Ramadan 2024: आज पहला रोजा, क्या है सहरी-इफ्तार का टाइम?
Ramadan 2024 (सहरी और इफ्तार का समय): बरकत और इबादत का महीना कहे जाने वाले रमजान का इंतजार अल्लाह के बंदों को बेसब्री से होता है। खुदा के नजदीक ले जाने वाले इस महीने की शुरुआत 11 मार्च से से हो चुकी है, जिसे की माह- ए-रमजान कहा जाता है।

रविवार को सऊदी अरब में रमजान का चांद नजर आया था जिसके बाद वहां पहला रोजा वहां सोमवार को रखा गया था, भारत में अरब के एक दिन बाद रमजान की शुरुआत मानी जाती है इसलिए यहां आज पहला रोजा है।
मदरसा रजा-ए-मुस्तफा के कैलेंडर में तो सहरी और इफ्तार का समय भी बता दिया गया है। आपको बता दें कि माना जाता है कि ये महीना सीधा इंसान को खुदा से साक्षात्कार कराता है। इस दौरान लोग रोजा रखते हैं। 30 दिनों तक सूर्योदय से सूर्यास्त तक बिना पानी के रखे जाना वाला ये व्रत काफी कठिन होता है और इस दौरान इंसान को संयम बरतना पड़ता है।
पूरे 30 दिन के बाद ईद का पर्व आता है, जिसमें लोग गले मिलकर एक-दूसरे को ईद मुबारक बोलते हैं। ये त्योहार खुशियां और जोश लेकर आता है और इसी कारण इस दिन घरों में सेवईंया बनती हैं और इसी कारण इसे मीठी ईद बोलते हैं। मुस्तफा कैलेंडर के मुताबिक पहला रोजा 13 घंटा 18 मिनट का होगा जो कि इस पाक महीने का सबसे छोटा रोजा होगा तो वहीं इस महीने का अंतिम रोजा सबसे बड़ा रोजा होगा, जिसकी अवधि 14 घंटे 7 मिनट की होगी।
रमजान के दौरान लोग पांच वक्त की नमाज पढ़ते हैं
रमजान के दौरान लोग पांच वक्त की नमाज पढ़ते हैं। लोग खुदा का ध्यान करते हैं और उनसे अपने गुनाहों की माफी मागंते हैं और इस दौरान लोग अपनी कमाई का कुछ हिस्सा भी जरूरतमंदों को दान करते हैं, जिसे कि जकात कहा जाता है। जो लोग बीमार हैं वो और बच्चे, गर्भवती महिलाओं और जो हाल ही में मां बनी हैं वो औरतें उन्हें रोजा ना रखने की छूट होती है।
आज से शुरू हुआ रोजा 10 अप्रैल तक चलेगा यानी कि इस बार ईद का त्योहार 11 अप्रैल हो सकता है। हालांकि इसका फैसला तो 10 अप्रैल को ईद का चांद देखने के बाद ही किया जाएगा।

सहरी और इफ्तार का खासा महत्व होता है
आपको बता दें कि रोजे के दौरान सहरी और इफ्तार का खासा महत्व होता है। सूर्योदय से पहले खाए गए भोजन को सहरी और सूरज ढलने के बाद खाए गए भोजन को इफ्तार कहा जाता है। यहां देखें सहरी और इफ्तार का टाइम।










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