Devshayani Ekadashi 2025: देवशयनी एकादशी पर भूलकर भी ना करें ये काम वरना होगा नुकसान, पढ़ें कथा
Devshayani Ekadashi 2025: हिंदू पंचांग के अनुसार आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवशयनी एकादशी का व्रत आता है, आज के दिन से श्री हरि पूरे चार महीने के लिए योगनिद्रा में चले जाते हैं, जिसे 'चातुर्मास' कहा जाता है। इन चार महीने में कोई भी मांगलिक काम जैसे विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्य नहीं किए जाते।
माना जाता है कि जो कोई भी इस व्रत को करता है उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है और पापों से मुक्ति मिलती है, इसे साधना, तपस्या और संयम का काल माना जाता है।

देवशयनी एकादशी कथा ( Devshayani Ekadashi 2025)
पुराणों के अनुसार, एक बार राजा हरिशचंद्र बहुत दुखी और कष्टों से घिरे हुए थे। उन्होंने ऋषि गौतम से सलाह ली, तब ऋषि ने उन्हें देवशयनी एकादशी का व्रत रखने की सलाह दी। राजा ने विधिपूर्वक व्रत रखा और फलस्वरूप उनका जीवन सुखमय हो गया।
राजा मांधाता को ब्रह्मा जी ने बताया था व्रत का महत्व
एक अन्य कथा के अनुसार, सतयुग में एक बार ब्रह्मा ने इस व्रत के महत्व को राजा मांधाता को बताया था। उन्होंने कहा कि इस व्रत को करने से मनुष्य के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और स्वर्ग की प्राप्ति होती है।
Devshayani Ekadashi 2025 पर क्या करें? (Do's)
- विष्णु भगवान का व्रत एवं पूजन करें।
- तुलसी पत्र से भगवान की पूजा करें।
- मन, वाणी और शरीर से शुद्ध रहें।
- भगवद्गीता, विष्णु सहस्रनाम या विष्णु पुराण का पाठ करें।
Devshayani Ekadashi 2025 पर क्या ना करें? (Don'ts)
- इस दिन चावल, मसूर की दाल, बैंगन, मांसाहार, लहसुन-प्याज का सेवन न करें।
- झूठ बोलना, क्रोध करना या हिंसा करना वर्जित है।
- बिस्तर पर सोने की बजाय जमीन पर सोना शुभ माना जाता है।
- जितना संभव हो, दान-दक्षिणा करें।
- ब्रह्मचर्य का पालन करें।
Disclaimer: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। वनइंडिया लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है इसलिए किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले कृपया किसी जानकार ज्योतिष या पंडित की राय जरूर लें।












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