Mahashivratri 2024 : आज करें पार्थिव शिवलिंग का पूजन, करोड़ों शिव पूजा का मिलेगा फल

Parthiv Sivling: शिवलिंग तो कई प्रकार के होते हैं जिनमें पत्थर, रत्न, लकड़ी, सोना-चांदी अनेकों प्रकार के होते हैं लेकिन उन सभी में सर्वश्रेष्ठ पार्थिव शिवलिंग को बताया गया है। आप जानकर चौंक जाएंगे कि पार्थिव शिवलिंग का पूजन करने से करोड़ों बार की गई शिवपूजा का फल मिल जाता है।

Mahashivratri 2024

महाशिवरात्रि पर तो इसके अद्भुत और चमत्कारिक फल प्राप्त होते हैं। यदि आप भी अनेक देवी-देवताओं की पूजा, मंत्र जप और राशि रत्न पहनकर थक चुके हैं, निराश हो चुके हैं तो इस महाशिवरात्रि पर पार्थिव शिवलिंग का पूजन अवश्य करें आपकी सारी मनोकामनाएं शीघ्र पूरी होगी।

पार्थिव शिवलिंग का महत्व

  • शिव महापुराण में पार्थिव शिवलिंग के बारे में सूतजी बताते हैं- पार्थिक शिवलिंग सभी शिवलिंगों में श्रेष्ठ है। सतयुग में मणिलिंग, त्रेतायुग में स्वर्णलिंग, द्वापर में पारदलिंग और कलयुग में पार्थिवलिंग को श्रेष्ठ कहा गया है।
  • भगवान शिव की सभी आठ मूर्तियों पृथ्वी, जल, तेज, वायु, आकाश, सूर्य, चंद्रमा तथा यजमान में भी पार्थिव मूर्ति श्रेष्ठ होती है। नवनिर्मित पार्थिव शिवलिंग का पूजन करने से तपस्या से भी अधिक फल मिलता है।
  • सूतजी कहते हैं- पार्थिव पूजन अत्यंत पुण्यदायी तथा सब प्रकार से धन्य करने वाला, दीर्घायु देने वाला तथा तुष्टि, पुष्टि और लक्ष्मी प्रदान करने वाला है।
  • उपलब्ध सामग्रियों से पूजन करना चाहिए यह सभी मनोकामनाओं की सिद्धि देने वाला है। जो मनुष्य सुंदर वेदी सहित पार्थिव लिंग बनाकर पूजा करता है वह इस लोक में धन धान्य से संपन्न होकर अंत में रुद्रलोक को प्राप्त करता है।
  • जो पार्थिव शिवलिंग का निर्माण करके जीवनपर्यंत नित्य उसका पूजन करता है वह शिवलोक को प्राप्त करता है। वह असंख्य वर्षोँ तक शिवजी के सान्निध्य में शिवलोक में वास करता है और कोई कामना शेष रह जाने पर वह भारतवर्ष में सम्राट बनता है

अखंड बनाना चाहिए पार्थिव शिवलिंग

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    Mahashivratri 2024 : आज करें पार्थिव शिवलिंग का पूजन, करोड़ों शिव पूजा का मिलेगा फल
    • नदी या तालाब के किनारे, पर्वत पर, वन में, शिवालय में अथवा किसी पवित्र स्थान में पार्थिव शिव पूजन करने का विधान है।
    • पुराण में पार्थिव शिवलिंग को बनाने के नियम भी बताए गए हैं। पार्थिवलिंग का निर्माण सदा अखंड रूप में करना चाहिए। अर्थात मिट्टी का एक ही बड़ा सा पिंड लेकर शिवलिंग बनाना चाहिए। अलग-अलग पिंडों से नहीं।
    • शुद्ध स्थान से निकाली गई मिट्टी को यत्पपूर्वक लाकर बड़ी सावधानी से अखंड शिवलिंग का निर्माण करें।
    • ब्राह्मण के लिए श्वेत, क्षत्रिय के लिए लाल, वैश्य के लिए पीली और शूद्र के लिए काली मिट्टी से शिवलिंग बनाने का विधान है। अथवा जहां जो मिट्टी मिल जाए उसे से शिवलिंग बनाएं।
    • इसके बाद शास्त्रोक्त विधि से शिव पूजन संपन्न करें।

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