India Helps Maldives: जिस मालदीव ने कहा था 'इंडिया आउट', मुसीबत आई तो भारत ने भेजी मदद, कौन सी बीमारी फैली?
India Helps Maldives: कभी 'इंडिया आउट' कैंपेन चलाने वाला मालदीव इन दिनों खसरे (Measles) के बढ़ते संक्रमण से जूझ रहा है। ऐसे मुश्किल समय में भारत एक बार फिर बड़े भाई की भूमिका निभाते हुए अपने पड़ोसी देश के साथ मजबूती से खड़ा नजर आया है। भारत ने अपनी "Neighbourhood First" यानी "पड़ोसी पहले" नीति के तहत मालदीव को मेडीकल हेल्प भेजी है ताकि बीमारी के फैलाव को जल्दी से रोका जा सके।
भारत की यह मदद ऐसे समय में आई है जब मालदीव में खसरे के मामलों में अचानक बढ़ोतरी देखी जा रही है और स्वास्थ्य एजेंसियां संक्रमण को नियंत्रित करने की कोशिशों में जुटी हुई हैं। विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने जानकारी दी कि भारत ने मालदीव को खसरा और रूबेला (MR) वैक्सीन की 20,000 खुराकें भेजी हैं। इसके अलावा भारत ने लगभग 3 टन वजन की मेडिकल सहायता भी रवाना की है। इस खेप में कई जरूरी दवाएं, सिरिंज, डायग्नोस्टिक किट और अन्य मेडिकल कंज्यूमबल्स शामिल हैं, जिनकी जरूरत किसी भी वायरस कंट्रोल ऑपरेशन में पड़ती है।

क्या पता चला मालदीव के बारे में?
12 जून 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत अपनी "पड़ोसी पहले" नीति और "First Responder" की भूमिका निभाते हुए मालदीव की मदद कर रहा है। उन्होंने लिखा कि मालदीव में हाल ही में फैले खसरे के प्रकोप को नियंत्रित करने और वहां की जनता के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए यह सहायता भेजी गई है। भारत द्वारा भेजी गई खेप में 20,000 एमआर वैक्सीन डोज के साथ लगभग 3 टन जरूरी चिकित्सा सामग्री शामिल है।
मालदीव के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह सहायता?
भारत का मानना है कि यह मेडिकल सहायता मालदीव को खसरे के बढ़ते मामलों को नियंत्रित करने में काफी मदद करेगी। वैक्सीनेशन अभियान को तेज करने से संक्रमण की श्रृंखला को तोड़ने में मदद मिलेगी और ज्यादा लोगों को बीमारी से बचाया जा सकेगा। हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो खसरे जैसी संक्रामक बीमारी के मामलों में शुरुआती चरण में बड़े पैमाने पर वैक्सीनेशन बेहद जरूरी होता है। ऐसे में भारत द्वारा भेजी गई वैक्सीन और मेडिकल सपोर्ट मालदीव के लिए काफी अहम साबित हो सकती है।
भारत-मालदीव संबंधों में स्वास्थ्य सहयोग की नई मिसाल
भारत और मालदीव के बीच लंबे समय से करीबी संबंध रहे हैं। भारत की "Neighbourhood First" नीति और "MAHASAGAR" विजन के तहत दोनों देशों के बीच स्वास्थ्य, सुरक्षा और विकास के क्षेत्रों में सहयोग लगातार बढ़ा है। जब भी मालदीव किसी प्राकृतिक आपदा, स्वास्थ्य संकट या अन्य चुनौती का सामना करता है, भारत अक्सर सबसे पहले मदद पहुंचाने वाले देशों में शामिल रहता है। यही वजह है कि मालदीव भारत को अपना भरोसेमंद साझेदार मानता है।
हैरानी की बात: 2021 में खसरा मुक्त घोषित हुआ था मालदीव
खास बात यह है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने साल 2021 में मालदीव को आधिकारिक रूप से खसरा मुक्त (Measles Free) देश घोषित किया था। उस समय माना गया था कि देश में खसरे के स्थानीय संक्रमण को पूरी तरह खत्म कर दिया गया है। लेकिन हाल के महीनों में संक्रमण के नए मामले सामने आने लगे, जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग को अलर्ट जारी करना पड़ा।
आखिर खसरा क्या है और यह कितना खतरनाक है?
खसरा एक वायरस से होने वाली बेहद संक्रामक बीमारी है जो मुख्य रूप से श्वसन तंत्र यानी सांस की नली और फेफड़ों को प्रभावित करती है। यह बीमारी खासतौर पर छोटे बच्चों के लिए ज्यादा खतरनाक मानी जाती है। संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने या बोलने के दौरान निकलने वाली छोटी-छोटी बूंदों के जरिए यह वायरस आसानी से दूसरे लोगों तक पहुंच जाता है। इसके शुरुआती लक्षणों में तेज बुखार, लगातार नाक बहना, आंखों का लाल होना और मुंह के अंदर सफेद धब्बे दिखाई देना शामिल है। इलाज न मिलने पर यह मरीज की जान भी ले सकता है।
भारत ने एक बार फिर दिखाया है कि हिंद महासागर क्षेत्र में जब भी कोई स्वास्थ्य या मानवीय संकट आता है, वह सबसे पहले मदद पहुंचाने वाले देशों में शामिल रहता है। उम्मीद की जा रही है कि भारत द्वारा भेजी गई वैक्सीन और चिकित्सा सामग्री से मालदीव में खसरे के मौजूदा प्रकोप को जल्दी नियंत्रित किया जा सकेगा और हजारों लोगों को संक्रमण से बचाया जा सकेगा।
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