Nirjala Ekadashi 2025: वर्ष की सबसे बड़ी एकादशी पर करें ये उपाय, लक्ष्मी माता होंगी प्रसन्न
Nirjala Ekadashi 2025: ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को साल की सबसे बड़ी एकादशी कहा गया है। यह निर्जला एकादशी होती है। सबसे बड़ी एकादशी इसलिए क्योंकि इस दिन जल तक ग्रहण नहीं किया जाता है। पूरी तरह निर्जला रहकर भगवान विष्णु की पूजा और कीर्तन किया जा सकता है। निर्जला एकादशी आज है।
निर्जला एकादशी को भीम एकादशी या पांडव एकादशी भी कहा जाता है। इस दिन रवियोग भी है और दो बड़े ग्रह मंगल और बुध का राशि परिवर्तन भी एक साथ हो रहा है। शुक्रवार होने के कारण देवी लक्ष्मी को प्रसन्न करने का दिन भी यही है।

निर्जला एकादशी क्यों की जाती है (Nirjala Ekadashi 2025)
पौराणिक कथाओं के अनुसार महाभारत काल में सभी पांडव एकादशी का व्रत करते थे लेकिन भीम को भूख सहन नहीं होती थी इसलिए वे एकादशी का व्रत नहीं रखते थे। इस बात को लेकर उनके मन में ग्लानि भी रहती थी। एक बार वे व्यास मुनि के पास गए और बोले- मेरे सारे भाई एकादशी का व्रत रखते हैं लेकिन मैं भूख सहन नहीं कर पाने के कारण एकादशी नहीं कर पाता हूं। क्या करूं।
निर्जला एकादशी का व्रत अवश्य करें
व्यास मुनि ने भीम को कहा, कोई बात नहीं, आप सभी एकादशी का व्रत नहीं कर पाते तो कोई बात नहीं लेकिन केवल एक एकादशी निर्जला एकादशी का व्रत अवश्य करें। इससे तुम्हें सारी एकादशी का फल मिल जाएगा। मुनि के कहे अनुसार भीम ने एकादशी का व्रत किया। पहली बार भीम के इस एकादशी का व्रत करने के कारण इसका नाम भीम एकादशी या पांडव एकादशी पड़ गया।
व्रत विधि: इस दिन प्रातः स्नान करके संकल्प लेकर भगवान विष्णु की पूजा करें। व्रतधारी दिन भर निराहार और निर्जल रहकर प्रभु का ध्यान करते रहें। रात्रि में जागरण और कीर्तन करें। द्वादशी को व्रत का पारण जलपान करके करें।
निर्जला एकादशी का लाभ (Nirjala Ekadashi 2025)
- यह व्रत समस्त पापों का नाश करता है और मोक्ष प्रदान करता है।
- व्यक्ति को साल भर की एकादशियों का पुण्य एक साथ मिल जाता है।
- यह व्रत तप, दान, यज्ञ, तीर्थ और जप के समान फलदायी है।
- इसे करने वाला व्यक्ति विष्णु लोक को प्राप्त करता है।
- इस बार एकादशी के दिन शुक्रवार भी है तो मां लक्ष्मी का पूजन भी करें। इससे समृद्धि की प्राप्ति होगी।
एकादशी का समय (Nirjala Ekadashi 2025)
- एकादशी प्रारंभ : 6 जून रात्रि 2:15
- एकादशी पूर्ण : 7 जून प्रात: 4:47
- पारण : 7 जून दोपहर 1:47 से सायं 4:28












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