'ट्रंप ना मेरी सुनते हैं, ना मैं उनकी', ईरान के वॉकआउट के बाद Israeli PM नेतन्याहू ने क्यों बोली ये बात?
Israeli-USA Relations: अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौतों पर चल रही मीटिंग 80 मिनट में ही खत्म हो गई। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्उ ट्रंप से बयान से नाराज होकर ईरान ने मीटिंग से वॉकआउट कर दिया। वहीं दूसरी ओर मिडिल ईस्ट के अशांत माहौल के बीच इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने डोनाल्ड ट्रंप के साथ अपने संबंधों को लेकर बड़ा बयान दिया है।
नेतन्याहू ने यरुशलम में आयोजित जेएनएस समिट को संबोधित करते हुए अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रप साथ अपने संबंधों को लेकर चल रही अटकलों पर प्रतिक्रिया दी। इस दौरान उन्होंने स्वीकार किया कि दो करीबी साझेदार होने के बावजूद उनके बीच हमेशा हर मुद्दे पर पूरी सहमति नहीं होती। उन्होंने कहा कि वे दोनों स्वतंत्र और स्वाभिमानी देशों का नेतृत्व करते हैं, जहां नीतियां राष्ट्रीय हितों के आधार पर तय होती हैं।

नेतन्याहू बोले- 'ट्रंप ना मेरी सुनते हैं, ना मैं उनकी'
नेतन्याहू ने समिट को संबोधित करते हुए बोले, "अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप वो सब नहीं करते हैं जो मैं चाहता हूं और न ही मैं वो सब कुछ करता हूं जो ट्रंप चाहते हैं। हम एक स्वतंत्र और गौरान्वित देशों के नेता हैं, इसलिए हमारी राय एक दूसरे से अलग होती है।" नेतन्याहू ने ये कहकर स्पष्ठ कर दिया कि राष्ट्रपति ट्रंप से जो उम्मीद इजरायल करता है, उसे वो नहीं मानता और न ही इजरायल हमेशा अमेरिकी प्राथमिकताओं के आगे झुकता है।
नेतन्याहू ने ट्रंप के लिए क्यों बोली ये बात?
इजराइली पीएम का यह बयान ऐसे समय में आया है जब इजरायल सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर रहा है। हमास और हिज्बुल्ला के खिलाफ इजरायल की आक्रामक सैन्य कार्रवाई लगातार जारी है। इन परिस्थितियों में अमेरिका हमेशा से इजरायल का सबसे बड़ा मददगार रहा है, लेकिन ट्रंप प्रशासन जब से सत्ता में आया है वो इजराइल की मांग को स्वीकार नहीं करता।
इस बयान के जरिए ट्रंप प्रशासन को भी इजरायल अपनी सैन्य स्वायत्तता को बनाए रखने का संदेश देना चाहता है, ताकि क्षेत्रीय राजनीति में उसकी पकड़ कमजोर न दिखे। इसके साथ ही वो ये संदेश देना चाहते हैं कि इजराइल स्वतंत्र देश है वो ट्रंप प्रशासन के दबाव में काम नहीं करता।
नेतन्याहू ने हिज्बुल्लाह और ईरान पर फैसलों का किया बचाव
नेतन्याहू ने कहा कि उनके राजनीतिक विरोधियों ने उन्हें रफाह में प्रवेश न करने, हिज्बुल्लाह पर हमला न करने और ईरान का सामना न करने की सलाह दी थी। लेकिन उन्होंने इन सभी कदमों को उठाया। उनके मुताबिक इन कार्रवाइयों ने इजरायल के सामने मौजूद बड़े सुरक्षा खतरों को समाप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
'ईरान को परमाणु बम हासिल करने से रोका'
इजरायली प्रधानमंत्री ने दावा किया कि यदि इजरायल ने समय रहते कार्रवाई नहीं की होती तो ईरान आज परमाणु हथियार हासिल कर चुका होता। उन्होंने कहा कि इजरायल ने एक ऐसे खतरे को टाल दिया जो उसके अस्तित्व के लिए चुनौती बन सकता था। नेतन्याहू ने कहा कि उनके नेतृत्व में ईरान को परमाणु शक्ति बनने से रोका गया है।
'ईरान के भीतर जाकर बदली सुरक्षा नीति'
नेतन्याहू ने कहा कि वर्षों तक लोगों का मानना था कि इजरायल ईरान की धरती पर हमला नहीं कर सकता, लेकिन उनकी सरकार ने इस सोच को बदल दिया। उन्होंने दावा किया कि इजरायली वायुसेना ने ईरान के सैन्य, मिसाइल और परमाणु ठिकानों को निशाना बनाया। उनके अनुसार अब इजरायल की सुरक्षा नीति पहले से अधिक आक्रामक है और वह अपने दुश्मनों के हमले का इंतजार करने के बजाय पहले कार्रवाई करेगा।
'मेरे रहते ईरान कभी परमाणु हथियार नहीं बनाएगा'
नेतन्याहू ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि चाहे कोई समझौता हो या न हो, जब तक वह प्रधानमंत्री हैं, ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिया जाएगा। उन्होंने इसे अपनी सरकार की सर्वोच्च सुरक्षा प्राथमिकताओं में से एक बताया।
दक्षिण लेबनान में सुरक्षा क्षेत्र बनाए रखने के संकेत
दक्षिण लेबनान में इजरायली सैन्य मौजूदगी को लेकर नेतन्याहू ने कहा कि जब तक इजरायली नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो जाती, तब तक सुरक्षा क्षेत्र बनाए रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि कोई भी देश अपने नागरिकों पर लगातार हमलों को बर्दाश्त नहीं करेगा और इजरायल भी अपनी सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाता रहेगा।
'लेबनान से नहीं, हिज्बुल्लाह से है लड़ाई'
नेतन्याहू ने कहा कि इजरायल का युद्ध लेबनान से नहीं बल्कि हिज्बुल्लाह से है, जो लेबनान को भी नुकसान पहुंचा रहा है और इजरायल के लिए खतरा बना हुआ है। उन्होंने कहा कि जब हिज्बुल्लाह को पूरी तरह निष्क्रिय और निरस्त्र कर दिया जाएगा, तब लेबनान के साथ शांति स्थापित करने का रास्ता खुलेगा। उन्होंने भविष्य में लेबनान के साथ शांति समझौते की उम्मीद भी जताई।













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