Dussehera 2017:जानिए रावण के 10 सिर की कहानी

नई दिल्ली। दशहरे के मौके पर आपने अक्‍सर भगवान राम और रावण के बारे में कई रोचक किस्‍से और कहानियां सुनी होंगी। लेकिन इस मौके पर आपने कभी रामायण से जुड़े किस्‍सों या फिर तथ्‍यों के बारे में जानने की कोशिश की है। वाल्मिकी की रामायण में रावण के दस सिर की रोचक कहानी बताई गई है।

रावण भगवान शिव का बहुत बड़ा भक्‍त था और उन्‍हें प्रसन्‍न करने के लिए उसने अपने सिर की बलि दे दी थी। उसने 10 बार ऐसा किया और फिर भगवान शिव ने प्रसन्‍न होकर 10 सिरों को लौटा दिया। वाल्मिकी की रामायण में जहां रावण को एक असाधारण दानव बताया है तो वहीं गोस्‍वामी तुलसीदास ने रामचरित मानस में उसे बड़ा शिवभक्त का दर्जा दिया है।

लक्ष्‍मण ने भगवान राम और सीता की सुरक्षा के लिए 14 वर्षों तक नींद का त्‍याग कर दिया था। 14 वर्षों के वनवास में वह एक भी दिन नहीं सोए थे। लक्ष्‍मण ने युद्ध के समय लक्ष्‍मण ने रावण के तीन बेटों मेघनाद, प्रहस्‍त और अतिके का वध किया था लेकिन जिक्र हमेशा मेघनाद का सबसे ज्‍यादा होता है।

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