Guru Purnima 2024: 'गुरू ब्रम्ह रूप मानो, शिव का स्वरूप जानो', जानिए क्या है 'गुरू' का अर्थ?
Guru Purnima: गुरु अपने आप में बहुत ही खूबसूरत शब्द है। गुरु शब्द गु और रू से मिलकर बना है। गु का अर्थ होता है अंधेरा जबकि रू का अर्थ प्रकाश होता है। लिहाजा जो हमें अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाए उसे गुरु कहते हैं।
आध्यात्मिक परिपेक्ष्य में बात करें तो आपके भीतर हर विषय की जानकारी पहले से मौजूद है। लिहाजा गुरु उस की बाधा को हटाने का काम करता है जो आपके और ज्ञान के बीच होती है। किसी भी ज्ञान की अनुभूति तबतक नहीं होती है जबतक कि गुरु उससे आपको अवगत नहीं कराता है। यही वजह है कि गुरु की महिमा काफी अधिक होती है।

बिना गुरू के जीवन की कल्पना नामुमकिन
बिना गुरु के जीवन की कल्पना भी नामुमकिन है। जीवन के हर पड़ाव में हमें एक गुरु की आवश्यकता होती है जो हमें अगले पड़ाव की ओर बढ़ने में मदद करता है। गुरु की इस महिमा को भारत में गुरु पूर्णिमा के तौर पर मनाया जाता है।
व्यास पूर्णिमा-गुरू पूर्णिमा
वेद व्यास जिन्होंने वेदों को संकलित किया और महाभारत की संरचना की, 18 पुराणों को लिखा। महाभारत में भगवान श्रीकृष्ण और अर्जुन के बीच के संवाद को गीता में संकलित करने का काम भी वेद व्यास जी ने किया। महान वेद व्यास के जन्मदिवस को व्यास पूर्णिमा या फिर गुरु पूर्णिमा के तौर पर जाना जाता है।
गुरू-शिष्य का संबंध
गुरू कौन होता है, गुरु वो होता है जो निस्वार्थ आपको ज्ञान दे और शिष्य वह होता है जो गुरु द्वारा दिए गए ज्ञान को कृतज्ञता से ग्रहण करता है। गुरु वो होता है जो हमेशा अपने शिष्य को ऊपर जाते देखना चाहता है, वह चाहता है कि उसका शिष्य उससे भी बेहतर व्यक्ति बने।
गीता में गुरू-शिष्य का सार
भगवत गीता के 18वें अध्याय में भगवान श्री कृष्ण अर्जुन से कहते हैं कि मुझे जो भी बताना था, वो बता दिया, अब यह निर्णय तुम्हारा है कि तुम्हे क्या करना है। मेरी राय के साथ मत जाओ, जो तुम्हें लगता है वो करो।
लिहाजा गुरु शिष्य को ज्ञान देता है और इसके साथ ही यह स्वतंत्रता भी देता है कि वह खुद से तय कर सके कि उसे क्या करना है। गुरू-शिष्य के इस रिश्ते को बहुत ही पवित्र रिश्ता कहा जाता है।












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