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Ganesh Chaturthi 2019: इस बार घर ले आएं इको-फ्रेंडली गणपति, होगा ये खास असर

नई दिल्ली। दो सितंबर को गणेश चतुर्थी है, जिसके लिए पूरे देश में जोर-शोर से तैयारी चल रही है। बुद्धि, ज्ञान और विघ्न विनाशक के रूप में पूजे जाने वाले भगवान गणेश के स्वागत के लिए इस समय उनके भक्त पूरी तरह से तैयार हैं। दो सितंबर को ही लोग भगवान गणेश की मूर्ति स्थापति करके अगले 10 दिन तक गणेश उत्सव मनाएंगे। इस बार लोगों में इको फ्रेंडली गणपति का काफी क्रेज देखने को मिल रहा है। जिस तरह से पर्यावरण प्रदूषण के मामले सामने आ रहे हैं, उसको ध्यान में रखते हुए ये माना जाता है कि इको फ्रेंडली गणपति काफी अच्छे होते हैं। आइये जानते हैं इको-फ्रेंडली गणपति की मांग क्यों बढ़ रही है और इसका क्या असर होगा?

क्यों जरूरी हैं इको फ्रेंडली प्रतिमा

क्यों जरूरी हैं इको फ्रेंडली प्रतिमा

गणेशोत्सव के मौके पर बाजार में गणपति की कई तरह की मूर्तियां उपलब्ध रहती हैं। इनमें प्लास्टिक ऑफ पेरिस (पीओपी) की बनी मूर्तियां देखने में बेहद सुंदर नजर आती हैं। हालांकि अगर पर्यावरण के लिहाज से देखें तो ये काफी हानिकारक होती हैं। पीओपी और प्लास्टिक से बनी प्रतिमाओं में खतरनाक रसायनिक रंगों का इस्‍तेमाल किया जाता है। जिनसे केवल स्‍वास्‍थ्‍य पर ही नहीं बल्कि पर्यावरण पर भी काफी प्रभाव डालते हैं।

पर्यावरण को होगा फायदा

पर्यावरण को होगा फायदा

पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए पिछले कुछ साल में इको-फ्रेंडली गणेश प्रतिमाओं का चलन बढ़ गया है। इको फ्रेंडली प्रतिमा उन पदार्थों से बनी होती हैं जिनका पर्यावरण पर कोई गलत प्रभाव नहीं पड़े। जैसे मिट्टी से बनी प्रतिमाएं पानी में जल्दी घुल जाती हैं। इको फ्रेंडली गणपति को सुंदर बनाने के लिए इसमें कच्चे और प्राकृतिक रंगों का इस्तेमाल किया जाता है जो कि नुकसान नहीं पहुंचाते। ऐसे में ना तो पानी ही दूषित होता है और ना ही कोई बीमारियां फैलने का डर रहता है।

गणपति की पूजा विधि

गणपति की पूजा विधि

भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को सुबह जल्दी उठकर स्नानादि से निवृत्त होना चाहिए। इसके बाद गणपति की विधि विधान के अनुसार शुभ मुहूर्त में उनकी स्थापना करनी चाहिए। गणपति को मोदक अत्यंत प्रिय हैं अतः पूजा के समय मोदकों का भोग लगाया जाना चाहिए। इसी तरह गणेश जी को दूर्वा भी बहुत पसंद है अतः पूजा में हरी दूर्वा अवश्य रखना चाहिए। पूजा के बाद मोदक ब्राह्मणों को दान दें और स्वयं परिवार सहित ग्रहण करें। इस प्रकार विधि विधान से पूरे 10 दिन तक गणपति जी की पूजा के साथ उनके जन्म का उत्सव मनाया जाता है। ऐसा करने वाले भक्तों पर विघ्नहर्ता की पूर्ण कृपा बरसती है।

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