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Raksha bandhan 2023: 'कहीं भाभी को बांधते हैं चूड़ा राखी तो कहीं होती है समंदर की पूजा', जानिए कुछ खास बातें

Raksha bandhan 2023: श्रावण मास की पूर्णिमा को भाई-बहन के प्यार का त्योहार रक्षाबंधन पूरे देश में बड़ी ही धूमधाम से मनाया जाता है। ये पर्व केवल उल्लास का नहीं है, बल्कि ये त्योहार है एक-दूसरे पर भरोसा करने का, एक धागे के जरिए बहन अपने भाई से अपनी रक्षा का वचन लेती है तो वहीं भाई इसी धागे के जरिए अपनी बहन की हमेशा रक्षा करने की कसम खाता है। हमारे पर्व केवल हमें रिश्तों से नहीं जोड़ते बल्कि हमारे त्योहार हमें रिश्तों की अहमियत भी समझाते हैं।

Raksha bandhan 2023

हमारे देश में राखी केवल बहनें केवल अपने भाई की कलाई पर ही नहीं बांधती हैं, बल्कि भारत में भगवान को, ब्राह्मणों, गुरुओं, नेताओं और पेड़ों को भी राखी बांधी जाती है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के लोग भाईचारे के लिये एक दूसरे को भगवा राखी बांधते हैं, राखी का मतलब रक्षा सूत्र से है इसलिए आदिकाल से हमारे देश में लोग भगवान को राखी बांधते आए हैं और इस तरह से वो ईश्वर से अपने घर की सुख-शांति के लिए प्रार्थना करते हैं।

'चूड़ा राखी' या 'लूंबा राखी'

यही नहीं कई राज्यों में बहनें भाईयों के साथ ही अपनी भाभी को भी राखी बांधती हैं, इसे चूड़ा बंधाई भी कहा जाता है। मूल रूप से ये प्रथा राजस्थान में होती है लेकिन धीरे-धीरे अब ये बहुत जगहों पर मनाई जाने लगी है। राजस्थान में भाभी की राखी थोड़ी अलग होती है जिसे कि जिसे 'चूड़ा राखी' या 'लूंबा राखी' कहते हैं।

पति के सुख-दुख की साथी उसकी पत्नी होती है

भाभी को राखी बांधने के पीछे तर्क ये है कि विवाह के बाद पति के सुख-दुख की साथी उसकी पत्नी होती है इसलिए पति का वचन भी पत्नी का वचन ही हुआ इसलिए जैसे भाई अपनी बहन को वचन देता है ठीक उसी तरह से भाभी को भी ननद की रक्षा और साथ निभाने का वचन देना होता है।

'नारियल पूर्णिमा'

तो वहीं महाराष्ट्र में रक्षा बंधन का पर्व 'नारियल पूर्णिमा' के रूप में मनाया जाता है। इस दिन मराठी लोग नदी या समुद्र के तट पर जाकर अपने जनेऊ बदलते हैं, जिसके लिए विधिवत पूजा की जाती है, यही नहीं वो इसके बाद समंदर की पूजा करते हैं ,कहीं-कहीं पर ब्राह्मणों को भोज कराया जाता है।

गरीबों को दान-पुण्य भी करते हैं

तो वहीं इस दिन आदिवासी समुदाय पेड़ों को रक्षा सूत्र बांधकर इसकी पूजा करता है, जबकि देश के कुछ राज्यों में रक्षा बंधन के दिन किताबों की पूजा की जाती है और कहीं-कहीं पर लोग पवित्र नदियों में स्नान करके गरीबों को दान-पुण्य भी करते हैं।

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