Navratri 2021: 'सरस्वती वंदना' से करें कला की देवी को प्रसन्न, पद-प्रतिष्ठा की होगी प्राप्ति
नई दिल्ली, 11 अक्टूबर। नवरात्रि के दिनों में मां के तीन रूपों दुर्गा, काली और सरस्वती की खास पूजा की जाती है। मां सरस्वती की पूजा ष्ठठी और सप्तमी को होती है। वैसे आपको बता दें कि सरस्वती आह्वान आज है तो वहीं पूजा कल होगी, जबकि सरस्वती विसर्जन 14 अक्टूबर को है। मां सरस्वती कला, वाणी और विद्या की देवी हैं। इनके आशीष के बिना इंसान के पास बुद्दि, ज्ञान और कला का अभाव रहता है और इनकी कृपा जिस पर हो जाए उसके पास ना तो कभी ज्ञान की कमी होती है और ना ही शक्ति का अभाव होता है। उसे पद-प्रतिष्ठा की प्राप्ति होती है और उसकी लोकप्रियता चारों दिशाओं में फैलती है।

- सरस्वती आह्वान 2021: 11 अक्टूबर
- सरस्वती पूजा 2021: 12 अक्टूबर
- सरस्वती बलिदान : 13 अक्टूबर
- सरस्वती विसर्जन: 14 अक्टूबर
सरस्वती पूजा तब तक अधूरी है, जब तक कि सरस्वती वंदना ना हो...
वर दे, वीणावादिनि वर दे !
प्रिय स्वतंत्र-रव अमृत-मंत्र नव
भारत में भर दे !
काट अंध-उर के बंधन-स्तर
बहा जननि, ज्योतिर्मय निर्झर;
कलुष-भेद-तम हर प्रकाश भर
जगमग जग कर दे !
नव गति, नव लय, ताल-छंद नव
नवल कंठ, नव जलद-मन्द्ररव;
नव नभ के नव विहग-वृंद को
नव पर, नव स्वर दे !
वर दे, वीणावादिनि वर दे।
सरस्वती मंत्र
या कुन्देन्दुतुषारहारधवलाया शुभ्रवस्त्रावृता
या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना।
या ब्रह्माच्युतशंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता
सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा ॥












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