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Amarnath Yatra 2025: किसी मुस्लिम ने खोजी थी अमरनाथ गुफा? क्या है दो कबूतरों का रहस्य?

Amarnath Yatra 2025 Hindi: देश की बहुप्रतिक्षित अमरनाथ यात्रा की शुरुआत आज से हो गई है,श्रद्धालुओं को पहला जत्था दर्शन के लिए पहलगाम पहुंच भी चुका है। आपको बता दें कि 38 दिनों तक चलने वाली ये यात्रा काफी कठिन होती है, माना जाता है कि जो भी पवित्र अमरनाथ गुफा के दर्शन करता है, उसके सारे कष्टों का अंत होता है और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है।

अमरनाथ गुफा की खोज (Amarnath Yatra 2025)

गौरतलब है कि इस गुफा को खोजने वाला एक मुस्लिम चरवाहा था, जिसका नाम था बुटा मलिक। मान्यता के अनुसार लगभग 300 से 500 साल पहले (कुछ कथाओं में 1850 के आसपास) बुटा मलिक ने ही बाबा बर्फानी वाली गुफा खोजी थी।

Amarnath Yatra 2025

कहते हैं कि एक दिन जब वो अपने काम पर निकले थे तो उनकी मुलाकात एक एक साधु से हुई थी, उन्होंने बूटा को एक कोयले से भरा हुआ थैला दिया था।

'कोयले की जगह सोना निकला' (Amarnath Yatra 2025)

जब वह अपने घर पहुंचा और थैला खोला तो उसमें कोयले की जगह सोना था। बुटा मलिक उस साधु की तलाश में वापस उस मार्ग पर लौटा जहां उसे वो साधु मिले थे लेकिन उसे वह साधु तो कहीं नहीं मिले, बल्कि अमरनाथ की पवित्र गुफा मिली, जिसमें बर्फ से बना शिवलिंग था। उसकी खोज के बाद से ही यह गुफा तीर्थ यात्रा का प्रमुख केंद्र बन गई।

क्या है दो कबूतरों का सच? (Amarnath Yatra 2025)

हिंदू धर्म की मान्यता के अनुसार, भगवान शिव ने मां पार्वती को अमरता का पाठ पढ़ाने के लिए एक शांत गुफा चुनी थी, जो कि अमरनाथ गुफा थी। शिव भगवान नहीं चाहते थे कि माता पार्वती के अलावा कोई और इस कथा को सुने इसलिए गुफा तक पहुंचते-पहुंचते उन्होंने आभूषण, नंदी बैल सभी को छोड़ दिया था लेकिन इस कथा को जब वो मां को सुना रहे होते हैं तो माता की आंख लग जाती है लेकिन शिव जी अपनी कथा सुनाते रहते हैं।

दो कबूतरों ने सुना अमरत्व का ज्ञान

जब उनकी कथा खत्म होती है तो वो देखते हैं कि पार्वती जी तो सो गईं लेकिन वहां मौजूद दो कबूतरों ने उनकी पूरी कथा सुन ली। अब वो दोनो अमरत्व की कहानी सुन चुके थे इसलिए कहा जाता है कि वो दोनों आज भी जीवित हैं और उसी गुफा में मौजूद हैं।

बाबा बर्फानी की विशेषता (Amarnath Yatra 2025)

  • अमरनाथ गुफा में हर वर्ष प्राकृतिक रूप से बर्फ का शिवलिंग बनता है, जो स्वयं भगवान शिव का प्रतीक माना जाता है इसे ही बाबा बर्फानी कहते हैं।
  • यह श्रावण मास (जुलाई-अगस्त) में पूर्ण आकार लेता है।
  • चंद्रमा के घटने-बढ़ने के साथ इसका आकार भी बदलता है।
  • इसे "स्वयंभू शिवलिंग" माना जाता है ।

अमरनाथ यात्रा का धार्मिक महत्व (Amarnath Yatra 2025)

  • यह यात्रा चार धामों जैसी ही पवित्र मानी जाती है।
  • हर साल लाखों श्रद्धालु कठिन ट्रैकिंग के बावजूद भगवान शिव के दर्शन के लिए यहां आते हैं।
  • यात्रा के दौरान पवित्र छड़ी (छड़ी मुबारक) की शोभायात्रा भी निकाली जाती है।

Disclaimer: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। वनइंडिया लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है इसलिए किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले कृपया किसी जानकार ज्योतिष या पंडित की राय जरूर लें।

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