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पारद श्रीयंत्र : ऐश्वर्य, वैभव, समृद्धि देने वाला साक्षात लक्ष्मी का स्वरूप

नई दिल्ली। जीवन के चार पुरुषार्थो धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष में अर्थ अर्थात् पैसा, धन को दूसरे स्थान पर रखा गया है, अर्थात् मनुष्य अपने धर्म का निर्वाह करते हुए अर्थ अर्जित करे। आज के इस भौतिकतावादी समय में पैसा धर्म से भी बढ़कर और सबसे महत्वपूर्ण बन गया है। पैसा है तो जीवन की सारी भौतिक सुख-सुविधाएं जुटाई जा सकती है, पैसा नहीं है तो जीवन मुश्किलों से भर जाता है। इसीलिए मनुष्य दिनरात पैसा कमाने में जुटा रहता है, लेकिन कई लोग दिनरात मेहनत करने के बाद भी अपने जीवन में सारे सुख जुटाने में कामयाब नहीं हो पाते हैं। यदि आपको भी लगता है किआप पैसा कमाने के तमाम उपाय करने के बाद भी असफल हो जाते हैं तो इस पूरे लेख को ध्यान से पढ़िए और अपना जीवन बदलिए।

पारद श्रीयंत्र : समृद्धि देने वाला साक्षात लक्ष्मी का स्वरूप

हिंदू तंत्र शास्त्रों में लक्ष्मी को प्रसन्न करने के अनेक उपाय और साधन बताए गए हैं। उनमें से सबसे सटीक, चमत्कारिक और तुरंत लाभ पहुंचाने वाला साधन है पारद। पारद को साक्षात भगवान शिव का बीज माना गया है। इसलिए पारद को संस्कारित करके बनाया गया श्रीयंत्र अपने आप में प्रतिष्ठित और लक्ष्मी प्रदायक होता है। तंत्र ग्रंथों में श्रीयंत्र को मां लक्ष्मी का देह स्वरूप माना गया है और यह शिव बीज से बना होना अत्यंत ही लाभदायक होता है। अपने घर, प्रतिष्ठान, दुकान आदि में पारद का श्रीयंत्र रखने से वहां लक्ष्मी का स्थायी निवास हो जाता है। वहां कभी धन की कमी नहीं होती।

पारे को अष्ट संस्कारित करके पारद श्रीयंत्र का निर्माण किया जाता है। यह सर्वसिद्धिदायक, सौभाग्यदायक, धनदायक होता है। पारद श्रीयंत्र की रचना पांच त्रिकोण के नीचे के भाग ऊपर चार त्रिकोण के संयोजन से होती है, जिसमें 43 त्रिकोण होतेह ैं। इन त्रिकोणों को दो कमल घेरे हुए होते हैं। पहला कमल अष्टदल होता है और दूसरा बाहरी कमल षोडशदल होता है। इन दो कमलों के बाहर तीन वृत्त होते हैं। इसके बाहर तीन चौरस होते हैं। जिन्हें भूपुर कहा जाता है। इस यंत्र को सोने, चांदी आदि अनेक धातुओं से बनाया जा सकता है, लेकिन पारद से बना श्रीयंत्र सबसे उत्तम माना गया है।

पारद श्रीयंत्र के लाभ

  • पारद श्रीयंत्र में साक्षात लक्ष्मी निवास करती है। इस पर शिव का आशीर्वाद होने से पैसों से जुड़ी सारी बाधाएं दूर हो जाती हैं।
  • पारद श्रीयंत्र जिस जगह होता है, वहां चारों ओर का वातावरण शुद्ध और पवित्र हो जाता है, जिससे लक्ष्मी आगमन में बाधा नहीं आती है।
  • पारद श्रीयंत्र की स्थापना से अष्टलक्ष्मी की प्राप्ति होती है। बिजनेस में सफलता, सुखी जीवन, आर्थिक मजबूती और पारिवारिक सुख-समृद्धि आती है।
  • जिन लोगों को बिजनेस और जॉब में लंबे समय से ठहराव है, तरक्की नहीं हो रही है, उन्हें पारद श्रीयंत्र की स्थापना जरूर करना चाहिए
  • पारद श्रीयंत्र सौभाग्य देने वाला होता है। यह जहां होता है वहां किसी वस्तु का अभाव नहीं होता।
  • मेहनत के बाद भी यदि शुभ परिणाम नहीं मिल रहा है तो पारद श्रीयंत्र की स्थापना करके मेहनत का फल पाया जा सकता है।
  • पारद में स्वर्ण को खींचने की अद्भुत शक्ति होती है। पारा जहां होता है वहां सोना बरसने लगता है। वहां स्वर्ण लक्ष्मी निवास करने लगती है।
  • पारद श्रीयंत्र अपने आसपास की सारी नकारात्मक ऊर्जा को सोख लेता है। नकारात्मक ऊर्जा से तात्पर्य अलक्ष्मी से भी होता है। यह जहां होता है वहां की सारी नकारात्मक ऊर्जा को अपने में समाहित करके वातावरण को शुद्ध करता है।

कैसे करें स्थापना

  • वैसे तो पारा स्वयंसिद्ध होता है। इसे अष्टसंस्कार करके ही मूर्ति के आकार में ढाला जाता है, लेकिन फिर भी इसकी शुद्धता आवश्यक है।
  • पारद श्रीयंत्र को स्थापित करने का सबसे शुभ दिन दीपावली होता है। इसके अलावा इसे होली, नवरात्रि, शिवरात्रि, ग्रहण काल में भी स्थापित किया जा सकता है। ये दिन दूर हों तो किसी भी शुक्ल पक्ष के शुक्रवार के दिन स्थापित किया जा सकता है।
  • इसकी स्थापना गुरु पुष्य, शनि पुष्य या रवि पुष्य नक्षत्र में करना सर्वसिद्धिदायक होता है।
  • इसे अपने घर के पूजा स्थान, तिजोरी, व्यापारिक प्रतिष्ठान आदि में स्थापित करने से आर्थिक मजबूती आने लगती है।
  • यह स्वयंसिद्ध होता है इसलिए केवल गंगाजल से शुद्ध करके अपने अभीष्ट स्थान पर स्थापित किया जा सकता है।
  • इसे लाल रेशमी वस्त्र पर स्थापित करें। हर दिन जल से स्नान करवाकर, कुमकुम, अष्टगंध, लाल पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य करें।
  • पारद श्रीयंत्र पर प्रतिदिन केसर की बिंदी लगाएं और उसी में से थोड़ा सा केसर लेकर अपने मस्तक पर प्रतिदिन लगाया जाए तो इससे सभी कार्यो में सफलता मिलती है।
  • श्रीयंत्र के सम्मुख प्रतिदिन श्रीसूक्त का पाठ करें। ऊं श्रीं ह्रीं श्रीं नम: या ऊं श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ऊं महालक्ष्म्यै नम: मंत्रों का जाप करना चाहिए।
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