Ganesh Chaturthi 2020: जानिए गणेश चतुर्थी पर क्यों नहीं देखा जाता है चांद?
नई दिल्ली। चतुर्थी तिथि पर भगवान श्रीगणेश की पूजा की जाती है और उनसे सुख-समृद्धि का आशीर्वाद लिया जाता है, लेकिन एक चतुर्थी ऐसी भी आती है, जिस पर यदि आपने चंद्रमा को गलती से भी देख लिया तो आप पर कोई झूठा आरोप या कलंक लग सकता है। यह चतुर्थी आती है भाद्रपद माह के शुक्लपक्ष की चतुर्थी। इस दिन घर-घर में भगवान श्रीगणेश की पार्थिव मूर्ति की स्थापना की जाती है फिर दस दिनों तक गणेशोत्सव मनाया जाता है। यह दिन भगवान गणेश के जन्म का दिन होता है। इस बार यह चतुर्थी आ रही है 22 अगस्त 2020 शनिवार को। इस चतुर्थी को कलंक चतुर्थी, कलंक चौथ और पत्थर चौथ भी कहा जाता है। इस चतुर्थी पर चंद्रमा देखने पर पाप क्यों लगता है, झूठा आरोप क्यों लगता है और यदि आपने भूलवश चंद्रमा देख लिया है तो उस दोष के निवारण के लिए क्या करना चाहिए।
आइए जानते हैं...

गणेश जी ने दिया था चंद्रमा को श्राप
पुराण कथाओं के अनुसार एक बार भगवान गणेश बैठकर प्रेमपूर्वक अपने प्रिय मोदक का सेवन कर रहे थे। उनके चारों ओर मोदक और लड्डुओं के थाल भरे हुए रखे थे। वे लड्डु और मोदक खाने में मस्त थे, तभी वहां चंद्रदेव आए और गणेशजी को लड्डु खाते देखा। चंद्र ने गणेश जी की सूंड और उनके मोटे पेट का उपहास उड़ाना शुरू कर दिया। गणेशजी को देखकर चंद्र देव जोर-जोर से हंसने लगे। इस पर गणेशजी को बहुत जोर से क्रोध आया। उन्होंने चंद्रमा को कहा कि तुम्हें अपने सुंदर स्वरूप पर बहुत घमंड है। तुम मेरा उपहास उड़ा रहे हो। मैं तुम्हें श्राप देता हूं कि तुम अपना यह सुंदर स्वरूप खो दोगे, तुम्हारी सारी कलाएं नष्ट हो जाएंगी और आज के दिन जो भी तुम्हारा दर्शन करेगा वह भी कलंकित हो जाएगा। यह दिन भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी का दिन था। इस पर चंद्र देव को अपनी भूल का आभास हुआ और वे गणेश जी से क्षमा याचना करने लगे। गणेशजी ने कहा कि मैं अब तुम्हें इस श्राप से मुक्त तो नहीं कर सकता लेकिन इसे सीमित अवश्य कर सकता हूं। चंद्र देव की याचना पर गणेशजी ने उन्हें माह के 15 दिन कलाएं घटने और 15 दिन कलाएं बढ़ने का वर दिया।
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दोष मुक्त होने के लिए इस मंत्र का जाप करें
यदि भूल से किसी ने चौथ के चंद्रमा का दर्शन कर लिया है तो उसे श्रीमद्भागवत पुराण के 10वें स्कंध के 56-57वें अध्याय में वर्णित स्यमंतक मणि की चोरी की कथा का श्रद्धापूर्वक श्रवण या पठन करना चाहिए। इसके अलावा भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया और पंचमी तिथि के चंद्रमा का दर्शन करने से भी चौथ के चंद्रमा के दर्शन के दोष से मुक्ति मिल जाती है।
इस मंत्र का जाप भी अवश्य करना चाहिए...
सिंह: प्रसेनमवधीत्सिंहो जाम्बवता हत:
सुकुमारक मारोदीस्तव ह्येष स्यमंतकर:।।

भगवान कृष्ण भी नहीं बच पाए थे मिथ्या आरोप से
भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी का चंद्रमा देख लेने के कारण भगवान कृष्ण पर स्यमंतक मणि चुराने का झूठा आरोप लगा था। यह स्यमंतक मणि भगवान सूर्य द्वारा प्रदान की गई थी और प्रतिदिन आठ भार सोना प्रदान करती थी। इसे चुराने का आरोप श्रीकृष्ण पर लगा था।

पत्थर फेंकने की है परंपरा
भारतीय जनमानस में कलंक चतुर्थी को लेकर अनेक कथाएं और परंपराएं प्रचलित हैं। मध्यप्रदेश के मालवा-निमाड़ के ग्रामीण अंचलों और राजस्थान में कलंक चतुर्थी के दिन पत्थर फेंकने की परंपरा है। मान्यता है जो व्यक्ति भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि के दिन चंद्रमा का दर्शन कर लेता है, वह यदि पांच पत्थर किसी दूसरे मनुष्य के घर की छत पर फेंके तो दोष मुक्त हो सकता है। स्थानीय भाषा में इसे दगड़ा चौथ भी कहते हैं। मालवा-निमाड़ में दगड़ा का अर्थ होता है पत्थर।












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