Angarki Chaturthi Sawan 2021: जानिए अंगार की संकष्टी चतुर्थी का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और कथा

नई दिल्ली, 26 जुलाई। मंगलवार को 'संकष्टी चतुर्थी' है, ऐसा कहा जाता है कि मंगल के दिन अगर चतुर्थी पड़े तो वो 'अंगार की चतुर्थी' कहते हैं। इसे 'संकट हारा चतुर्थी' भी कहते हैं। नाम से ही स्पष्ट है कि इस व्रत को करने से भक्तों के सारे कष्टों का अंत हो जाता है। महाराष्ट्र और दक्षिण भारत में इस पर्व को काफी बड़े स्तर पर बनाया जाता है। इस व्रत में लोग पूरे दिन उपवास रखते हैं और उसके बाद चंद्रमा को अर्ध्य देने के बाद अपना उपवास खोलते हैं।

 जानिए अंगार की संकष्टी चतुर्थी का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

मुहूर्त

27 जुलाई को शाम 03 बजकर 54 मिनट से शुरू हो कर 28 जुलाई दोपहर 02 बजकर 16 मिनट तक रहेगा।

पूजा विधि

  • व्रत नित्य कर्मों से निवृत्त होकर साफ-सुथरे धुले हुए वस्त्र धारण करें।
  • ये व्रत सुबह से लेकर शाम तक रखा जाता है।
  • कुछ लोग बिना पानी के भी व्रत रखते हैं।
  • मुहूर्त काल में पूजा करनी चाहिए।
  • पूजा के दौरान 'ॐ सिद्ध बुद्धि सहित महागणपति आपको नमस्कार है' करते हुए पूजा शुरू करनी चाहिए।
  • फिर गणेश भगवान की पूजा सच्चे मन से करनी चाहिए।
  • व्रतधारी संकष्टी गणेश चतुर्थी की कथा पढ़े अथवा सुनें और सुनाएं।
  • तत्पश्चात गणेशजी की आरती करें और क्षमायाचना के बाद पूजा समाप्त करें।
  • उसके बाद चांद का दर्शन करें और उसे अर्ध्य दें और इसके बाद अपना व्रत खोलें।

खास बात

ऋषि भारद्वाज के पुत्र अंगारक एक महान ऋषि और भगवान गणेश के भक्त थे। उन्होंने भगवान गणेश की पूजा करके उनसे आशीर्वाद मांगा। माघ कृष्ण चतुर्थी के दिन भगवान गणेश ने उन्हें वरदान मांगने के लिए कहा। उन्होंने अपनी इच्छा जाहिर करते हुए कहा कि वो चाहते हैं कि उनका नाम हमेशा के लिए भगवान गणेश से जुड़ जाए। इसके बाद से हर मंगलवार को होने वाली चतुर्थी को 'अंगार की चतुर्थी' के नाम जाना जाने लगा।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+