राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा: भगवान राम के बारे में जानें ये रोचक तथ्य
Lord Rama Unknown facts: रामजन्मभूमि अयोध्या में नवनिर्मित भव्य राम मंदिर में आज 22 जनवरी को भगवान श्रीराम मंदिर के गर्भग्रह में विराजमान हो चुके है। अमृत महोत्सव में मंत्रोच्चारण के बीच रामलला विग्रह की प्राण प्रतिष्ठा हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विधिवत पूजा अर्चना करके रामलला को प्रतिष्ठित करके राम भक्तों के 500 साल पुराने सपने को साकार कर दिया है।

अयोध्या के राजा दशरथ और माता कौशल्या के घर त्रेता युग में 'राम नवमी' के दिन भगवान श्रीराम का जन्म हुआ था। सबसे पहले भगवान श्रीराम पर आधारित रामायण की रचना महर्षि वाल्मिकी ने की थी जिसके बाद अनेक भाषाओं में इसकी रचना हुई लेकिन तुलसीदासजी द्वारा रचित "रामचरितमानसराम" सबसे प्रसिद्ध है और आज हर सनातन धर्म मानने वाले भक्तों के घर में ये ही 'रामचरितमानस' मौजूद है। आइए जानते हैं भगवान श्रीराम से जुड़े कुछ रोचक तथ्य ....
भगवान राम का असली नाम क्या है?
शास्त्रों के अनुसार भगवान राम असली नाम "दशरथ राघव" और दूसरा रामचंद्र है लेकिन रघु राजवंश के गुरु महर्षि वशिष्ठ ने नामकरण संस्कार के समय उनका नाम नाम रखा था।
भगवान श्री राम का अर्थ क्या है?
- राम का संधि विच्छेद र+आ+म है, इसमें 'र' से रसातल, 'आ' से आकाश और 'म' से मृत्यु लोक। अर्थात जो सर्वत्र है और पाताल, आकाश और धरती का स्वामी है वही राम है।
- संस्कृत भाषा के अनुसार राम का अर्थ पूरे ब्रह्मांड में निहित या रमा हुआ तत्व अर्थात स्वयं ब्रह्म।
- महर्षि वशिष्ठ के अनुसार 'राम' शब्द दो बीजाणुओं (बीजाक्षर), 'अग्नि बीज' और 'अमृत बीज' से बना है। ये अक्षर मन, शरीर और आत्मा को शक्ति प्रदान करते हैं।
भगवान विष्णु का सातवां अवतार
भगवान श्रीराम विष्णु भगवान के जो 10 अवतार हुए उनमें 7वां अवतार बताए जाते हैं। भगवान राम का अवतार में जन्म लेने से पहले भगवान विष्णु के अवतार मत्स्य (मछली), कूर्म (कछुआ), वराह (सूअर), नरसिम्हा (आदमी और शेर), वामन (बौना) और परशुराम थे। कृष्ण, बुद्ध और कल्कि भी भगवान के ही अवतार ही हैं।
सबसे प्राचीन मानव देवता
धरती पर मानव रूप में पूजे जाने वाले भगवान श्रीराम को सबसे प्राचीन देवता माना गया है। इसकी वजह है कि भगवान राम का जन्म 'त्रेता युग' में हुआ था और त्रेता युग आज से 1,296,000 साल पहले समाप्त हो चुका है। इस त्रेता युग में भगवान विष्णु, श्रीराम, वामन और परशुराम भी अवतरित हुए थे।
सूर्य के वंशज हैं भगवान श्री राम
शास्त्रों के अनुसार भगवान श्रीराम का जन्म 'इक्ष्वाकु' वंश में हुआ था। इस वंश की स्थापना भगवान सूर्य के पुत्र 'राजा इक्ष्वाकु' ने की थी। ये ही वजह है कि भगवान श्रीराम को 'सूर्यवंशी' कहा जाता है।
तीन बार राम नाम लेना यानी हजारों देवताओं का स्मरण करने के समान
तीन बार राम नाम का उच्चारण हजारों देवताओं को स्मरण करने के समान है। ये बात स्वयं भगवान शिव ने कही थी उन्होंने कहा था कि तीन बार भगवान का राम का नाम लेने से हजार देवताओं के नाम का उच्चारण करने के बराबर आर्शीवाद मिलता है। इस बात का उल्लेख महाभारत में है।
क्यों कहा जाता है मर्याादा पुरुषोत्तम राम
श्रीराम भगवान को 16 में से 14 कलाएं आती है ये ही कारण है कि श्रीराम को पुरुषों में उत्तम मर्यादा पुरुषोत्तम राम भी कहा जाता है। इसके अलावा भगवान श्रीराम 16 गुणों से युक्त थे।
भगवान राम के धनुष का नाम
भगवान राम के धनुष का नाम कोदंड था, जिसका अर्थ है इसीलिए राम को कोदंड भी कहा जाता है। बांस से निर्मित ये धनुष चमत्कारिक धनुष था जिसे केवल भगवान राम ही धारण कर सकते हैं।












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