Malmas 2023: मलमास 16 दिसंबर से, एक महीना बंद रहेंगे बैंड, बाजा, बारात
Malamas 2023: सूर्य 16 दिसंबर 2023 को दोपहर 3 बजकर 57 मिनट पर धनु राशि में प्रवेश करने जा रहा है। सूर्य की धनु संक्रांति मलमास कहलाती है और मलमास के दौरान एक महीने विवाह, सगाई, मुंडन, गृह प्रवेश, उपनयन सहित सभी मांगलिक कार्यों पर प्रतिबंध लग जाता है। मलमास के दौरान कोई भी शुभ कार्य करना वर्जित होता है।

क्या होता है मलमास
सूर्य एक राशि में एक महीने रहता है और लगभग हर 30 दिन में अपनी राशि बदल देता है। सूर्य जब राशि चक्र में गोचर करते हुए बृहस्पति की राशि धनु और मीन में आता है तो उसे क्रमश: धनुर्मास और मीन मलमास कहा जाता है।
शुभ काम में बृहस्पति का शुद्ध होना आवश्यक है
चूंकि धनु और मीन राशि के स्वामी बृहस्पति होते हैं और किसी भी शुभ काम में बृहस्पति का शुद्ध होना आवश्यक है किंतु जब सूर्य इन दोनों राशियों में गोचर करते हैं तो बृहस्पति मलिन हो जाते हैं। इस कारण कोई भी मांगलिक काम मलमास के दौरान नहीं किए जाते हैं। यह मलमास 15 जनवरी के सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने के साथ ही समाप्त होगा। सूर्य की मकर संक्रांति से ही उत्तरायण का प्रारंभ होता है।
ये काम नहीं हो सकेंगे
मलमास के दौरान प्रमुख रूप से विवाह नहीं किए जाते हैं। इसके अलावा सगाई, नूतन गृह प्रवेश, मुंडन, उपनयन संस्कार आदि नहीं किए जाते हैं। किंतु इस दौरान नए वाहन की खरीदी, नए आभूषण, वस्त्र आदि खरीदे जा सकते हैं। इन पर कोई प्रतिबंध नहीं रहता है। मलमास समाप्ति के बाद विवाह का अगला मुहूर्त अब 16 जनवरी 2024 को रहेगा।
मलमास के देवता श्रीहरि विष्णु
मलमास को खरमास भी कहा जाता है। मलमास के देवता भगवान श्रीहरि विष्णु होते हैं। मलमास में विष्णु भगवान की नियमित पूजा आराधना करना चाहिए। पीले पुष्पों से श्रृंगार करके उन्हें गाय के देसी घी या घी से बनी मिठाई का नैवेद्य नियमित रूप से लगाना चाहिए।
सूर्य के लिए क्या करें
मलमास के दौरान सूर्यदेव की भी विशेष आराधना करना चाहिए। मलमास में नित्य प्रतिदिन सूर्यदेव को जल का अर्घ्य प्रदान करें और आयु आरोग्य की कामना करें। सूर्यदेव की प्रसन्नता के लिए नियमित रूप से लाल चंदन या केसर का तिलक मस्तक और नाभि पर लगाएं।












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