु मे सदा।।

ऋषि पंचमी व्रत की कथा

विदर्भ देश में एक ब्राह्मण रहता था। उसकी पत्नी बड़ी पतिव्रता थी, जिसका नाम सुशीला था। ब्राह्मण का एक पुत्र और एक पुत्री दो संतान थी। विवाह योग्य होने पर उसने समान कुल वर के साथ कन्या का विवाह कर दिया। कुछ दिनों बाद वह विधवा हो गई। दुखी ब्राह्मण दंपती कन्या सहित गंगा तट पर कुटिया बनाकर रहने लगे।

ब्राह्मण कन्या का शरीर कीड़ों से भर गया

एक दिन ब्राह्मण कन्या सो रही थी कि उसका शरीर कीड़ों से भर गया। कन्या ने सारी बात मां से कही। मां ने पति से सब कहा। ब्राह्मण ने समाधि द्वारा इस घटना का पता लगाकर बताया किपूर्व जन्म में भी यह कन्या ब्राह्मणी थी। इसने रजस्वला होते ही देव स्थान को छू लिया था। इस जन्म में इसने ऋ षि पंचमी का व्रत नहीं किया। इसलिए इसके शरीर में कीड़े पड़े हैं। यदि यह शुद्ध मन से ऋ षि पंचमी का व्रत करें तो इसके सारे दुख दूर हो जाएंगे। पिता की आज्ञा से पुत्री ने विधिपूर्वक ऋ षि पंचमी का व्रत एवं पूजन किया। व्रत के प्रभाव से वह सारे दुखों से मुक्त हो गई।

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