Jaya Ekadashi 2024 : जया एकादशी आज, जानिए कथा और महत्व
Jaya Ekadashi 2024 (कथा): माघ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी जया एकादशी के नाम से विख्यात है। पद्म पुराण के अनुसार जया एकादशी मोक्ष दिलाने वाली और बैकुंठ में परम पद दिलाने वाली कही गई है। इस एकादशी का व्रत करने से मनुष्य पृथ्वी पर रहते हुए सर्वत्र विजयी रहता है।

उसे कभी पराजय का सामना नहीं करना पड़ता। आज ये पावन दिन है, इस एकादशी के दिन श्रीहरि विष्णु को गन्ने के रस का नैवेद्य लगाया जाता है और व्रती को भी फलाहार के रूप में गन्ने का रस ग्रहण करना चाहिए।
जया एकादशी की कथा ( Jaya Ekadashi Katha)
एक बार नंदन वन में इंद्र की सभा में बड़ा उत्सव चल रहा था। इस सभा में सभी देवतागण और संत उपस्थित थे। उस समय गंधर्व गीत गा रहे थे और गंधर्व कन्याएं मधुर नृत्य से सभा को मोहित कर रही थीं। इन्हीं गंधर्वों में एक माल्यवान नाम का गंधर्व भी था जो बहुत ही सुरीले गीत गाता था। वह परम रूपवान और गुणवान भी था। गंधर्व कन्याओं में एक सुंदर पुष्यवती नामक नृत्यांगना भी थी। भरी सभा में पुष्यवती और माल्यवान एक-दूसरे को देखकर अपनी सुध-बुध खो बैठे और अपनी लय-ताल से भटक गए।
देवराज इंद्र को क्रोध आ गया
माल्यवान और पुष्यवती के इस कृत्य से देवराज इंद्र को क्रोध आ गया और उन दोनों के स्वर्ग से वंचित रहने का श्राप दे दिया। इंद्र ने दोनों को मृत्यु लोक में पिशाचों सा जीवन भोगने का श्राप दिया। श्राप के प्रभाव से पुष्यवती और माल्यवान प्रेत योनि में चले गए और वहां जाकर कठिन दुख भोगने लगे।
प्रेत योनि से मुक्ति मिल गई
एक समय संयोग से माघ मास में शुक्ल पक्ष की एकादशी के दिन पूरे दिन में दोनों ने सिर्फ एक बार ही फलाहार किया था। रात्रि में भगवान से प्रार्थना कर अपने किए पर पश्चाताप भी कर रहे थे। इसके बाद सुबह तक दोनों की मृत्यु हो गई। अंजाने में उन्होंने एकादशी का व्रत कर लिया और इसके प्रभाव से उन्हें प्रेत योनि से मुक्ति मिल गई और वे पुन: स्वर्ग लोक चले गए।
एकादशी समय
- एकादशी प्रारंभ 19 फरवरी प्रात: 8:49
- एकादशी पूर्ण 20 फरवरी प्रात: 9:54
- व्रत का पारण 21 फरवरी प्रात: 6:55 से 9:13












Click it and Unblock the Notifications