Kalashtami 2023: कब है कालाष्टमी, क्या है पूजा विधि, कथा और महत्व?
Kalashtami 2023: सिद्धि योग में कालाष्टमी 15 मार्च को, भैरव पूजा से दूर होंगे सारे संकट, मिलेंगी शक्तियां, घर में होगा सुख-शांति का वास।

Kalashtami 2023 Puja Katha: प्रत्येक मास के कृष्णपक्ष की अष्टमी तिथि को कालाष्टमी मनाई जाती है। इस दिन भगवान शिव के रौद्र रूप भैरव का पूजन किया जाता है। किंतु चैत्र मास की कालाष्टमी विशेष होती है, क्योंकि यह हिंदू कैलेंडर के प्रथम मास चैत्र के कृष्णपक्ष की प्रथम कालाष्टमी होती है। इस बार कालाष्टमी चैत्र कृष्ण अष्टमी 15 मार्च 2023 बुधवार को सिद्धि योग और ज्येष्ठा-मूल नक्षत्र की साक्षी में आ रही है। भैरवनाथ की पूजा जीवन में आकस्मिक रूप से आने वाले संकटों से मुक्ति दिलाती है।
कालाष्टमी के लाभ
- कालाष्टमी के दिन भगवान भैरवनाथ का पूजन शत्रुओं से रक्षा करता है। आकस्मिक रूप से आने वाले रोग, धन हानि, दुर्घटनाओं से रक्षा होती है।
- भगवान भैरव का वाहन काला श्वान होता है। कालाष्टमी के दिन कुत्ते को मीठी रोटी खिलाने से सर्वत्र रक्षा होती है।
- इस दिन भैरवनाथ के समक्ष सरसों के तेल का दीपक लगाने से आर्थिक संकट दूर होते हैं। संपत्ति के विवादों का निपटारा होता है।
- कालाष्टमी के दिन भैरवनाथ को मदिरा भेंट करने से मनोवांछित कामनाओं की पूर्ति होती है। लेकिन स्वयं मदिरापान न करें।
- कालाष्टमी के दिन कालभैरव को नारियल, पान भेंट करने से शक्तियों की प्राप्ति होती है।
- इस दिन कालभैरव चालीसा या शिव चालीसा का पाठ करने से संकटों से मुक्ति मिलती है।
कालाष्टमी कथा
एक बार ब्रह्मा, विष्णु और शिव में यह बहस छिड़ी कि सबसे बड़ा कौन। सभी देवताओं को बुलाकर इसका उत्तर पूछा गया। सभी ने अपने-अपने विचार व्यक्त किए और अधिकांश देवताओं ने शिवजी को सबसे बड़ा बताया। इस पर ब्रह्माजी क्रोधित हो गए और उन्होंने देवताओं की बात को नकारते हुए शिवजी को अपशब्द कह दिए। इस पर शिवजी को भी क्रोध आ गया। और उनके क्रोध स्वरूप में भैरव का अवतार हुआ। भैरव ने ब्रह्माजी के पांच में से एक मुख को काट दिया, तभी से ब्रह्माजी के चार मुख ही हैं। भयभीत ब्रह्मा ने भैरव से क्षमा मांगी किंतु ब्रह्माजी का सिर काटने पर भैरव पर भी ब्रह्म हत्या का पाप लग गया। इसके परिणामस्वरूप उन्हें कई वर्षों तक भिखारी के रूप में रहना पड़ा। इसके बाद काशी में उनका दंड समाप्त हुआ।












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