Makar Sankranti 2021: 14 जनवरी से प्रारंभ होगा हरिद्वार कुंभ मेला, जानिए स्नान की तिथियां
Makar Sankranti 2021: श्री शुभ संवत 2078 चैत्र शुक्ल द्वितीया बुधवार दिनांक 14 अप्रैल 2021 को कुंभराशिगत बृहस्पति एवं मेष राशि में सूर्यदेव के प्रवेश करने के साथ ही हरिद्वार में पुण्यसलिला मां गंगाजी के पावन तट हर की पौड़ी पर कुंभ महापर्व में पूज्य साधु-संतों की उपस्थिति में शाही स्नान होगा।

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इस कुंभ महापर्व में साधु-संतों के सान्निध्य में अनेकानेक आस्थावान सज्जन कल्पवास करते हुए गंगा स्नान, व्रत, जाप तथा दानादि करते हुए प्राचीन देव स्थानों के दर्शनलाभ कर शुभ व पवित्र सद्कर्मो के द्वारा अपनी स्वयं एवं राष्ट्र की सुख- शांति, समृद्धि, आयु और आरोग्यता की कामना करते हैं।
इस बार 11वें वर्ष में हो रहा है कुंभ
हरिद्वार में गंगा किनारे, प्रयागराज में त्रिवेणी संगम, नासिक में गोदावरी और उज्जैन में क्षिप्रा के तट पर प्रत्येक 12-12 वर्षो के अंतराल से महाकुंभ का आयोजन होता है। प्रयागराज और हरिद्वार में छह वर्ष बाद अर्द्धकुंभ भी होता है। हरिद्वार में इससे पहले वर्ष 2010 में महाकुंभ आया था और 2016 में अर्द्धकुंभ आया था। इस बार 11वें वर्ष में ही हरिद्वार में कुंभ आ गया है। इसका कारण ज्योतिषीय गणनाएं हैं। पंचांग गणना के अनुसार वर्ष 2022 में कुंभ राशि का बृहस्पति नहीं रहेगा। कुंभ राशि का बृहस्पति और मेष राशि के सूर्य का संयोग 2021 में मिल रहा है इसलिए हरिद्वार में कुंभ 11वें वर्ष में किया जा रहा है।
हरिद्वार कुंभ में पर्व स्नान की तिथियां
- संवत 2077 मकर संक्रांति, गुरुवार, 14 जनवरी 2021
- संवत 2077 माघ कृष्ण मौनी अमावस्या, गुरुवार, 11 फरवरी 2021
- संवत 2077 माघ शुक्ल वसंत पंचमी, मंगलवार, 16 फरवरी 2021
- संवत 2077 माघी पूर्णिमा, शनिवार, 27 फरवरी 2021
- संवत 2077 फाल्गुन कृष्ण 13-14, महाशिवरात्रि, गुरुवार, 11 मार्च 2021 शाही स्नान
- संवत 2077 चैत्र कृष्ण सोमवती अमावस्या, सोमवार, 12 अप्रैल 2021 शाही स्नान
- संवत 2078 चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, गुड़ी पड़वा, मंगलवार, 13 अप्रैल 2021 शाही स्नान
- संवत 2078 चैत्र शुक्ल द्वितीया, मेष संक्रांति, प्रमुख कुंभ स्नान, बुधवार, 14 अप्रैल 2021, शाही स्नान
- संवत 2078 चैत्र शुक्ल नवमी, रामनवमी, बुधवार, 21 अप्रैल 2021
- संवत 2078 चैत्र पूर्णिमा, मंगलवार, 27 अप्रैल 2021
कुंभ महापर्व में जो मनुष्य सात्विकता, पवित्रता, संयमता, सदाचारिता व धर्मपरायणपूर्वक अपने सामथ्र्यानुसार तन-मन-धन से सेवा करते हुए गंगाद्वार में सश्रद्धा स्नान, व्रत, जप, तप, पूजा, निस्वार्थ सेवा, दान आदि करते हैं वे कुंभ महापर्व का वास्तविक पुण्य अर्जित करते हैं। ऐसे मनुष्य जन्म-मरण के बंधनों से मुक्त होकर परमधाम को प्राप्त करते हैं।












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