Jyeshtha Purnima 2025: ज्येष्ठ पूर्णिमा आज, कीजिए ये उपाय चमक जाएगी किस्मत
Jyeshtha Purnima 2025: आज ज्येष्ठ पूर्णिमा का पावन दिन है, यह वर्ष की बड़ी पूर्णिमा होती है। ज्येष्ठ पूर्णिमा का न केवल आध्यात्मिक महत्व है, बल्कि ज्योतिषीय दृष्टि से भी यह दिन अत्यंत विशेष है। यह पूर्णिमा भगवान विष्णु लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने, चंद्र की शांति करने और अन्य साधनों के लिए उत्तम है। इस दिन अनेक उपाय किए जाते हैं जो धन, सुख-समृद्धि और पितरों की शांति करते हैं।

ज्येष्ठ पूर्णिमा पर करें ये उपाय
- लक्ष्मी प्राप्ति के लिए : पूर्णिमा की रात्रि में चंद्रमा को दूध और मिश्री मिलाकर अर्घ्य दें। \"ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चंद्रमसे नमः\" का 108 बार जप करें। घर के उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) में देसी घी का दीपक जलाकर श्रीसूक्त या लक्ष्मी स्तोत्र का पाठ करें।
- पितृ शांति के लिए : ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन पीपल के वृक्ष के नीचे दीपक जलाएं और जल चढ़ाएं। \"ॐ पितरेभ्यो नमः\" का 108 बार जप करें। जरूरतमंदों को अन्न, कपड़े या भोजन का दान करें। गाय को हरा चारा खिलाएं।
चांदी के बर्तन में जल भरकर चंद्रमा को अर्घ्य दें (Jyeshtha Purnima 2025)
- चंद्र दोष शांति के लिए : इस दिन सफेद वस्त्र पहनें और रात्रि में चंद्रमा की रोशनी में छत पर या किसी बगीचे में बैठकर ध्यान करें। चांदी के बर्तन में जल भरकर चंद्रमा को अर्घ्य दें। चंद्रमा के बीज मंत्र \"ॐ सोम सोमाय नमः\" का जप करें।
- गृह क्लेश और दरिद्रता निवारण : रात्रि में घर के मुख्य द्वार पर दोनों ओर घी का दीपक जलाएं। शंख में जल और गुलाबजल भरकर घर के कोनों में छिड़काव करें। लक्ष्मी के चित्र या यंत्र के समक्ष कमल गट्टे की माला से \"ॐ महालक्ष्म्यै नमः\" जप करें।
सुहागिन स्त्रियों को सुहाग सामग्री भेंट करें (Jyeshtha Purnima 2025)
संतान सुख या दांपत्य जीवन सुधार : सुहागिन स्त्रियों को सुहाग सामग्री भेंट करें। मंदिर में चमेली का तेल और सिंदूर चढ़ाकर देवी पार्वती से प्रार्थना करें। \"ॐ गौरी शंकराय नमः\" का जाप करें। इस दिन मेहंदी अवश्य भेंट करनी चाहिए।
स्फटिक की माला से "ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः" का जाप करें (Jyeshtha Purnima 2025)
विद्या और बुद्धि के लिए : माता सरस्वती को अक्षत, सफेद पुष्प और श्वेत वस्त्र अर्पित करें। स्फटिक की माला से \"ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः\" का जाप करें। इस दिन विद्यार्थियों को पुस्तकों और पेन का दान करना चाहिए।
पूर्णिमा स्नान : किसी पवित्र नदी या घर में गंगाजल मिलाकर स्नान करें। स्नान के बाद तांबे के लोटे में जल, चावल, सफेद पुष्प डालकर सूर्य को अर्घ्य दें। गायत्री मंत्र का जाप करें या आदित्यहृदय स्तोत्र का पाठ करें।












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