दक्षिण का काशी कहलाता है कर्नाटक का ये मंदिर, आत्मलिंग में भगवान शिव करते हैं वास
Mahabaleshwar Temple, Gokarna: दक्षिण भारत के कर्नाटक राज्य में एक से एक प्राचीन मंदिर हैं। आस्था और कला के जोड़ से बने यहां के मंदिर भारत की प्राचीन संस्कृति और कला के अद्भुद जोड़ को दर्शाते हैं।
इन्हीं प्राचीन मंदिरों में गोकर्ण महाबलेश्वर मंदिर (Mahabaleshwar Temple, Gokarna) भी शामिल है। गोकर्ण में स्थित महाबलेश्वर मंदिर को दक्षिण के काशी के नाम से भी जाना जाता है। आइए जानते हैं इस मंदिर का प्राचीन इतिहास और खासयित...

रामायण में भी है मिलता है इसका जिक्र
शिव को समर्पित ये मंदिर द्रविड़ वास्तुकला का बेहतरीन उदाहरण है। इस मंदिर का जिक्र रामायण और महाभारत की प्रचीन कथाओं में भी मिलता है।
चौथी शताब्बी का है ये मंदिर
दक्षिण कर्नाटक के मैंगलोर के पास स्थित गोकर्ण गांव में ये चौथी शताब्दी का पुराना मंदिर सिथत है। ये कर्नाटक के सात मुक्ति स्थलों में से एक है। कर्नाटक के हिंदू धर्म के लोग अपने दिवंगत लोगों का अंतिम संस्कार (मृत्यु संस्कार) करने यहां आते हैं। जिस प्रकार काशी में अंतिम संस्कार से मोक्ष मिलता है वो ही मान्यता दक्षिण के इस काशी की भी है।।
दक्षिण का काशी कहा जाता है
यह मंदिर अरब सागर पर गोकर्ण समुद्र तट पर स्थित है। महाबलेश्वर मंदिर में स्थापित शिवलिंग को आत्मलिंग के नाम से जाना जाता है। इस मंदिर में सिथत जो शिवलिंग है उसे शिवलिंग को काशी के विश्वनाथ मंदिर के बराबर मान्यता है।
रावण से हासिल कर गणेश जी ने इसे यहां स्थापित किया था
मान्यता है ये शिवलिंग स्वयं भगवान शिव ने रावण से प्रसन्न होकर उसे उसके सम्राज्य की रक्षा करने के लिए दिया था। रावण इसे हिमालय में कैलाश पर्वत से वहां ले गया था लेकिन वरूण देवता और गणेश भगवान ने चालाकी से उस शिवलिंग की स्थापना यहां गोकर्ण में करवा दी थी।
शिवलिंग में भगवान शिव का वास है
शिवलिंग को रावण ने यहां से निकालकर अपने साथ ले जाने का प्रयास किया लेकिन वो सफल नहीं हुआ, तभी से ये शिवलिंग यहां स्थापित है और कहते हैं इस शिवलिंग में भगवान शिव का वास है।
पहले गणेश भगवान के दर्शन
महाबलेश्वर मंदिर के पास एक गणपति मंदिर हैं जहां पर पहले दर्शन करने के शिवलिंग के दर्शन करने जाने की मान्यता है। इसके पीछे कारण ये है कि यहां शिवलिंग को गणेश जी ने स्थापित करवाया था।
मंदिर में जींस, ट्रॉउजर या शॉट्स पहनने वालों को नहीं मिलता प्रवेश
महाबलेश्वर मंदिर में पारंपरिक परिधान में ही प्रवेश की परमीशन दी जाती है। जींस, ट्रॉउज़र या शॉट्स नहीं पहनने वालो को एंट्री नहीं मिलती है। मंदिर मे दर्शन का समय सुबह 6 बजे से 12 बजे तक है इसे बाद शम 5 से रात्रि आठ बजे तक है।
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