Rath Yatra 2022: 'रथयात्रा' में क्यों नहीं होता श्रीकृष्ण की पत्नी रुक्मिणी का रथ?
नई दिल्ली 28 जून। 'जगन्नाथ रथयात्रा' का शुभारंभ 1 जुलाई को होना है,इसके लिए जोर-शोर से तैयारियां हो रही है। इस रथ यात्रा में भगवान जगन्नाथ के साथ बहन सुभद्रा और भाई बलभद्र के रथ निकाले जाते हैं। ये पहली पूजा है जिसमें श्री कृष्ण के रथ के साथ पत्नी रुक्मिणी का रथ या प्रेमिका राधा का रथ नहीं होता है। जिसके पीछे एक खास कारण है।

नींद में भगवान के श्रीमुख से 'राधा' का नाम निकला
पौराणिक कथाओं के मुताबिक एक बार श्रीकृष्ण अपने महल में सो रहे थे और रानी रुक्मिणी उनके निकट ही बैठी थीं कि अचानक से उन्होंने भगवान के श्रीमुख से 'राधा' का नाम सुना। जिसे सुनकर उन्हें अच्छा नहीं लगा,उन्होंने मन में सोचा कि आखिर राधा में ऐसा क्या है? जिसकी वजह से निद्रा अवस्था में भी प्रभु उन्हीं का नाम लेते हैं? मैं उनकी दिन-रात सेवा करती हूं फिर भी 'राधा' की जगह नहीं ले पा रही हूं।

'मैं सबको दोनों के प्रेम के बारे में बताऊंगी'
उन्होंने अपने इस कष्ट को बाकी पटरानियों को भी बताया। जिसके बाद सभी ने यह तय किया कि वो इस बारे में माता रोहिणी से बात करेंगी और इसके बाद वो सभी रोहिणी के पास राधा-कृष्ण के प्रेम के बारे में पूछने के लिए चली गईं। माता रोहिणी ने बड़ी शांति से सभी की बात सुनी लेकिन फिर कहा कि 'मैं सबको दोनों के प्रेम के बारे में बताऊंगी लेकिन जब तक मैं उनके बारे में बताऊं तब तक मेरे कमरे में किसी को नहीं आना चाहिए।'

सुभद्रा, श्रीकृष्ण और बलदाऊ के शरीर गलने लगे
रुक्मिणी ने तुरंत इस शर्त को मान लिया और द्वारपाल के रूप में उन्होंने सुभद्रा को खड़ा कर दिया। इसके बाद माता रोहिणी ने राधे-कृष्ण की प्रेम लीला के बारे में बात करने लगीं। तभी सुभद्रा ने देखा कि श्रीकृष्ण-बलदाऊ उसी ओर आ रहे हैं, उसने उन्हें रोकने का प्रयास किया लेकिन माता रोहिणी की बातें कमरे के बाहर तक सुनाई पड़ रही थीं और वो बातें इतनी सुंदर थीं, जिसे सुभद्रा, श्रीकृष्ण और बलदाऊ वहीं पर खड़े ही रह गए लेकिन इस दौरान उनका शरीर गलने लगा।

नारद जी ने की थी प्रार्थना
तभी उधर से नारद मुनि गुजरे , वो तीनों के इस रूप को देखकर दंग रह गए, उन्होंने प्रभु से प्रार्थना की उनके इस अलौकिक रूप को भक्तों को भी देखना चाहिए इसलिए वो उनके सामने इस रूप में सामने आए। प्रभु ने नारद जी की बात मान ली।
जगन्नाथ को श्रीकृष्ण-राधा का सम्मिलित रूप माना जाता है
इसलिए जगन्नाथ को प्रभु श्रीकृष्ण और राधा का सम्मिलित रूप माना जाता है और चूंकि उनका और उनके भाई-बहनों के शरीर गल चुके थे इसलिए पुरी धाम में जगन्नाथ, सुभद्रा और बलदाऊ का अधूरा रूप होता है और वो लोगों को दर्शन देने के लिए रथ यात्रा में सामने आते हैं। चूंकि नारद जी ने केवल जगन्नाथ, सुभद्रा और बलदाऊ के ही अधूरे रूप को देखा था, वहां रुक्मिणी नहीं थी इसलिए रथ यात्रा में श्रीकृष्ण की पत्नी रुक्मिणी का रथ नहीं होता है।












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