Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

Ganesha Chalisa: बुधवार को जरूर करें गणेश चालीसा का पाठ, खुल जाएंगे तरक्की के द्वार

Ganesha Chalisa: हिंदू धर्म में भगवान गणेश को प्रथम पूज्य देवता माना जाता है। कोई भी शुभ कार्य हो या धार्मिक अनुष्ठान, गणपति की पूजा के बिना वह आरंभ नहीं होता। मान्यचा है कि कोई भी भगवान गणेश की पूजा सच्चे मन से करता है उसके सारे कष्टों का अंत होता है और उसे यश, तरक्की और धन की प्राप्ति होती है।

गणेश चालीसा के 40 चौपाइयों का पाठ करने से व्यक्ति के जीवन में आने वाली कठिनाइयाँ दूर होती हैं और कार्यों में सफलता मिलती है। आर्थिक समस्या से जूझ रहे व्यक्ति को स्थिरता और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।

Ganesha Chalisa

गणेश चालीसा

॥ दोहा ॥

  • जय गणपति सदगुण सदन,
  • कविवर बदन कृपाल ।
  • विघ्न हरण मंगल करण,
  • जय जय गिरिजालाल ॥

॥ चौपाई ॥

  • जय जय जय गणपति गणराजू ।
  • मंगल भरण करण शुभः काजू ॥
  • जै गजबदन सदन सुखदाता ।
  • विश्व विनायका बुद्धि विधाता ॥
  • वक्र तुण्ड शुची शुण्ड सुहावना ।
  • तिलक त्रिपुण्ड भाल मन भावन ॥
  • राजत मणि मुक्तन उर माला ।
  • स्वर्ण मुकुट शिर नयन विशाला ॥
  • पुस्तक पाणि कुठार त्रिशूलं ।
  • मोदक भोग सुगन्धित फूलं ॥
  • सुन्दर पीताम्बर तन साजित ।
  • चरण पादुका मुनि मन राजित ॥
  • धनि शिव सुवन षडानन भ्राता ।
  • गौरी लालन विश्व-विख्याता ॥
  • ऋद्धि-सिद्धि तव चंवर सुधारे ।
  • मुषक वाहन सोहत द्वारे ॥
  • कहौ जन्म शुभ कथा तुम्हारी ।
  • अति शुची पावन मंगलकारी ॥
  • एक समय गिरिराज कुमारी ।
  • पुत्र हेतु तप कीन्हा भारी ॥ 10 ॥

Ganesha Chalisa का पाठ घर के वातावरण को शांत और पवित्र बनाता है

  • भयो यज्ञ जब पूर्ण अनूपा ।
  • तब पहुंच्यो तुम धरी द्विज रूपा ॥
  • अतिथि जानी के गौरी सुखारी ।
  • बहुविधि सेवा करी तुम्हारी ॥
  • अति प्रसन्न हवै तुम वर दीन्हा ।
  • मातु पुत्र हित जो तप कीन्हा ॥
  • मिलहि पुत्र तुहि, बुद्धि विशाला ।
  • बिना गर्भ धारण यहि काला ॥
  • गणनायक गुण ज्ञान निधाना ।
  • पूजित प्रथम रूप भगवाना ॥
  • अस कही अन्तर्धान रूप हवै ।
  • पालना पर बालक स्वरूप हवै ॥
  • बनि शिशु रुदन जबहिं तुम ठाना ।
  • लखि मुख सुख नहिं गौरी समाना ॥
  • सकल मगन, सुखमंगल गावहिं ।
  • नाभ ते सुरन, सुमन वर्षावहिं ॥
  • शम्भु, उमा, बहुदान लुटावहिं ।
  • सुर मुनिजन, सुत देखन आवहिं ॥
  • लखि अति आनन्द मंगल साजा ।
  • देखन भी आये शनि राजा ॥ 20 ॥
  • निज अवगुण गुनि शनि मन माहीं ।
  • बालक, देखन चाहत नाहीं ॥
  • गिरिजा कछु मन भेद बढायो ।
  • उत्सव मोर, न शनि तुही भायो ॥
  • कहत लगे शनि, मन सकुचाई ।
  • का करिहौ, शिशु मोहि दिखाई ॥
  • नहिं विश्वास, उमा उर भयऊ ।
  • शनि सों बालक देखन कहयऊ ॥
  • पदतहिं शनि दृग कोण प्रकाशा ।
  • बालक सिर उड़ि गयो अकाशा ॥

