Must Read : पढ़ें: श्री रामचंद्रजी की आरती

नई दिल्ली, 12 अक्टूबर। 'विजयदशमी' का दिन बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। इस दिन भगवान राम ने दस मुख वाले रावण का वध किया था। इसी कारण इस दिन को लोग दशहरा कहते हैं। ये दिन पर्याय है सच्चाई का, वीरता का, धैर्य का और तप का। रावण दहन के बाद ही माता सीता अपने प्रभु श्री राम को वापस मिली थीं। ये दिन हमें शिक्षा देता है कि जो अधर्म और घमंड के रास्ते चलता है, उसका अंत निश्चित है। रावण बहुत शक्तिशाली और विद्धान था लेकिन वो बुराई के मार्ग पर था इसी कारण उसका अंत हुआ। इसलिए दशहरे के पर्व पर कौशल्यानंदन श्री राम की विशेष पूजा की जाती है। इस दिन श्रीराम की आरती और स्तुति करने पर इंसान को हर तरह का सुख प्राप्त होता है।

Must Read : श्री रामचंद्रजी की आरती

पढ़ें 'श्री राम' की आरती

  • श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन हरण भवभय दारुणं ।
  • नवकंज लोचन, कंजमुख, करकुंज, पदकंजारुणं ॥
  • श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन हरण भवभय दारुणं ।
  • श्री राम श्री राम....
  • कंदर्प अगणित अमित छबि, नवनीलनीरद सुन्दरं ।
  • पट पीत मानहु तडीत रुचि शुचि नौमि जनक सुतावरं ॥
  • श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन हरण भवभय दारुणं ।
  • श्री राम श्री राम....
  • भजु दीनबंधु दिनेश दानवदै त्यवंशनिकंदनं ।
  • रघुनंद आंनदकंद कोशलचंद दशरथनंदनं ॥
  • श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन हरण भवभय दारुणं ।
  • श्री राम श्री राम...
  • सिर मुकुट कूंडल तिलक चारु उदारु अंग विभुषणं ।
  • आजानु भुजा शरा चाप धरा, संग्राम जित खर दुषणं ॥
  • भुजा शरा चाप धरा, संग्राम जित खर दुषणं ॥
  • श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन हरण भवभय दारुणं
  • इति वदित तुलसीदास शंकरशेषमुनिमनरंजनं ।
  • मम ह्रदयकंजनिवास कुरु, कमदि खल दल गंजनं ॥
  • श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन हरण भवभय दारुणं ।
  • नवकंज लोचन, कंजमुख, करकुंज, पदकंजारुणं ॥
  • श्री राम श्री राम...

।।सोरठा।।

जानि गौरी अनुकूल सिय हिय हरषु न जाइ कहि।
मंजुल मंगल मूल वाम अंग फरकन लगे।।

Must Read : श्री रामचंद्रजी की आरती

आरती श्री रामायण जी की

  • आरती श्री रामायण जी की
  • कीरत कलित ललित सिय पिय की।
  • गावत ब्रह्मादिक मुनि नारद बाल्मीक विज्ञानी विशारद।
  • शुक सनकादि शेष अरु सारद वरनि पवन सुत कीरति निकी॥
  • आरती श्री रामायण जी की ..
  • संतन गावत शम्भु भवानी असु घट सम्भव मुनि विज्ञानी।
  • व्यास आदि कवि पुंज बखानी काकभूसुंडि गरुड़ के हिय की॥
  • आरती श्री रामायण जी की ....
  • चारों वेद पूरान अष्टदस छहों होण शास्त्र सब ग्रंथन को रस।
  • तन मन धन संतन को सर्वस सारा अंश सम्मत सब ही की॥
  • आरती श्री रामायण जी की ...
  • कलिमल हरनि विषय रस फीकी सुभग सिंगार मुक्ती जुवती की।
  • हरनि रोग भव भूरी अमी की तात मात सब विधि तुलसी की ॥
  • आरती श्री रामायण जी की ....

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+