Bharat Tiwari Encounter: भरत तिवारी के घर पहुंचीं पवन सिंह की पत्नी Jyoti Singh, पुलिस की थ्योरी पर उठाए सवाल

Bharat Tiwari Encounter: बिहार के भोजपुर जिले में हुए भरत भूषण तिवारी पुलिस एनकाउंटर मामले ने राज्य की सियासत में भारी हलचल पैदा कर दी है। इस कथित मुठभेड़ पर लगातार सवाल उठ रहे हैं और राजनीतिक तपिश भी बढ़ रही है।

इस बीच, प्रसिद्ध भोजपुरी गायक और अभिनेता पवन सिंह की पत्नी ज्योति सिंह (जो फिलहाल उनसे अलग रह रही हैं) ने इस पूरे घटनाक्रम में अपनी एंट्री दर्ज कराई है। उन्होंने सीधे पीड़ित परिवार से उनके घर जाकर मुलाकात की और पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर आपत्ति जताई।

Jyoti Singh visits Bharat Bhushan Tiwari s family in Bhojpur

इस पूरे मामले में जगदीशपुर के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (SDPO) राजेश वर्मा को उनके पद से तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया है। प्रशासनिक फेरबदल की इस बड़ी कार्रवाई ने एनकाउंटर की निष्पक्षता पर उठ रहे सवालों को और बल दे दिया है।

ज्योति सिंह ने पुलिस की थ्योरी पर उठाए गंभीर सवाल

पीड़ित परिवार से मुलाकात के दौरान ज्योति सिंह ने पुलिसिया एनकाउंटर की थ्योरी को पूरी तरह से संदेहास्पद करार दिया। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा, "हम यह सुनिश्चित करने के लिए अपनी पूरी ताकत से आवाज उठाएंगे कि भरत को न्याय मिले। यह एक लोकतंत्र है, जहां हर किसी को अपनी आवाज उठाने, सवाल पूछने और शिकायत दर्ज कराने की पूरी स्वतंत्रता मिली हुई है। इसलिए इस मामले में पीड़ित परिवार को न्याय मिलना ही चाहिए।"

ज्योति सिंह ने पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा करते हुए गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, अगर भरत ने पहले ही पुलिस के सामने अपना हथियार सरेंडर कर दिया था, तो पुलिस को उन्हें गिरफ्तार करना चाहिए था। जब आरोपी ने पहले ही आत्मसमर्पण कर दिया था, तो फिर कानूनन कार्रवाई की जानी चाहिए थी, न कि इस तरह की घटना को अंजाम दिया जाना चाहिए था।

अपनी बातचीत को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने तल्ख लहजे में कहा, "एनकाउंटर जैसी स्थिति केवल तभी उत्पन्न होती है जब आप पर सामने से हमला किया गया हो। जब वे पहले ही अपना हथियार पुलिस के हवाले सरेंडर कर चुके थे, तो मुझे नहीं लगता कि यह एनकाउंटर किसी भी तरह से जायज था। अब इस पूरे प्रकरण की गहनता से आवश्यक जांच और पूछताछ की जाएगी। मुझे पूरी उम्मीद है कि बिहार सरकार असली दोषियों को पकड़ेगी और उन्हें सख्त से सख्त सजा देगी।"

जगधीशपुर SDPO राजेश वर्मा हटाए गए

इस एनकाउंटर को लेकर पूरे बिहार और खास तौर पर भोजपुर में स्थानीय जनता का रोष बहुत बढ़ गया था। लोगों का आरोप था कि पुलिस ने कानून का उल्लंघन करते हुए यह नकली एनकाउंटर किया है। लगातार जारी विरोध प्रदर्शनों और राजनीतिक दबाव के बाद गृह विभाग ने जगदीशपुर के SDPO राजेश वर्मा को हटाने का कदम उठाया है।

विभागीय सूत्रों के मुताबिक, जिले के वरिष्ठ अधिकारियों को इस पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। एसडीपीओ राजेश वर्मा को हटाए जाने की इस कार्रवाई को पुलिस मुख्यालय द्वारा जनता के गुस्से को शांत करने और मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने की दिशा में एक प्राथमिक कदम के रूप में देखा जा रहा है।

दरअसल, पूरा मामला भोजपुर जिले के उदवंतनगर थाना क्षेत्र से जुड़ा हुआ है, जहां पूर्व में पुलिस और अपराधियों के बीच कथित मुठभेड़ हुई थी। इस घटना में भरत भूषण तिवारी पुलिस की गोलीबारी का शिकार हुए थे। पुलिस ने शुरुआत में दावा किया था कि उन्होंने आत्मरक्षा में गोली चलाई थी, लेकिन परिजनों ने इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया था।

बिहार में कानून व्यवस्था और उठते राजनीतिक सवाल

भरत भूषण तिवारी के परिजनों का सीधा आरोप है कि पुलिस ने उन्हें पकड़ने के बाद गोली चलाई। इस घटना ने पूरे बिहार में मानवाधिकारों और पुलिस एनकाउंटर की नीति पर एक नई बहस छेड़ दी है। स्थानीय नागरिक समाज और मानवाधिकार कार्यकर्ता भी इस घटना की स्वतंत्र न्यायिक जांच की मांग कर रहे हैं।

उनका कहना है कि पुलिस को अपराधियों के खिलाफ अभियान चलाने का पूरा अधिकार है, लेकिन यह सब कानून की तय सीमाओं के भीतर ही होना चाहिए। देखना यह होगा कि सरकार द्वारा गठित जांच टीम इस मामले में क्या रिपोर्ट सौंपती है और पीड़ित परिवार को कब तक वास्तविक न्याय मिल पाता है।

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