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Punarvasu Nakshatra: पाना है प्रमोशन, नहीं बन रही है बॉस से बात तो जरूर करें ये उपाय

Punarvasu Nakshatra: चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को दुर्गाष्टमी कहा जाता है। इस दिन हिंदू घरों में अपनी-अपनी कुलदेवी का पूजन किया जाता है। अनेक घरों में नवमी के दिन भी कुलदेवी का पूजन किया जाता है। अष्टमी भवानी उत्पत्ति का दिन भी है। इस दिन पुनर्वसु नक्षत्र है जिसमें देवी का पूजन करने से अनेक कामनाओं की सिद्धि होती है।

यह नक्षत्र अष्टमी के दिन 5 अप्रैल 2025 शनिवार केा लगा है।पुनर्वसु नक्षत्र 27 नक्षत्रों में क्रम में सातवां नक्षत्र है। इस नक्षत्र की देवी अदिति हैं। इसके स्वामी ग्रह बृहस्पति हैं। अष्टमी के दिन पुनर्वसु नक्षत्र का आना अपने आप में एक विशिष्ट संयोग होता है।

Punarvasu Nakshatra

इस नक्षत्र में देवी दुर्गा का पूजन, मंत्रों का जाप, दुर्गासप्तशती का पाठ, हवन आदि करने से इच्छित कामनाओं की पूर्ति होती है।

क्या विशेष करें इस दिन (Punarvasu Nakshatra)

पुनर्वसु नक्षत्र में आई अष्टमी के दिन देवी दुर्गा के चित्र या मूर्ति का पूजन करें। देवी को इत्र, मीठा पान, चमेली के फूलों का हार या गजरा अर्पित करें। इसके बाद पांच फलों के रसों का भोग लगाएं। एक तेल और एक घी का दीपक लगाकर सिद्ध कुंजिका स्तोत्र का पाठ करें। पाठ से पहले अपनी कामना मन में बोलें जो आपको पूरी करवाना चाहते हैं। पाठ समाप्ति के बाद देवी की आरती करें।

कच्चे नींबू लेकर उन पर सिंदूर लगाकर देवी को भेंट करें

इस दिन पांच हरे कच्चे नींबू लेकर उन पर सिंदूर लगाकर देवी को भेंट करें। इसके साथ लौंग और इलायची भी भेंट करें। ऊं दुं दुर्गाये नम: मंत्र का एक माला रुद्राक्ष की माला से जाप करके नींबू किसी चौराहे पर फेंक आएं और लौंग इलायची को लाल कपड़े में बांधकर अपनी तिजोरी में रख लें। इससे धन के भंडार भरे रहेंगे।

यह दिन अविवाहित युवक-युवतियों के लिए विशेष है

पुनर्वसु नक्षत्र का स्वामी बृहस्पति है। इसलिए यह दिन अविवाहित युवक-युवतियों के लिए विशेष है। यदि उनके विवाह में किसी प्रकार की बाधा आ रही है तो इस दिन देवी का पीले पुष्पों से श्रृंगार करें। पीली मिठाई का भोग लगाएं। देवी को इत्र भेंट करें और शीघ्र विवाह की कामना करें। ग्रह बाधा दूर होगी और विवाह का मार्ग खुलेगा।

पुनर्वसु नक्षत्र और अष्टमी के दिन एक मिट्टी का कलश लेकर उसमें चने की दाल भरें, हल्दी की पांच गांठ रखें और इसे किसी विष्णु मंदिर में रखकर आएं, सारे संकट दूर होंगे, बाधाएं दूर होंगी और उन्नति के रास्ते खुलेंगे

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