Margashirsha Amavasya 2025: अमावस्या कब है? क्या है पूजा विधि और महत्व?
Margashirsha Amavasya 2025 Kab Hai: हिंदू धर्म में हर अमावस्या का बहुत मान है, मार्गशीर्ष मास की अमावस्या भी उसमें से एक है। इस महीने की अमावस्या विशेष रूप से देवी-देवताओं की कृपा प्राप्त करने, पितरों को तर्पण देने और धन-समृद्धि की कामना के लिए शुभ होती है। ये आध्यात्मिक साधना, दान-पुण्य और मनोकामना पूर्ति का उत्तम अवसर लेकर आती है।
वैदिक पंचांग के अनुसार, मार्गशीर्ष अमावस्या तिथि का प्रारंभ आज 9:43 AM से होगा और इसका अंत 20 नवंबर को 12:16 PM पर होगा, उदयातिथि मान्य होने की वजह से अमावस्या 20 नवंबर को है।

इस दिन विजय मुहूर्त 01:55 PM से प्रारंभ होगा और 02: 39 PM पर समाप्त होगा, इस दौरान किए गए पूजा-पाठ फलित होते हैं।
Margashirsha Amavasya 2025 की पूजा-विधि
ब्रह्म मुहूर्त में उठकर पवित्र नदी या घर पर गंगाजल मिले पानी से स्नान करें फिर "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का जाप करें। इसके बाद घर के मंदिर को साफ करें और मां लक्ष्मी और कुबेर की पूजा करें। दिनभर व्रत रखें।शाम के समय नदी में, पीपल के नीचे या मंदिर में दीपक जलाएं इससे पितरों की शांति और घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। गरीबों को दान करें और ब्राह्मणों को भोजन कराएं। काले तिल, कपड़ा, भोजन, और धान आदि का दान करने से शुभ फल बढ़ता है।

Margashirsha Amavasya 2025 का महत्व
पितरों को तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान करने से पितृदोष में कमी आती है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है तो वहीं लक्ष्मी और कुबेर की आराधना करने से आर्थिक स्थिति में सुधार और धन-संचय की संभावनाएं बढ़ती हैं। मार्गशीर्ष मास श्रीकृष्ण का प्रिय महीना माना गया है।

शनि-राहु के दोषों को कम करने का उत्तम समय
इस दिन व्रत, ध्यान और मंत्र-जप का हजार गुना फल प्राप्त होता है। अमावस्या तिथि ग्रहों से जुड़ी नकारात्मक शक्तियों को शांत करने और शनि-राहु के दोषों को कम करने का उत्तम समय है।
DISCLAIMER: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। वनइंडिया लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है इसलिए किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले कृपया किसी जानकार ज्योतिष या पंडित की राय जरूर लें।












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