Parshuram Jayanti 2025: कौन हैं परशुराम? क्यों काटा था उन्होंने कुल्हाड़ी से अपनी मां का सिर?
Parshuram Jayanti 2025: आज पूरे देश में परशुराम जयंती मनाई जा रही है, विष्णु भगवान के छठे अवतार के रूप में पूजे जाने वाले भगवान परशुराम का जन्म महर्षि जमदग्नि और माता रेणुका के घर हुआ था। वे भृगु वंश से थे और उनके पिता सप्तऋषियों में गिने जाते हैं।
परशुराम जन्म से ब्राह्मण थे, परंतु उन्होंने क्षत्रिय धर्म का पालन करते हुए युद्ध-कौशल और अस्त्र-शस्त्रों की शिक्षा हासिल की थी।उनका जन्म वैशाख मास की तृतीया के दिन हुआ था, जिसे कि अक्षय तृतीया के रूप में पूजा जाता है।

परशुराम का नाम "परशु" (कुल्हाड़ी) और "राम" (विष्णु के अवतार) से मिलकर बना है, जिसका अर्थ है "कुल्हाड़ी धारण करने वाला राम"। परशुराम को धर्म के रक्षक के रूप में पूजा जाता है।
परशुराम ने क्यों काटा था उन्होंने कुल्हाड़ी से अपनी मां का सिर? (Parshuram Jayanti 2025)
उनके बारे में कई तरह की कहानियां प्रचलित हैं लेकिन एक कथा सबसे ज्यादा लोकप्रिय है और वो ये कि उन्होंने अपनी मां का कुल्हाड़ी से सिर काटा था। दरअसल श्रीमद भागवत के अनुसार ऋषि जमदग्नि के यज्ञ के लिए रेणुका जल लेने गई थीं, लेकिन वहां गंधर्वराज चित्ररथ को देखकर वो मोहित हो गईं , जिससे जल लाने में देरी हो गई थी। जिस पर ऋषि जमदग्नि का पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया था और उन्होंने गुस्से में आकर रेणुका को मृत्युदंड दे दिया।
महर्षि ने बेटों को मां का वध करने को कहा (Parshuram Jayanti 2025)
महर्षि ने अपने सभी पुत्रों को कहा कि वो माता का सिर काट दें, इस पर सभी पुत्र पीछे हट गए, तब ऋषि ने अपने बेटों को श्राप देकर सबकी स्मरण शक्ति को कम कर दिया। इसके बाद उन्होंने परशुराम को भी ऐसा करने के लिए कहा। भगवान परशुराम ने तुरंत अपने पिता की आज्ञा का पालन किया और अपनी मां का सिर कुल्हाड़ी से काट डाला।
'मेरी मां को पुनर्जीवित और मेरे भाईयों को पहले जैसा बना दें' (Parshuram Jayanti 2025)
इस पर ऋषि जमदग्नि उनसे काफी प्रस्नन हुए और उनसे वरदान मांगने को बोले तो इस पर भगवान परशुराम ने कहा कि 'आप अपने तेज से मेरी मां को पुनर्जीवित और मेरे भाईयों को पहले जैसा बना दें। महर्षि जमदग्नि उनसे काफी प्रसन्न हुए और उन्होंने ऐसा ही किया और यही नहीं उन्होंने अपने बेटे परशुराम को कभी पराजय का सामना न करने वाला आशीष भी दिया था।'
कुछ खास बातें (Parshuram Jayanti 2025)
- परशुराम सप्त चिरंजीवियों में से एक हैं। वे अभी भी जीवित हैं और भविष्य में भगवान कल्कि के गुरु बनेंगे।
- परशुराम ने अपने परशु (कुल्हाड़ी) से 21 बार पृथ्वी से अधर्मी क्षत्रियों का नाश किया था।
- वे भगवान शिव के परम भक्त थे और शिव ने ही उन्हें अपना परशु नामक अस्त्र प्रदान दिया था।
- उन्होंने अधर्म और अन्याय के विरुद्ध युद्ध किया और धर्म रक्षक के रूप में पूजे जाते हैं।
DISCLAIMER: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। वनइंडिया लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है।












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