Amavasya : नाग योग में आई अमावस्या, श्रावण अधिकमास का समापन भी
Amavasya : आज संवत 2080 की श्रावण अधिकमास की अमावस्या है। इस बार यह अमावस्या नाग योग में आई है जो पितरों की शांति, कालसर्प दोष से मुक्ति, नाग दोष, ग्रहण दोष जैसे कुंडली के अनेक दोषों का निवारण करने के लिए विशेष है। इसी दिन श्रावण अधिकमास का समापन भी हो रहा है, इसलिए इस दिन विशेष उपाय करने से अनेक दोषों का निवारण होने के साथ सुख-समृद्धि में वृद्धि भी होने वाली है।

श्रावण अधिकमास 18 जुलाई से प्रारंभ हुआ था और इसका समापन 16 अगस्त को हो रहा है। इस दिन अमावस्या तिथि दोपहर 3 बजकर 6 मिनट तक रहेगी और इसी के साथ नाग योग भी रहेगा जो 3 बजकर 6 मिनट तक ही रहेगा। नाग योग में आने वाली अमावस्या पितरों के शांतिकर्म के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है क्योंकि पितरों को भी नाग स्वरूप ही माना गया है। इसलिए इस अमावस्या के दिन पितरों की शांति के लिए कुछ विशेष कर्म किए जाने चाहिए।
पितृ दोष की शांति
इस अमावस्या के दिन किसी पवित्र नदी में स्नान करके उसी के तट पर किसी विद्वान ब्राह्मण-आचार्य-पुरोहित से पितरों के निमित्त तर्पण, श्राद्ध, पिंडदान आदि कर्म करवाएं। ब्राह्मणों को भोजन करवाएं, उन्हें दान-दक्षिणा, वस्त्रादि भेंट कर संतुष्ट करें। इससे पितरों की शांति होगी। इस कर्म को करने से पितृ दोष की शांति होगी और शुभ कार्यों को करने में आ रही बाधाएं दूर होंगी।
कालसर्प दोष, नाग दोष की शांति
अधिकमास की यह अमावस्या नाग योग में आ रही है। यदि आपकी जन्मकुंडली में कालसर्प दोष या नाग दोष है तो इसकी शांति किसी विद्वान पुरोहित से करवाएं। इसके लिए रुद्राष्टाध्यायी से शिवजी का अभिषेक किया जाता है। या महामृत्युंजय मंत्र से संपुटित करे अभिषेक हवन कर्म किया जाता है।
नारायण बलि, नाग बलि पूजा
पितृ दोष की शांति के लिए अमावस्या के दिन नारायण बली या नागबलि की पूजा भी की जाती है। इससे दोष शांत होते हैं और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
अधिकमास का समापन
श्रावण अमावस्या के दिन अधिकमास का समापन भी हो रहा है। अधिकमास के समापन पर 11 या 1 ब्राह्मण दंपती को भोजन करवाएं और उन्हें उचित दान-दक्षिणा देकर उनका आशीर्वाद प्राप्त करें।












Click it and Unblock the Notifications