'BJP भी अब DMK जैसी',अकेले चुनाव लड़ेंगे अन्नामलाई, PM मोदी के बारे में जो कहा, वो आप सोच भी नहीं सकते!
k. Annamalai News: दक्षिण भारत की सियासत में इस वक्त भूचाल आया हुआ है। तमिलनाडु बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष के. अन्नामलाई का इस्तीफा सिर्फ एक नेता का पार्टी छोड़ना नहीं है, बल्कि यह राज्य की पूरी राजनीतिक बिसात को पलटने वाला कदम साबित हो रहा है। बीजेपी से अलग होने के तुरंत बाद अन्नामलाई ने जो बयान दिए हैं, उसने साफ कर दिया है कि वे अब बैकफुट पर खेलने के मूड में बिल्कुल नहीं हैं।
अन्नामलाई ने सीधे तौर पर देश की सबसे बड़ी पार्टी को चुनौती देते हुए कहा है कि अब उनके लिए बीजेपी भी वैसी ही है जैसी डीएमके (DMK) या एआईएडीएमके (AIADMK) हैं। इतना ही नहीं, उन्होंने साल 2031 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव को लेकर एक ऐसा बड़ा ऐलान कर दिया है, जिससे हर राजनीतिक दल के दफ्तर में खलबली मच गई है।

🔷'अब BJP भी हमारे लिए DMK जैसी ही पार्टी'
अन्नामलाई ने बीजेपी छोड़ने के बाद साफ कर दिया कि उनकी नई राजनीतिक यात्रा में किसी भी पुरानी पार्टी के लिए कोई खास जगह नहीं होगी। उन्होंने बड़े ही कड़े लहजे में कहा कि वे अब बीजेपी को भी उसी चश्मे से देखेंगे जिससे वे डीएमके, एआईएडीएमके और किसी भी पार्टियों को देखते आए हैं। यानी अब बीजेपी उनके लिए कोई सगी नहीं रही, बल्कि एक राजनीतिक प्रतिद्वंदी बन चुकी है।
अन्नामलाई ने यह भी याद दिलाया कि उन्होंने हमेशा तमिलनाडु के हक की बात की है, भले ही इसके लिए उन्हें अपनी ही केंद्र सरकार की 'तीन-भाषा नीति' (Three-Language Policy) के खिलाफ आवाज क्यों न उठानी पड़ी हो। उन्होंने जनता से सीधा संवाद करते हुए भावुक अपील की और कहा, "कृपया मेरे साथ आइए, मुझ पर भरोसा कीजिए और विश्वास रखिए।"
🔷PM मोदी को लेकर क्या बोले अन्नामलाई?
अन्नामलाई ने इस्तीफे के बाद कहा, ''मेरे मन में प्रधानमंत्री मोदी के आज भी सर्वोच्च सम्मान है। मैं उनकी बहुत इज्जत करता हूं। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के शीर्ष नेतृत्व ने मुझे जो अवसर और जिम्मेदारियां दीं, उसके लिए मैं हमेशा आभारी रहूंगा।''
🔷अन्नामलाई अब लड़ेंगे विधानसभा चुनाव?
अन्नामलाई के भविष्य के प्लान को लेकर चल रही तमाम अटकलों पर खुद उन्होंने ही विराम लगा दिया है। उन्होंने एलान किया है कि वे साल 2031 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में पूरी तरह स्वतंत्र (Independently) होकर मैदान में उतरेंगे।
अन्नामलाई ने अपनी इस रणनीति के पीछे की बड़ी सोच को साझा करते हुए कहा कि अब तमिलनाडु को किसी एक व्यक्ति के इशारे पर चलने वाली 'पर्सनालिटी ड्रिवेन' राजनीति से बाहर निकालना होगा। राज्य को इस वक्त एक 'आम आदमी की राजनीति' (Common-Man Politics) की जरूरत है, जहां हर फैसले के केंद्र में आम जनता हो। उन्होंने कहा कि उनका यह नया आंदोलन सबको साथ लेकर चलेगा और इसमें किसी के लिए कोई अलग राय नहीं है। तब तक वे समाज के हर वर्ग को एकजुट करने का काम करेंगे।
लेकिन जब बात तमिलनाडु के राजनीतिक भविष्य और संगठन की दिशा की आई, तो पिछले 18 महीनों से चल रहे मतभेद इतने बढ़ गए कि साथ चलना नामुमकिन हो गया। अन्नामलाई ने गरिमा दिखाते हुए कहा कि वे तमिल संस्कृति का पालन करते हैं, जहां अपनी बात रखने के बाद सम्मानपूर्वक अलग हो जाना ही सही तरीका है। वे नहीं चाहते थे कि उनके विचारों की वजह से बीजेपी के ऊपर कोई बोझ या परेशानी खड़ी हो, इसलिए उन्होंने खुद ही अलग होने का रास्ता चुना।
🔷अन्नामलाई के इस्तीफे पर क्या बोली कांग्रेस?
अन्नामलाई के इस इस्तीफे पर विपक्ष ने भी तीखी नजर रख रखी है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद मणिकम टैगोर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर एक बड़ा दावा करके इस पूरे मामले को एक नया मोड़ दे दिया है।
मणिकम टैगोर का कहना है कि अन्नामलाई का इस्तीफा और इस पर प्रधानमंत्री मोदी की चुप्पी किसी बड़ी रणनीति का हिस्सा है। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी और आरएसएस (RSS) तमिलनाडु में एक वैकल्पिक राजनीतिक मोर्चा तैयार करने के लिए 'प्लान बी' (Plan B) पर काम कर रहे हैं।
टैगोर ने जनता को आगाह करते हुए कहा कि जो लोग सीधे तरीके से तमिलनाडु में अपनी दाल नहीं गला पाए, वे अब इस नए आंदोलन के जरिए वोटरों के बीच भ्रम पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं, इसलिए लोगों को सावधान रहने की जरूरत है।
🔷भाजपा ने अन्नामलाई के इस्तीफे पर क्या कहा?
अन्नामलाई के इस बड़े फैसले के बाद तमिलनाडु बीजेपी के मौजूदा अध्यक्ष नैनार नागेंद्रन ने पहली बार अपनी चुप्पी तोड़ी है। हालांकि, उनके बयान में एक बेरुखी साफ नजर आई। नागेंद्रन ने कहा कि अन्नामलाई के पार्टी छोड़ने से तमिलनाडु बीजेपी पर कोई असर नहीं पड़ेगा। जब उनसे अन्नामलाई द्वारा नई पार्टी या आंदोलन शुरू करने के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हर किसी को अपनी पार्टी शुरू करने का अधिकार है।
भले ही राज्य नेतृत्व इस नुकसान को खारिज कर रहा हो, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है। अन्नामलाई के जाने से बीजेपी को 3 बड़े झटके लग सकते हैं:
- युवाओं पर पकड़ ढीली होना: अन्नामलाई ने अपनी कड़क और साफ-सुथरी छवि से राज्य के युवाओं और शहरी मध्यम वर्ग को पार्टी से जोड़ा था, जो अब बिखर सकता है।
- बड़ा चेहरा खोना: पिछले 4-5 सालों में अन्नामलाई ही तमिलनाडु में बीजेपी की पहचान बने हुए थे। फिलहाल उनके कद का कोई दूसरा नेता पार्टी के पास नहीं है।
- विपक्षी वोटों का बिखराव: अन्नामलाई सत्ताधारी डीएमके के सबसे बड़े और मुखर आलोचक थे। उनके हटने से बीजेपी की आक्रामक धार कमजोर पड़ सकती है।
हालांकि, बीजेपी के कुछ रणनीतिकारों का मानना है कि पार्टी को ज्यादा नुकसान नहीं होगा क्योंकि तमिलनाडु में बीजेपी का कोर वोटर पीएम मोदी के नाम पर वोट देता है, न कि किसी स्थानीय चेहरे पर। इसके अलावा एआईएडीएमके के साथ हुआ गठबंधन भी इस सांगठनिक नुकसान को संभालने में मददगार साबित हो सकता है।