भगवान गणेश को बुद्धि और ज्ञान का प्रतीक माना जाता है

  • गिरिजा गिरी विकल हवै धरणी ।
  • सो दुःख दशा गयो नहीं वरणी ॥
  • हाहाकार मच्यौ कैलाशा ।
  • शनि कीन्हों लखि सुत को नाशा ॥
  • तुरत गरुड़ चढ़ि विष्णु सिधायो ।
  • काटी चक्र सो गज सिर लाये ॥
  • बालक के धड़ ऊपर धारयो ।
  • प्राण मन्त्र पढ़ि शंकर डारयो ॥
  • नाम गणेश शम्भु तब कीन्हे ।
  • प्रथम पूज्य बुद्धि निधि, वर दीन्हे ॥ 30 ॥
  • बुद्धि परीक्षा जब शिव कीन्हा ।
  • पृथ्वी कर प्रदक्षिणा लीन्हा ॥
  • चले षडानन, भरमि भुलाई ।
  • रचे बैठ तुम बुद्धि उपाई ॥
  • चरण मातु-पितु के धर लीन्हें ।
  • तिनके सात प्रदक्षिण कीन्हें ॥
  • धनि गणेश कही शिव हिये हरषे ।
  • नभ ते सुरन सुमन बहु बरसे ॥
  • तुम्हरी महिमा बुद्धि बड़ाई ।
  • शेष सहसमुख सके न गाई ॥
  • मैं मतिहीन मलीन दुखारी ।
  • करहूं कौन विधि विनय तुम्हारी ॥
  • भजत रामसुन्दर प्रभुदासा ।
  • जग प्रयाग, ककरा, दुर्वासा ॥
Ganesha Chalisa
  • अब प्रभु दया दीना पर कीजै ।
  • अपनी शक्ति भक्ति कुछ दीजै ॥ 38 ॥
  • ॥ दोहा ॥
  • श्री गणेश यह चालीसा,
  • पाठ करै कर ध्यान ।
  • नित नव मंगल गृह बसै,
  • लहे जगत सन्मान ॥
  • सम्बन्ध अपने सहस्त्र दश,
  • ऋषि पंचमी दिनेश ।
  • पूरण चालीसा भयो,
  • मंगल मूर्ती गणेश ॥

गणेश चालीसा के पाठ की विधि (Ganesha Chalisa Puja Vidhi)

  • भगवान गणेश की मूर्ति या चित्र के सामने दीपक और धूप जलाएं।
  • लाल फूल और दूर्वा चढ़ाएं।
  • "ॐ गण गणपतये नमः" मंत्र से गणेश जी का ध्यान करें।
  • भावपूर्वक गणेश चालीसा का पाठ करें।
  • अंत में आरती करें और प्रसाद चढ़ाएं।

गणेश चालीसा पाठ करने के नियम (Ganesha Chalisa ke Niyam)

  • पाठ से पहले स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें।
  • दीपक जलाकर, लाल फूल, दूर्वा और मोदक अर्पित करें।
  • प्रतिदिन या कम से कम बुधवार और चतुर्थी को चालीसा का पाठ करें।
  • गणेश जी का ध्यान कर शांत मन से चालीसा पढ़ें।
  • पाठ केवल शब्दों का उच्चारण न हो, बल्कि भक्ति और विश्वास से करें।

DISCLAIMER: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। वनइंडिया लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है।

गणेश चालीसा के पाठ से क्या लाभ होते हैं?
  • यह चालीसा बुद्धि, विवेक और स्मरण शक्ति को प्रखर बनाती है।
  • आर्थिक समस्या से जूझ रहे व्यक्ति को स्थिरता और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।
  • गृहकलह और पारिवारिक बाधाएँ भी धीरे-धीरे दूर हो जाती हैं।
  • नौकरी, व्यापार और पढ़ाई से जुड़े मामलों में भी सकारात्मक परिणाम प्राप्त होते हैं।
गणेश चालीसा मन को शांति देते हैं?

गणेश चालीसा केवल एक स्तुति नहीं है, बल्कि यह जीवन में ऊर्जा और सकारात्मकता का स्रोत है, जो मन को शांति देता है।

अशुद्ध अवस्था में पाठ का क्या अर्थ है?

इसका अर्थ ये है कि गुस्से, चिंता या अपवित्र मन से चालीसा का पाठ करने से फल नहीं मिलता। भोजन या नशे के तुरंत बाद पाठ न करें।

गणेश चालीसा पाठ का सर्वोत्तम समय क्या है?

प्रातःकाल स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र पहनकर शांत वातावरण में बैठकर गणेश चालीसा का पाठ करना अत्यंत लाभकारी होता है।

किन लोगों को गणेश चालीसा का पाठ रोज करना चाहिए?

जो लोग नौकरी या जीवन में सफलता चाहते हैं उन्हें ये चालीसा रोज करनी चाहिए। ये व्यवसाय और करियर में सफलता दिलाती है।

गणेश चालीसा का नियमित पाठ करने से क्या लाभ होता है?

गणेश चालीसा का नियमित पाठ करने से जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं। ये आत्मविश्वास बढ़ाती है।

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+