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Ram Mandir Inauguration: आज जरूर पढ़ें राम चालीसा और स्तुति, बन जाएंगे बिगड़े काम

Ram Mandir Inauguration Chalisa: अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा में अब कुछ ही घंटे रह गए हैं। आज का दिन बेहद अलौकिक है क्योंकि आज रामभक्तों का वो सपना पूरा होने जा रहा है, जो कि उन्होंने पूरे 500 सालों पहले देखा था।

 Ram Mandir Inauguration

भगवान राम एक विश्वास का नाम है, जो सत्य और मर्यादा के साक्षात अवतार हैं। वो कण-कण में हैं। माना जाता है कि जो कोई भी कौशल्यानंदन की पूजा सच्चे मन से करता है उसे कभी कोई दुख छू भी नहीं पाता है। राम के आशीष से इंसान धनी बनता है, वो तरक्की करता है।

वो हर तरह के सुख का प्राप्त करता है और तरक्की का भागीदार बनता है। उनकी पूजा विशेष स्तुति, चालीसा और आरती के साथ करनी चाहिए। ऐसा करने से प्रभ श्री राम अपने भक्तों पर हमेशा कृपा बनाए रखते हैं।

यहां पढ़ें श्रीराम चालीसा

दोहा

  • आदौ राम तपोवनादि गमनं हत्वाह् मृगा काञ्चनं
  • वैदेही हरणं जटायु मरणं सुग्रीव संभाषणं बाली निर्दलं
  • समुद्र तरणं लङ्कापुरी दाहनम् पश्चद्रावनं
  • कुम्भकर्णं हननं एतद्धि रामायणं।

चौपाई

  • श्री रघुवीर भक्त हितकारी।
  • सुन लीजै प्रभु अरज हमारी॥
  • निशिदिन ध्यान धरै जो कोई।
  • ता सम भक्त और नहिं होई॥
  • ध्यान धरे शिवजी मन माहीं।
  • ब्रह्म इन्द्र पार नहिं पाहीं॥

पूरी चालीसा पढ़ने के लिए क्लिक करें- श्री राम चालीसा , जानें महत्व और लाभ

श्री राम स्तुति

॥दोहा॥

  • श्री रामचन्द्र कृपालु भजुमन
  • हरण भवभय दारुणं ।
  • नव कंज लोचन कंज मुख
  • कर कंज पद कंजारुणं ॥१॥
  • कन्दर्प अगणित अमित छवि
  • नव नील नीरद सुन्दरं ।
  • पटपीत मानहुँ तडित रुचि शुचि
  • नोमि जनक सुतावरं ॥२॥
  • भजु दीनबन्धु दिनेश दानव
  • दैत्य वंश निकन्दनं ।
  • रघुनन्द आनन्द कन्द कोशल
  • चन्द दशरथ नन्दनं ॥३॥
  • शिर मुकुट कुंडल तिलक
  • चारु उदारु अङ्ग विभूषणं ।
  • आजानु भुज शर चाप धर
  • संग्राम जित खरदूषणं ॥४॥
  • इति वदति तुलसीदास शंकर
  • शेष मुनि मन रंजनं ।
  • मम् हृदय कंज निवास कुरु
  • कामादि खलदल गंजनं ॥५॥
  • मन जाहि राच्यो मिलहि सो
  • वर सहज सुन्दर सांवरो ।
  • करुणा निधान सुजान शील
  • स्नेह जानत रावरो ॥६॥
  • एहि भांति गौरी असीस सुन सिय
  • सहित हिय हरषित अली।
  • तुलसी भवानिहि पूजी पुनि-पुनि
  • मुदित मन मन्दिर चली ॥७॥
  • ॥सोरठा॥
  • जानी गौरी अनुकूल सिय
  • हिय हरषु न जाइ कहि ।
  • मंजुल मंगल मूल वाम
  • अङ्ग फरकन लगे।
  • रचयिता: गोस्वामी तुलसीदास

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