🔷अन्नामलाई के भाजपा में कैसा रहा 6 साल का सफर?
कर्नाटक कैडर के पूर्व आईपीएस अधिकारी रहे के. अन्नामलाई का बीजेपी में आना और जाना, दोनों ही बेहद नाटकीय रहा। आइए नजर डालते हैं उनके इस 6 साल के सफर पर
- 25 अगस्त 2020: अन्नामलाई ने खाकी वर्दी को अलविदा कहकर बीजेपी की सदस्यता ली और पार्टी ने तुरंत उन्हें तमिलनाडु का उपाध्यक्ष बना दिया।
- 16 जुलाई 2021: उनकी लोकप्रियता को देखते हुए बेहद कम उम्र में उन्हें तमिलनाडु बीजेपी का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया गया, जहां वे अप्रैल 2025 तक रहे।
- मजबूत जनसंपर्क: उन्होंने पूरे राज्य में 'एन मन्न, एन मक्कल' (मेरी धरती, मेरे लोग) पदयात्रा निकाली और बीजेपी को बूथ स्तर तक ले गए।
- चुनावी मुकाबले: उन्होंने 2021 का विधानसभा चुनाव अरावकुरुची से और 2024 का लोकसभा चुनाव कोयंबटूर से लड़ा। हालांकि वे दोनों ही चुनाव हार गए, लेकिन उन्होंने पार्टी का वोट शेयर 3.6% से बढ़ाकर 11.2% तक पहुंचा दिया, जो बीजेपी का अब तक का सबसे बेहतरीन प्रदर्शन था।
- मतभेद और विदाई: डीएमके सरकार के खिलाफ भ्रष्टाचार के मुद्दों पर लगातार लड़ने वाले अन्नामलाई आखिरकार जून 2026 में बीजेपी आलाकमान से वैचारिक मतभेदों के कारण हमेशा के लिए अलग हो गए। अब वे अपने नए सिद्धांतों के साथ एक नए राजनीतिक आयाम की शुरुआत करने जा रहे हैं।














Click it and Unblock the Notifications