Akshaya Tritiya 2025: अक्षय तृतीया पर क्यों खरीदते हैं सोना-चांदी? क्या है इसके पीछे की कहानी?
Akshaya Tritiya 2025: वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को 'अक्षय तृतीया' का पर्व मनाया जाता है, ये दिन बहुत ज्यादा पावन है, इस दिन सोना-चांदी खरीदने की परंपरा है। माना जाता है कि 'अक्षय तृतीया' के दिन सोने की खरीदारी करने से व्यक्ति को न केवल भौतिक सुख मिलता है, बल्कि उस पर मां लक्ष्मी और विष्णु भगवान की कृपा हमेशा बनी रहती है और उसके पास भूलकर भी कोई कष्ट नहीं आता।
'अक्षय तृतीया' के दिन सोने की खरीदारी करने से व्यक्ति को न केवल भौतिक सुख मिलता है, बल्कि उस पर मां लक्ष्मी और विष्णु भगवान की कृपा हमेशा बनी रहती है और उसके पास भूलकर भी कोई कष्ट नहीं आता है।

'अक्षय तृतीया' को पूरे दिन 'अबूझ मुहूर्त' होता है, इसलिए मांगलिक कार्य भी किए जाते हैं। कहते हैं कि इस दिन जो भी जोड़े विवाह के बंधन में बंधते हैं, उनका रिश्ता सात जन्मों के लिए अटूट हो जाता है और उनके रिश्ते में भूलकर भी कोई कड़वाहट नहीं आती है।
भगवान विष्णु की विशेष आरती करनी चाहिए
'अक्षय तृतीया' के दिन हर किसी को सोना-चांदी का सामान खरीदने के बाद उसकी पूजा जरूर करनी चाहिए, ऐसा करने से इंसान को दूने फल की प्राप्ति होती है। इस दिन भगवान विष्णु की विशेष आरती करनी चाहिए, ऐसा करने से दोहरे फल की प्राप्ति होती है।
भगवान विष्णु की आरती (Akshaya Tritiya 2025)
- ओम जय जगदीश हरे, स्वामी!
- जय जगदीश हरे।
- भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥
- ओम जय जगदीश हरे।
- जो ध्यावे फल पावे, दुःख विनसे मन का।
- स्वामी दुःख विनसे मन का।
- सुख सम्पत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥
- ओम जय जगदीश हरे।
- मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं मैं किसकी।
- स्वामी शरण गहूं मैं किसकी।
- तुम बिन और न दूजा, आस करूं जिसकी॥
- ओम जय जगदीश हरे।
- तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी।
- स्वामी तुम अन्तर्यामी।
- पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी॥
- ओम जय जगदीश हरे।
- तुम करुणा के सागर, तुम पालन-कर्ता।
- स्वामी तुम पालन-कर्ता।
- मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥
- ओम जय जगदीश हरे।
- तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।
- स्वामी सबके प्राणपति।
- किस विधि मिलूं दयामय, तुमको मैं कुमति॥ ॐ जय जगदीश हरे।
- दीनबन्धु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।
- स्वामी तुम ठाकुर मेरे।
- अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥
- ओम जय जगदीश हरे।
- विषय-विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।
- स्वमी पाप हरो देवा।
- श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा॥
- ओम जय जगदीश हरे।
- श्री जगदीशजी की आरती, जो कोई नर गावे।
- स्वामी जो कोई नर गावे।
- कहत शिवानन्द स्वामी, सुख संपत्ति पावे॥
- ओम जय जगदीश हरे।
DISCLAIMER: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। वनइंडिया लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है।












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