Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

गुरु पूर्णिमा 2020: जानिए व्यास पूर्णिमा की तिथि, समय और महत्व

गुरु पूर्णिमा 2020: जानिए व्यास पूर्णिमा की तिथि, समय और महत्व

नई दिल्ली। गुरु पूर्णिमा 2020 जिसे व्‍यास पूर्णिमा भी कहां जाता है वो इस बार पांच जुलाई रविवार को हैं। हिंदू कलेन्‍डर के हिसाब से हर वर्ष गुरु पूर्णिमा यानी की व्‍यास पूर्णिमा का पर्व आषाढ़ मास में पड़ने वाली पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। इस बार आषाढ़ पूर्णिमा गुरु पूर्णिमा पर 5 जुलाई 2020 को उपछाया चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है। गुरु पूर्णिमा के दिन लोग अपने गुरु और शिक्षक को सभी ज्ञान और जीवन-पाठ के लिए धन्यवाद देते हैं। इस दिन महाभारत के रचयिता कृष्ण द्वैपायन व्यास का जन्म हुआ भी हुआ था। महर्षि वेदव्यास संस्कृत के महान विद्वान थे और उन्‍होंने महाभारत जैसा महाकाव्य की रचना के साथ 18 पुराणों का रचयिता भी है। इसीलिए ये दिन गुरु या श्रद्धेय आध्यात्मिक गुरु को श्रद्धांजलि देने के लिए समर्पित दिन है। आइए जानते हैं इस बार गुरु पूर्णिमा/ व्यास पूर्णिमा की तिथि, समय और महत्‍व ...

गुरु पूर्णिमा का शुभ मुहुर्त

गुरु पूर्णिमा का शुभ मुहुर्त

गुरु पूर्णिमा रविवार, 5 जुलाई, 2020 को
पूर्णिमा तिथि शुरु होने का - 04 जुलाई, 2020 को रात्रि 11:33 पूर्वाह्न से
पूर्णिमा तीथि समाप्त - 05 जुलाई, 2020 को 10:13 पूर्वाह्न तक

गुरु पूर्णिमा से जुड़ी हैं ये कई मान्‍यताएं

गुरु पूर्णिमा से जुड़ी हैं ये कई मान्‍यताएं

यह दिन बौद्धों द्वारा अत्यंत उत्साह के साथ मनाया जाता है क्योंकि यह माना जाता है कि गौतम बुद्ध ने राज पाठ और सांसारिक जीवन त्याग करने के बाद इस दिन सारनाथ में अपना पहला उपदेश दिया था। साथ ही, यह भी कहा जाता है कि इस दिन भगवान शिव आदि गुरु बने थे और सप्तर्षियों को ज्ञान प्रदान किया। जैनियों के लिए भी गुरु पूर्णिमा का बहुत महत्व है। इस दिन, 24 वें तीर्थंकर - महावीर - ने गौतम स्वामी (पहले इंद्रभूति गौतम के रूप में जाना जाता था) को अपना पहला शिष्य बनाया। वह इस प्रकार गुरु बन गया और इसलिए इस दिन को गुरु पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है।

जानिए गुरु शब्द का अर्थ

जानिए गुरु शब्द का अर्थ

गुरु पूर्णिमा एक गुरु के निस्वार्थ योगदान के लिए एक दिन है। दिलचस्प बात यह है कि संस्कृत शब्द गुरु का अर्थ है, जो अज्ञान को दूर करता है (गु का अर्थ है अज्ञानता और रु का अर्थ है पदच्युत)। भारत में, गुरु-शिष्य बंधन को एक शुद्ध संबंध के रूप में देखा जाता है जो छात्र को अधिक तरक्की प्राप्त करने में मदद करता है। संस्कृत श्लोक - माता पिता गुरु दैवम् - स्पष्ट रूप से भगवान से पहले एक शिक्षक की भूमिका निभाता है। भारत में, शिक्षक को गुरु के रूप में जाना जाता है (जो ज्ञान के बीज बोता है और अंधकार को समाप्त करता है)।

प्राचीन काल से प्र‍चतिल हैं ये गुरु-शिष्‍य परंपरा

प्राचीन काल से प्र‍चतिल हैं ये गुरु-शिष्‍य परंपरा

इस दिन, छात्र अपने शिक्षकों को शिक्षा प्रदान करने के अलावा मूल्यों, नैतिकता का पोषण करने और क्या सही है और गलत है इसका ज्ञान प्रदान करने के लिए धन्‍यवाद देते हैं। प्राचीन भारत में, माता-पिता अपने बच्चों की जिम्मेदारी गुरु को सौंपते थे क्योंकि वे जानते थे कि केवल एक शिक्षक ही एक बच्चे को समग्र रूप से विकसित करने में मदद कर सकता है। गुरु शिष्य परम्परा, जिसे सामाजिक ताने-बाने में बुना गया था, शिक्षक और एक छात्र के बीच एक सुंदर बंधन देखा गया। इसके अलावा, हमारे महान भारतीय महाकाव्य रामायण और महाभारत में भी एक गुरु के महत्व को स्पष्ट रूप से स्थापित किया गया है। ऋषि विश्वामित्र और भगवान राम या अर्जुन और द्रोणाचार्य द्वारा साझा किया गया बंधन गुरु शिष्य परम्परा का अद्भुद और सबसे बड़ा उदाहरण है।

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+