Karwa Chauth 2023: क्या होती है सरगी? क्या है इसका महत्व?
Karwa Chauth 2023 (क्या होती है सरगी?) : आस्था और प्रेम का व्रत करवा चौथ 1 नवंबर को है, इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए उपवास करती हैं। ये व्रत प्रेम, आस्था का पर्याय है। इस व्रत की शुरुआत सरगी से होती है।

अब सवाल ये उठता है कि सरगी क्या होती है?
सरगी का समय सूर्योदय से पहले होता है। सरगी हमेशा बहू को सास की ओर से दी जाती है। सरगी की थाली में फेनी, मिठाई, फल, सूखे मेवे, पुड़ी-सब्जी होती है, इन सारी चीजों के साथ बहुत सारा प्यार और आशीष भी होता है इसका इंतजार हर बहू को बेसब्री से होता है।
हिंदू और पंजाबी महिलाएं दोनों करती हैं व्रत
आपको बता दें कि ये उपवास हिंदू और पंजाबी महिलाएं दोनों करती हैं। हिंदू महिलाएं करवा चौथ की पूजा करवा से करती हैं और पंजाबी महिलाएं थाली से पूजा करती हैं।
कैसे करें सरगी की थाली तैयार?
सरगी की थाली में सेवइयां, फल, नारियल, ड्राय फ्रूट्स, पराठा, मठरी, जूस, पायल, बिछिया, बिंदी, सिंदूर, चूड़ी, साड़ी, आलता, काजल, कंघी और मेंहजी होती है। कहते हैं कि मीठा खाने से व्रत में बाधा नहीं आती है तो वहीं श्रृंगार का सामान सुहागिनों को सजने के लिए दिया जाता है।
बहू अपनी सास के पैर छूने चाहिए
सरगी खाने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, जब बहू को सास से सरगी मिलती है तो उस वक्त बहू अपनी सास के पैर छूने चाहिए। सरगी सुबह उठकर स्नान आदि करने के बाद ग्रहण की जाती है।
ये व्रत 1 नवंबर को रखा जाएगा
आपको बता दें कि चतुर्थी तिथि 31 अक्टूबर की रात 09:29 बजे से ही शुरू हो जाएगी और एक नवंबर को रात 9:18 बजे तक रहेगी लेकिन उदयातिथि होने के बावजूद ये व्रत 1 नवंबर को रखा जाएगा। इस दिन चंद्रमा रात 8:06 बजे पर उदय होगा। करवाचौथ का व्रत का मुहूर्त-01 नवंबर को शाम 05 बजकर 36 मिनट से शाम 06 बजकर 54 मिनट होगा।
करवा चौथ के दिन क्या करें?
- काले, ग्रे या सफेद वस्त्र ना पहनें।
- मांसाहार या मदिरा का सेवन ना करें।
- झगड़ा ना करें।
- सात्विक भोजन करें।
- घर में झगड़ा ना करें।
- ब्रह्मचर्य का पालन करें।












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