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Kamika Ekadashi 2025 : कामिका एकादशी आज, पढ़ें व्रत कथा और आरती

Kamika Ekadashi 2025 : आज सावन मास की एकादशी है, जिसे कि कामिका एकादशी कहा जाता है, कहते हैं कि इस दिन जो भी सच्चे मन से भगवान विष्णु की पूजा करता है तो उसके सारे कष्टों का अंत होता है और उसे सुख-शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है।

यह एकादशी पापों का नाश करने वाली, मनोकामना पूर्ण करने वाली और मोक्ष प्रदान करने वाली है। आज भगवान विष्णु की विधिपूर्वक पूजा करने से सभी पाप कट जाते हैं और पुण्य की प्राप्ति होती है और इंसान को यश की प्राप्ति होती है।

Kamika Ekadashi 2025

कामिका एकादशी व्रत कथा (Kamika Ekadashi 2025)

पौराणिक कथा के अनुसार एक समय एक गांव में एक क्रोधी स्वभाव का व्यक्ति रहता था। किसी विवाद में उसने अपने पड़ोसी की हत्या कर दी। अपराधबोध और पाप से ग्रस्त होकर वह एक संत के पास गया और प्रायश्चित का उपाय पूछा। संत ने उसे कामिका एकादशी का व्रत करने का परामर्श दिया। उस व्यक्ति ने पूरी श्रद्धा और नियम से इस व्रत को किया और भगवान विष्णु की पूजा की। व्रत के प्रभाव से उसे अपने पापों से मुक्ति मिली और आत्मशांति की प्राप्ति हुई।

कथा के बाद जरूर करें भगवान विष्णु की आरती (Kamika Ekadashi 2025)

इस कथा को पढ़ने के बाद भगवान विष्णु की आरती विशेष रूप से करनी चाहिए, ऐसा करने से जातक की पूजा को सफल माना जाता है।

भगवान विष्णु की आरती (Kamika Ekadashi 2025)

  • भगवान विष्णु की आरती।
  • ओम जय जगदीश हरे , स्वामी!
  • जय जगदीश हरे।
  • भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥
  • ओम जय जगदीश हरे।
  • जो ध्यावे फल पावे, दुःख विनसे मन का।
  • स्वामी दुःख विनसे मन का।
  • .सुख सम्पत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥
  • ओम जय जगदीश हरे।
  • मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं मैं किसकी।
  • स्वामी शरण गहूं मैं किसकी।
  • तुम बिन और न दूजा, आस करूं जिसकी॥
  • ओम जय जगदीश हरे।
  • तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी।
  • स्वामी तुम अन्तर्यामी।
  • पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी॥
  • ओम जय जगदीश हरे।
  • तुम करुणा के सागर, तुम पालन-कर्ता।
  • स्वामी तुम पालन-कर्ता।
  • मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥
  • ओम जय जगदीश हरे।
  • तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।
  • स्वामी सबके प्राणपति।
  • किस विधि मिलूं दयामय, तुमको मैं कुमति॥ ॐ जय जगदीश हरे।
  • दीनबन्धु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।
  • स्वामी तुम ठाकुर मेरे।
  • अपने हाथ उठा‌ओ, द्वार पड़ा तेरे॥
  • ओम जय जगदीश हरे।
  • विषय-विकार मिटा‌ओ, पाप हरो देवा।
  • स्वमी पाप हरो देवा।
  • श्रद्धा-भक्ति बढ़ा‌ओ, संतन की सेवा॥
  • ओम जय जगदीश हरे।
  • श्री जगदीशजी की आरती, जो कोई नर गावे।
  • स्वामी जो कोई नर गावे।
  • कहत शिवानन्द स्वामी, सुख संपत्ति पावे॥
  • ओम जय जगदीश हरे।

DISCLAIMER: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। वनइंडिया लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है।

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