Eid al Fitr: रमजान के बाद किस दिन कहेंगे ईद मुबारक, जानिए त्योहार की अहमियत और इतिहास
इस्लाम धर्मावलंबियों के लिए रमजान का महीना बेहद खास है। रोजे रखने वाले लोग ईद की तैयारियों में जुटे हैं। 30 रोजे के बाद Eid al Fitr का त्योहार मनाया जाता है। इस साल ईद उल फितर कितनी तारीख को है। ये जानना जरूरी है।

Eid al Fitr Ramadan के महीने में 30 रोजे रखने के बाद मनाया जाने वाला त्योहार है। ईद चांद दिखने के आधार पर सेलिब्रेट किया जाने वाला फेस्टिवल है। Eid भारत में कब और किस तारीख को मनाई जाएगी, इस कमाल के त्यौहार की क्या महत्ता है?
इस्लाम धर्मावलंबियों त्योहार का इतिहास क्या है? इस साल कौन सी तारीख को ईद मनाई जाएगी? इन सवालों के जवाब जानिए। ईद जैसे त्योहार का समय, इतिहास, महत्व, आप सभी को पता होना चाहिए।
ईद उल फितर 2023 का पाकिस्तान में ऐलान हो गया है। ऐसे में अब भारत में भी लोग जानना चाहते हैं कि ईद कब मनाई जाएगी। रमजान इस्लामी कैलेंडर का नौवां महीना है। ये इस्लाम में सबसे पवित्र महीना माना जाता है।

रमजान के महीने में मुसलमान रोजा रखते हैं और अल्लाह की इबादत करते हैं। दिल्ली की जामा मस्जिद में बड़ी संख्या में लोग आते हैं। भारत में ईद उल फितर 2023 की तारीख 21 अप्रैल से 22 अप्रैल की शाम के दौरान मनाई जा सकती है।
ईद की तारीख का ऐलान चांद दिखने के बाद ही होगा। दरअसल, इस्लाम हिजरी कैलेंडर का पालन करता है, इसलिए इस्लामी छुट्टियों की तिथियां ग्रेगोरियन कैलेंडर में हर साल बदलती हैं।
हिजरी कैलेंडर पूरी तरह से चंद्र कैलेंडर है जो अनुमान लगाता है कि चंद्रमा को प्रत्येक चरण को पूरा करने में कितना समय लगता है। नए क्रिसेंट मून (new crescent moon) को देखना इस्लामी महीने की शुरुआत का प्रतीक है।

त्योहार की तारीख बदलने का कारण
हिजरी कैलेंडर के अनुसार त्योहारों की तारीखें तय होती हैं। एक चंद्र वर्ष में 12 महीने होते हैं लेकिन मोटे तौर पर केवल 354 दिन होते हैं। जो एक सौर वर्ष से लगभग 11 दिन कम है। नतीजतन, हर साल इस्लामी छुट्टियों की तारीख 10-11 दिन आगे बढ़ जाती है।
ईद अल-फितर इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार 10वें महीने के पहले दिन मनाई जाती है। हिजरी कैलेंडर में इस महीने का नाम शव्वाल है। महिलाएं-बच्चे- बूढ़े नए कपड़े पहनते हैं। पुरुष नमाज के लिए मस्जिदों में इकट्ठा होते हैं।
ईद के दिन उपहारों का आदान-प्रदान भी होता है। मस्जिदों में नमाज अदा के अलावा रिश्तेदारों की कब्रों पर भी कुरान की आयतें पढ़ी जाती हैं। लोग परिवारिक भोजन के लिए इकट्ठा होते हैं। एक दूसरे को "ईद मुबारक" कहा जाता है।

घरों में मीठे व्यंजन बनाए जाते हैं और संपन्न परिवारों की तरफ से बच्चों के साथ-साथ जरूरतमंद और गरीब बच्चों को उपहार और नए कपड़े दिए जाते हैं। बड़ों की तरफ से बच्चों को ईदी दी जाती है।
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ईद उल फितर का महत्व
दुनिया भर में इस्लाम धर्मावलंबी अवकाश मनाते हैं क्योंकि रमजान के महीने भर के रोजे (30 दिनों का) के बाद रमजान का महीना समाप्त होता है। इस्लामिक धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रमजान के महीने के दौरान पवित्र कुरान पहली बार पैगंबर मुहम्मद के सामने आया था।

पैगंबर ने की शुरुआत
इस्लाम और कुरान पर आस्था रखने वाले लोगों की मान्यता है कि बद्र की लड़ाई में जीत का जश्न मनाने के लिए 624 CE में पैगंबर मुहम्मद (PBUH) ने ईद के त्योहार की शुरुआत की थी।













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