कहीं दही- चूड़ा तो कहीं खिचड़ी, कन्याओं के लिए खास, दुनिया के 7 देशों में मकर संक्रांति के कितने नाम
मकसंक्रांति पर्व भारत के अलावा दुनिया के 6 अन्य देशों में भी मनाया जाने वाला पर्व है। ये त्यौहार एक खगोलीय घटना से भी जुड़ा है। इसके कई नाम हैं।

Makar Sankranti 2023 : मकसंक्रांति पर्व भारत के अलावा दुनिया के 6 अन्य देशों में भी मनाया जाने वाला पर्व है। ये त्यौहार एक खगोलीय घटना से भी जुड़ा है। जिसकी भारत में सबसे अधिक मान्यता है। उत्तर से लेकर दक्षिण तक और पूर्व से पश्चिम तक लगभग सभी राज्यों में इसे मानाया जाता है। लेकिन अलग- अलग राज्यों में इसके नाम भी अलग हैं। आइए जानते हैं कि भारत के विभिन्न राज्यों में मकर संक्रांति की क्या मान्यताएं हैं और इस किन- किन नामों से मनाया जाता है।

भारत में दान-पुण्य का पर्व
भारत में मकर संक्रांति के पर्व के दिन दान-पुण्य का विशेष महत्व है। यही नहीं ये दिन युवतियों और सुहागन महिलाओं के लिए भी खास है। इस दिन वे 14 वस्तुएं दान करती हैं। जिनमें आमतौर पर श्रृंगार या दैनिक उपयोग से जुड़ी चीजें होती हैं। दान की वस्तुओं में तांबे, पीतल, चांदी, मैटल, स्टील, मिट्टी के दीपक दिए जाते हैं। जबकि वस्त्र में रुमाल, स्कार्फ, शॉल, स्टोल, दुपट्टे, कुर्ते, मोजे, लैगिंग्स का विकल्प होता है। मान्यता है कि ऐसा करने से महिलाओं के पति की रक्षा और युवतियों को योग्य वर मिलता है। राजस्थान में इसे हल्दी कुंक के नाम से जाना जाता है।

भारत में मकर संक्रांति के नाम
मकर संक्रांति को भारत में कई नामों से मानाया जाता है। उत्तर प्रदेश और बिहार में इसे खिचड़ी कहा जाता है। पश्चिम बंगाल में इसे पौष संक्रान्ति कहते हैं। हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और पंजाब में माघी के नाम से इस त्यौहार को मनाया जाता है। कर्नाटक में मकर संक्रमण, असम में भोगाली बिहु, गुजरात और उत्तराखण्ड में उत्तरायण, जम्मू में माघी संगरांद, कश्मीर घाटी में शिशुर सेंक्रात और तमिलनाडु में ताइ पोंगल, उझवर तिरुनल नाम से मनाया जाता है।

6अन्य देशों में भी मान्यता
मकर संक्रांति की विदेशों में भी मान्यता है। भारत से बाहर इस पर्व की 6 अन्य देशों में भी मान्यता है। मकर संक्रांति बांग्लादेश में पौष संक्रान्ति/ Shakrain, नेपाल में माघे संक्रान्ति या 'माघी संक्रान्ति' और 'खिचड़ी संक्रान्ति', थाईलैण्ड में सोंगकरन, लाओस में पिमालाओ, म्यांमार में थिंयान, कम्बोडिया में मोहा संगक्रान और श्री लंका में पोंगल और उझवर तिरुनल के नाम से मनाई जाती है। भारत की तरह नेपाल में भई माघी संक्रांति मनाई जाती है। नेपाल में इस दिन किसान अपनी अच्छी फसल के लिए पूजा पाठ कर उत्सव मनाते हैं। भारत की तरह यहां भी मकर संक्रांति पर सार्वजनिक अवकाश होता है। यहां थारू समुदाय का यह सबसे प्रमुख त्यैाहार है। लोग तीर्थस्थल में स्नान करके दान और पूजा पाठ करते हैं। रूरूधाम (देवघाट) और त्रिवेणी मेला सबसे अधिक प्रसिद्ध है।

मकर संक्रांति पर्व की मान्यता
ज्योतिष विज्ञान का आधार ग्रहों की चाल है। मकर संक्रांति एक खगोलीय घटना है। जब सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करता है तो इस घटना को मकर संक्रांति कहा जाता है। ये घटना हर वर्ष 14 जनवरी को होती है। मकर संक्रांति के दिन के बाद सूर्य उत्तरायण यानी उत्तर दिशा की ओर बढ़ने लगता है। मकर संक्रांति की धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन सूर्य देव अपने पुत्र शनि देव से मिलने जाते हैं। ये वो दिन होता है जब शनि, मकर राशि का प्रतिनिधित्व करते हैं। कहा जाता है कि पिता सूर्य अपने पुत्र शनि के बीच के मतभेद को दूर करने के लिए स्वयं वे अपने पुत्र की राशि मकर में प्रवेश कर जाते हैं। वहीं मकर संक्रांति के नाम को लेकर एक किवदंती के अनुसार मान्यता है कि एक देवता थे, जिन्होंने इसी दिन संकरासुर नामक दुष्ट असुर का अंत किया था। जिसके बाद से इस दिन मकर संक्रांति के नाम से जाना जाता है।

संक्रांति एक खगोलीय घटना
जिस राशि में सूर्य की कक्षा का परिवर्तन होता है, उसे संक्रमण काल कहा जाता है.हमारी पृथ्वी का अधिकांश भाग भूमध्य रेखा के उत्तर में यानी उत्तरी गोलार्द्ध में ही आता है। खगोल विज्ञान के अनुसार संक्रांति एक प्राकृतिक घटना है, जो साल में दो बार होती है। ऐसा इस लिए होता है क्योंकि पृथ्वी का झुकाव हर साल 6 मार तक दक्षिण की ओर और अगले 6 महीने के लिए उत्तर की ओर होता है। इस घटना के पृथ्वी के वातावरण में काफी बदलाव आता है। शीत ऋतु से राहत मिलती है।
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