इस रक्षाबंधन पर भाई को बांधे वैदिक राखी, होगा सब शुभ-शुभ
नई दिल्ली। भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक रक्षाबंधन का त्योहार 7 अगस्त को है। सारे बाजार एक से एक सुंदर और कीमती राखियों से पट गए हैं। राखियों की इस भीड़ में से हर बहन अपने प्यारे भाई के लिए एक ऐसी राखी खोज लेना चाहती है, जो बेजोड़ हो, अनमोल हो और भाई के लिए हर तरह से शुभ हो।
लेकिन क्या आप जानती हैं कि अपने भाई को जीवनभर संपूर्ण सुख, संपदा, यश, स्वास्थ्य, और उन्नति का आशीर्वाद देने और उसे हर अमंगल से बचाने में सक्षम एक अनमोल राखी आप घर पर बना सकती हैं। इस राखी का नाम है वैदिक राखी और अपने नाम के अनुरूप इसका संबंध वेदों में वर्णित उन समस्त शुभ और मंगल वस्तुओं से है, जो किसी भी व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकती है।
इसे बनाना कैसे है, आइए जानते हैं-

जीवन में शुभता का संचार
वैदिक राखी बनाने के लिए आपको जिन वस्तुओं की आवश्यकता होगी, वे सब आपके घर में ही उपलब्ध हों। बहुत ही सरल और पवित्र वस्तुओं से तैयार होने वाली इस राखी को बनाने में अधिक वक्त भी नहीं लगता और हर तरह से आपके भाई के जीवन में शुभता का संचार करती है।

राखी बनाने में लगने वाली वस्तुएं इस प्रकार हैं-
- ऊनी, रेशमी या सूती पीला कपड़ा
- दूर्वा
- अक्षत या चावल
- केसर या हल्दी
- चंदन
- सरसों या राई के दाने
- पीला कपड़ा: सबसे पहले हम छोटा सा पीला कपड़ा लेते हैं। पीला रंग हमारे समस्त धार्मिक कार्यों या पूजा से जुड़े हर काम में उपयोग में लिया जाता है। इसका कारण यह है कि पीला रंग सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है। पीले रंग की वैदिक राखी भाई के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा लाकर उसका जीवन उत्साह से भरती है।
- दूर्वा: दूर्वा का स्थान भारतीय पूजन सामग्री में अनादि, अनंतता का प्रतीक है। जैसा कि सभी जानते हैं दूर्वा का एक बीज भूमि पर लगने पर वह तीव्र गति से फैल जाती है और एक बार लगने के बाद उस जगह से कभी समाप्त नहीं होती है। वैदिक राखी में दूर्वा रखने का तात्पर्य यही है कि दूर्वा की तरह ही भाई भी तीव्र गति से उन्नति करे और उसका ऐश्वर्य कभी समाप्त ना हो। दूसरी बात यह है कि दूर्वा हमारे प्रथम पूज्य देव गणपति को अत्यंत प्रिय है। राखी में दूर्वा रखने पर माना जाता है कि उसे गणपति जी का आशीर्वाद मिल गया है। राखी बांधने पर यह आशीर्वाद भाई तक पहुंचता है और विघ्नहर्ता गणेश उसके जीवन के समस्त विघ्नों को हर लेते हैं।
- अक्षत: अक्षत या साबुत चावल हमारी पूजा की थाली की एक आवश्यक वस्तु है। अक्षत पूर्णता का प्रतीक है अर्थात् जो कुछ अर्पित किया जाए, पूर्णता से किया जाए। जब आप अपने भाई को राखी बांधें, तो उसमें आपका संपूर्ण प्रेम, संपूर्ण आशीर्वाद समाहित हो, किसी तरह की कोई कसर ना रह जाए।
- केसर: केसर की प्रकृति तीक्ष्ण होती है। वैदिक राखी के माध्यम से यही तीक्ष्णता भाई के जीवन में प्रवेश करती है और उसके तेज, ज्ञान और बल में वृद्धि होती है। केसर के स्थान पर यदि हल्दी का उपयोग किया गया हो, तो हल्दी भी जीवन में आरोग्यता और सकारात्मकता का विकास करती है। दोनों ही वस्तुएं भाई के उत्तम स्वास्थ्य और उन्नति की कामना को साकार करती हैं।
- चंदन: चंदन अपनी प्रकृति से ही शीतल होता है। वैदिक राखी में चंदन भाई के जीवन में शीतलता लाने और उसे समस्त तनावों से दूर रखने के लिए समाहित किया गया है। चंदन से युक्त राखी बांधने का संदेश यह भी रहता है कि भाई के जीवन में सदाचार, पवित्रता और सज्जनता का समावेश हो और चंदन के भांति ही उसके सद्गुणों की सुगंध दूर-दूर तक फैले।
- सरसों: सरसों की प्रकृति तीक्ष्ण होती है। यह दुर्गुणों का नाश करती है। वैदिक राखी में सरसों का समावेश इसलिए किया जाता है ताकि भाई के दुर्गुणों का नाश हो। साथ ही यदि कोई व्यक्ति उसे नुकसान पहंुचाना चाहता है, तो उसका भी शमन हो सके।

विधि
पीले रंग के छोटे से कपड़े में उपर्युक्त पांचों वस्तुएं बांधकर गोल या चौकोर पोटली की तरह सिलाई कर दें। अगर सामर्थ्य हो तो इन वस्तुओं के साथ आप स्वर्ण यानि सोना भी डाल सकती हैं। इससे राखी का प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है। अब इस तैयार राखी को कलावे या लाल मौली से जोड़ दें, जो डोर का काम करेगी। बस आपकी राखी तैयार है।

धार्मिक कार्यों या पूजा से जुड़े हर काम

वैदिक राखी

संपूर्ण मंगलकारी
वैदिक राखी सभी शुभ गुणों से संपन्न होकर संपूर्ण मंगलकारी है। इसे बांधते समय निम्नलिखित मंत्र का उच्चारण किया जाना श्रेष्ठ फल देता है-
येन बद्धोबली राजा दानवेन्द्रो महाबलः।
तेन त्वां मभिबध्नामि रक्षे मा चल मा चल।।
इस राखी को बहन अपने भाई, मां अपने बेटे और दादी अपने पोते को भी बांध सकती है। यह संपूर्ण रूप से शुभेच्छा सूत्र है और हर तरह से बांधे जाने वाले के लिए हितकारी है। यहां तक कि यदि कोई शिष्य भी अपने गुरु को यह वैदिक राखी अर्पित करता है, तो उसका सर्वांगीण मंगल होता है।












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