Panchak Me Ganesh Visarjan : जानिए क्या इस समय नहीं करना चाहिए भगवान गणेश की प्रतिमा का विसर्जन
नई दिल्ली, 18 सितंबर। देशभर में धूमधाम से गणेश उत्सव मनाया जा रहा है। 10 दिवसीय इस त्योहार में लोग अपने घरों भगवान गणेश की मूर्ति की स्थापना करते है और फिर उनका विसर्जन करते हैं। गणेश चतुर्थी, गणेश उत्सव, विनायक चतुर्थी समेत कई नामों से इस त्योहार को जाना जाता है और अलग-अलग जगह विभिन्न मान्यताएं हैं। आम तौर पर यह कई जगह यह धारणा है कि पंचक लगने से पहले ही भगवान गणेश की पूजा-अर्चना के साथ उनका विसर्जन कर दिया जाना चाहिए।

पंचक में गणेश विसर्जन (Panchak me ganesh visarjan)
आज यानी शनिवार दोपहर 4.30 बजे से पंचक लगने वाला है और कई क्षेत्रों में भगवान गणेश की मूर्ति का धूमधाम से विसर्जन किया जा रहा है। हालांकि भगवान गणेश की विदाई में पंचक को बाधा नहीं माना जाता लेकिन कई लोगों में ऐसी मान्यता है। कई ज्योतिषाचार्यों और ज्योतिष विशेषज्ञों का कहना है कि शुभ कार्यों जैसे देवताओं की पूजा अन्य कार्यों में पंचक पर विचार नहीं किया जाता। शास्त्रों में कहीं इस बात का जिक्र नहीं है कि शुभ कार्य के दौरान पंचक बाधा बनता है। हालांकि कुछ कार्यों में पंचक का ध्यान रखना जरूरी है।
यह भी पढ़ें: महाराष्ट्र: गणेश विसर्जन पर पुणे में बंद रहेंगी सभी दुकानें, आवश्यक सेवाओं पर दी जाएगी छूट
धनिष्ठा तृतीय चरण से रेवती नक्षत्र तक पंचक का प्रभाव माना जाता है, जब चंद्रमा कुंभ और मीन राशि पर रहता है तब उस समय को पंचक कहते हैं। प्रभाव काल में शव का दाह संस्कार, दक्षिण दिशा में यात्रा, लकड़ी काटना, तृण तोड़ना, लकड़ी व तृण एकत्र करने जैसे कार्य वर्जित माने गए हैं। जबकि शुभ कार्य, देव पूजन, गृह प्रवेश, प्रतिष्ठान का शुभारंभ, यज्ञोपवीत, वाहन क्रय करना, धार्मिक यात्राएं व शुभ कार्य वर्जित नहीं माने गए हैं। भगवान गणेश के दस दिवसीय पर्व पर विदाई की बेला में उनके विसर्जन के लिए पंचक के बाधा मानना गलत धारणा है।












Click it and Unblock the Notifications