Nirjala Ekadashi 2023: निर्जला एकादशी आज, जानिए महत्व और कथा
Nirjala Ekadashi 2023: इस एकादशी के दिन भी अन्य एकादशियों की तरह ही भगवान विष्णु का पूजन किया जाता है।

Nirjala Ekadashi 2023: वर्ष की सभी एकादशियों में ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष में आने वाली निर्जला एकादशी को सबसे बड़ी और कठिन एकादशी माना गया है क्योंकि इस एकादशी के दिन जल तक ग्रहण नहीं किया जाता है। इस बार निर्जला एकादशी 31 मई 2023 बुधवार को आ रही है। जो लोग वर्ष की समस्त एकादशियों का व्रत प्रारंभ करना चाहते हैं वे इस एकादशी से व्रत का संकल्प लेकर व्रत प्रारंभ करते हैं। निर्जला एकादशी करने से मनुष्य के जन्मजन्मांतर के पापों का नाश होता है और मनुष्य पृथ्वी पर रहते हुए समस्त सुखों का भोग करता है और मृत्यु पश्चात भगवान विष्णु के बैकुंठ लोक को प्राप्त होता है।
निर्जला एकादशी व्रत कथा
महाबलशाली भीम ने आचार्य वेदव्यास से कहा कि हे पितामह! माता कुंती, भ्राता युधिष्ठिर, द्रौपदी, अर्जुन, नकुल-सहदेव सभी मुझे एकादशी व्रत करने को कहते हैं किंतु मैं नहीं कर सकता क्योंकि मैं पूजा आदि तो कर सकता हूं किंतु व्रत नहीं रख सकता, भूखा रहने की मेरी क्षमता नहीं है।इस पर व्यासजी ने कहा भीमसेन यदि तुम नर्क को बुरा मानते हो तो प्रतिमास आने वाली दोनों एकादशियों को अन्न मत खाया करो। भीम ने कहा पितामह मैं भूखा नहीं रह सकता।
ज्येष्ठ मास की एकदशी कहलाती है निर्जला
मेरे उदर में वृक नाम की जो अग्नि है उसको भोजन से ही शांत किया जा सकता है। कोई अन्य उपाय बताइए। तब व्यासजी ने कहा कि ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की जो एकादशी आती है उसे निर्जला एकादशी कहते हैं। तुम उस एकादशी का व्रत करो। किंतु इस व्रत में आचमन के सिवा अन्य जल तक ग्रहण नहीं किया जाता है। आचमन में भी छह मासे से अधिक जल नहीं होना चाहिए। यदि एकादशी के सूर्योदय से द्वादशी के सूर्योदय तक जल ग्रहण न करे तो समस्त एकादशियों का पुण्य फल प्राप्त हो जाता है। नर्क जाने के भय के कारण भीमसेन निर्जला एकादशी का व्रत करने को तैयार हो गए।
एकादशी और पारण समय
- एकादशी तिथि प्रारंभ 30 मई दोपहर 1:07 PM से हो गया था
- एकादशी तिथि समाप्त : 31 मई दोपहर 1:45 PM
- व्रत का पारणा : 1 जून प्रात: 5:42 से 8:23












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