Kailash Mansarovar Yatra 2026: 20 जून से शुरू हो रही कैलाश यात्रा, क्या है रूट-खर्च और गाइडलाइंस?
Kailash Mansarovar Yatra 2026: हिंदू, जैन, बौद्ध और बोन धर्म के अनुयायियों के लिए आस्था का सबसे बड़ा केंद्र मानी जाने वाली कैलाश मानसरोवर यात्रा 2026 एक बार फिर शुरू होने जा रही है। विदेश मंत्रालय (MEA) के मुताबिक इस साल यात्रा के जत्थे 20 जून के आसपास रवाना हो रहे हैं। आपको बता दें कि यह यात्रा दो आधिकारिक रास्तों उत्तराखंड के लिपुलेख और सिक्किम के नाथू ला से कराई जाती है।
लेकिन हर कोई चीन सीमा पार कर इस कठिन यात्रा पर नहीं जा पाता। ऐसे में इस बार एक और रास्ता भी चर्चा में है, जिसके जरिए भारत की धरती से ही कैलाश के दर्शन मुमकिन हैं। आइए आसान भाषा में जानते हैं कि कैलाश मानसरोवर यात्रा 2026 कब से शुरू हो रही है, कैसे होती है, क्या गाइडलाइंस हैं और इसका धार्मिक महत्व क्या है।

कैलाश मानसरोवर यात्रा 2026 कब से शुरू हो रही है?
विदेश मंत्रालय के मुताबिक कैलाश मानसरोवर यात्रा 2026 के जत्थे 20 जून के आसपास रवाना हो रहे हैं और यह यात्रा जून से अगस्त के बीच चलती है। इस बार MEA ने कुल 20 जत्थे रखे हैं और हर जत्थे में करीब 50 यात्री शामिल होते हैं। यात्रा के लिए रजिस्ट्रेशन आधिकारिक पोर्टल kmy.gov.in पर होता है, जिसकी आखिरी तारीख 19 मई 2026 थी। यात्रियों का चयन कंप्यूटरीकृत ड्रॉ (लॉटरी) के जरिए किया जाता है।
कैसे होती है कैलाश यात्रा? लिपुलेख और नाथू ला, दो रास्ते
कैलाश मानसरोवर यात्रा विदेश मंत्रालय की ओर से चीन के सहयोग से कराई जाती है और इसके दो आधिकारिक रास्ते हैं। दोनों की अवधि, खर्च और कठिनाई अलग-अलग है:
| रूट | राज्य | अवधि | अनुमानित खर्च | खासियत |
|---|---|---|---|---|
| लिपुलेख दर्रा | उत्तराखंड | करीब 22 दिन | करीब ₹2.09 लाख | ज्यादा ट्रेकिंग, अपेक्षाकृत कठिन |
| नाथू ला दर्रा | सिक्किम | करीब 21 दिन | करीब ₹3.31 लाख | ज्यादातर वाहन से, अपेक्षाकृत आसान |
दोनों रास्तों में यात्री पहले दिल्ली पहुंचकर मेडिकल जांच कराते हैं और फिर अपने जत्थे के साथ रवाना होते हैं। मानसरोवर झील में स्नान और कैलाश पर्वत की परिक्रमा इस यात्रा का सबसे अहम और भावुक हिस्सा माना जाता है।
क्या हैं कैलाश यात्रा 2026 की गाइडलाइंस?
कठिन रास्ते और ऊंचाई को देखते हुए कैलाश यात्रा के लिए कुछ जरूरी शर्तें तय की गई हैं:
- उम्र: यात्री की उम्र आमतौर पर 18 से 70 साल के बीच होनी चाहिए।
- फिटनेस: पूरी मेडिकल फिटनेस जरूरी; दिल्ली और ITBP बेस पर मेडिकल जांच होती है।
- पासपोर्ट: वैध भारतीय पासपोर्ट अनिवार्य है।
- रजिस्ट्रेशन: सिर्फ आधिकारिक पोर्टल kmy.gov.in के जरिए, और चयन लॉटरी से होता है।
- मेडिकल मानक: तय BMI और सेहत के मानकों पर खरा उतरना जरूरी है।
भारत से ही ऐसे करें कैलाश दर्शन — आदि कैलाश और ओम पर्वत
अगर आपका चयन नहीं हुआ या आप चीन सीमा पार नहीं जाना चाहते, तो निराश होने की जरूरत नहीं। उत्तराखंड पर्यटन विकास बोर्ड (UTDB) और KMVN के सहयोग से आदि कैलाश (छोटा कैलाश) और ओम पर्वत के दर्शन भारत की धरती से ही कराए जाते हैं, जिनमें हेलिकॉप्टर/एरियल दर्शन भी शामिल हैं। पिथौरागढ़ के धारचूला रास्ते से होने वाली इस यात्रा के लिए इनर लाइन परमिट (ILP) जरूरी है और करीब 9 से 70 साल तक के स्वस्थ नागरिक इसमें शामिल हो सकते हैं। खास बात यह कि इसके लिए चीन का वीजा नहीं चाहिए।
क्या है कैलाश मानसरोवर यात्रा का महत्व?
हिंदू धर्म में कैलाश पर्वत को भगवान शिव का निवास माना जाता है, वहीं मानसरोवर झील को बेहद पवित्र माना गया है। जैन परंपरा में इसे अष्टापद कहा जाता है, जहां पहले तीर्थंकर ऋषभदेव से जुड़ी मान्यता है। बौद्ध परंपरा में इसे डेमचोक का स्थान और बोन धर्म में एक बड़ा आध्यात्मिक केंद्र माना जाता है। यही वजह है कि कैलाश की परिक्रमा और मानसरोवर में स्नान को जीवन की सबसे बड़ी आध्यात्मिक यात्राओं में गिना जाता है।
कैलाश यात्रा 2026 से जुड़ी खास बातें
- आयोजक: विदेश मंत्रालय (चीन के सहयोग से)
- रजिस्ट्रेशन पोर्टल: kmy.gov.in (आखिरी तारीख 19 मई 2026)
- दो रास्ते: लिपुलेख (उत्तराखंड) और नाथू ला (सिक्किम)
- कुल जत्थे: 20, हर जत्थे में करीब 50 यात्री
- उम्र सीमा: करीब 18 से 70 साल
- भारत से विकल्प: आदि कैलाश और ओम पर्वत दर्शन (ILP जरूरी, चीन वीजा नहीं)
कुल मिलाकर, कैलाश मानसरोवर यात्रा सिर्फ एक तीर्थयात्रा नहीं, बल्कि आस्था, सहनशीलता और आध्यात्मिक अनुभव का संगम है।
नोट: यह लेख आम जानकारी पर आधारित है। यात्रा की तारीखें, खर्च और गाइडलाइंस विदेश मंत्रालय की आधिकारिक घोषणा के मुताबिक बदल सकती हैं; आवेदन से पहले kmy.gov.in पर ताजा जानकारी जरूर देखें।












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