Ahoi Ashtami 2021: अहोई अष्टमी पर क्यों होता है राधा कुंड स्नान,क्या है महत्व?
नई दिल्ली, 28 अक्टूबर। संतान सुख और उनकी लंबी आयु के लिए रखा जाने वाला अहोई अष्टमी व्रत आज है। आपको बता दें कि कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को अहोई अष्टमी कहते हैं। इस दिन महिलाएं सुबह से शाम तक निरजला व्रत रखती हैं और शाम को तारों का दर्शन करके और उन्हें अर्ध्य देकर अपना व्रत खोलती हैं। इस दिन राधा कुंड स्नान की विशेष परंपरा है, कहा जाता है कि इस कुंड में स्नान करने से निसंतान पति-पत्नी को संतान की प्राप्ति होती है।

लोग कहते हैं राधा कुंड में स्नान करने से भगवान श्री कृष्ण की प्रेयसी राधा रानी का आशीर्वाद प्राप्त होता है और इसी वजह से हर साल हजारों जोड़े यहां अहोई अष्टमी पर पवित्र डुबकी लगाने आते हैं। आपको बता दें कि राधा कुंड मथुरा नगरी से लगभग 26 किलोमीटर दूर स्थित है। हर साल अहोई अष्टमी के दिन यहां पर शाही स्नान का आयोजन किया जाता है। ऐसी मान्यता है कि श्रीकृष्ण ने इस कुंड में अहोई अष्टमी को रात 12 बजे स्नान किया था इसलिए यहां रात 12 बजे से ही शाही स्नान प्रारंभ हो जाता है।
ये है राधाकुंड स्नान का वक्त
- राधा कुंड स्नान गुरुवार, 28 अक्टूबर, 2021
- राधा कुंड अर्ध रात्रि स्नान मुहूर्त - 11:38 PM to 12:29 AM, 29 अक्टूबर
- अवधि - 00 घंटे 51 मिनट
- अहोई अष्टमी व्रत गुरुवार, 28 अक्टूबर, 2021
आइए जानते हैं राधा-रानी के बारे में कुछ खास बातें
- पुराणों में राधा का चरित्र अत्यंत सुंदर, मोहक और त्यागमयी रहा है।
- वो कृष्ण की प्रेयसी गोपिका थीं।
- उन्हें प्रेम में इतनी श्रद्धा थी जिससे प्रभावित होकर श्रीकृष्ण ने उन्हें वरदान दिया था कि पूरे जगत में तुम्हारा नाम हमेशा मेरे नाम के आगे आएगा इसलिए लोग 'राधा-कृष्ण' कहते हैं।
- राधा का जिक्र पद्म पुराण और ब्रह्मवैवर्त पुराण में तो है लेकिन महाभारत और भागवत पुराण में राधा का वर्णन नहीं है।
- ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार कृष्ण जब नंदगांव छोड़कर चले गए थे तो उनका विवाह अयनघोष नामक व्यक्ति के साथ हुआ था।
- राधारानी का विश्वप्रसिद्ध मंदिर बरसाना ग्राम की पहाड़ी पर स्थित है।
- पुराणों के मुताबिक राधा बरसाना ग्राम की बेटी थीं।












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