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Shardiya Navratri 2025: नौ दिन मां दुर्गा को लगाएं ये अलग-अलग भोग, खुल जाएगी किस्मत, यहां देखें List

Shardiya Navratri 2025 Bhog: चैत्र नवरात्रि का आज पहला दिन है, इस बार तृतिया तिथि के छय होने की वजह से नवरात्रि पूरे आठ दिन की है। नवरात्रि में मां के नौ रूपों की पूजा होती है। मां का हर रूप एक अलौकिक शक्ति का पर्याय है।

अगर मां के नौ रूपों को उनके रूप के हिसाब से ही अलग-अलग भोग लगाया जाए तो मां बहुत प्रसन्न होती हैं और अपने दोनों हाथों से भक्तों पर प्रेम लुटाती हैं।

Chaitra Navratri 2025

आइए जानते हैं कि मां को नौ रूपों को किस तरह का भोग लगाया जाए (Shardiya Navratri 2025 Bhog)

  • प्रथम रूप- मां शैलपुत्री - सफेद रंग का भोग जैसे पेड़ा-दही या खीर
  • दूसरा रूप- मां ब्रह्मचारिणी- फल-फूल का भोग लगाएं
  • तीसरा रूप- मां चंद्रघंटा- पुआ, पुड़ी
  • चौथा रूप- मां कुष्मांडा- दही, दूध या मेवा
  • पांचवां रूप- मां स्कंदमाता- खट्टे फल, दूध, मेवा

मां दुर्गा का हर रूप बेहद ही सौम्य और मोहक है (Shardiya Navratri 2025 Bhog)

  • छठां रूप- मां कात्यायनी- शहद, मेवा या लड्डू
  • सातवां रूप- मां कालरात्रि- गुड़, नारियल या मेवा
  • आठवां रूप- मां महागौरी -नारियल, पुड़ी, चना
  • नवां रूप- मां सिद्धिदात्री -बर्फी, हलवा, पुड़ी चना

नवरात्रि में हर रोज दुर्गा चालीसा का पाठ करना चाहिए, जो ऐसा करता है, उस पर मां की कृपा हमेशा के लिए बनी रहती है और उसके सारे कष्टों का अंत हो जाता है।

दुर्गा चालीसा - Durga Chalisa

  • रूप सरस्वती को तुम धारा।
  • दे सुबुद्धि ऋषि मुनिन उबारा॥
  • .धरयो रूप नरसिंह को अम्बा।
  • परगट भई फाड़कर खम्बा॥
  • .रक्षा करि प्रह्लाद बचायो।
  • हिरण्याक्ष को स्वर्ग पठायो॥
  • .लक्ष्मी रूप धरो जग माहीं।
  • श्री नारायण अंग समाहीं॥
  • .क्षीरसिन्धु में करत विलासा।
  • दयासिन्धु दीजै मन आसा॥
  • .हिंगलाज में तुम्हीं भवानी।
  • महिमा अमित न जात बखानी॥
  • .मातंगी अरु धूमावति माता।
  • भुवनेश्वरी बगला सुख दाता॥
  • .श्री भैरव तारा जग तारिणी।
  • छिन्न भाल भव दुःख निवारिणी॥
  • .केहरि वाहन सोह भवानी।
  • लांगुर वीर चलत अगवानी॥
  • .कर में खप्पर खड्ग विराजै।
  • जाको देख काल डर भाजै॥
  • .सोहै अस्त्र और त्रिशूला।
  • जाते उठत शत्रु हिय शूला॥
  • .नगरकोट में तुम्हीं विराजत।
  • तिहुँलोक में डंका बाजत॥
  • .शुम्भ निशुम्भ दानव तुम मारे।
  • रक्तन बीज शंखन संहारे॥
  • .महिषासुर नृप अति अभिमानी।
  • जेहि अघ भार मही अकुलानी॥
  • .रूप कराल कालिका धारा।
  • सेन सहित तुम तिहि संहारा॥
  • .परी गाढ़ सन्तन पर जब जब।
  • भई सहाय मातु तुम तब तब॥
  • .आभा पुरी अरु बासव लोका।
  • तब महिमा सब रहें अशोका॥
  • .ज्वाला में है ज्योति तुम्हारी।
  • तुम्हें सदा पूजें नर-नारी॥
  • .प्रेम भक्ति से जो यश गावें।
  • दुःख दारिद्र निकट नहिं आवें॥
  • .ध्यावे तुम्हें जो नर मन लाई।
  • जन्म-मरण ताकौ छुटि जाई॥
  • .जोगी सुर मुनि कहत पुकारी।
  • योग न हो बिन शक्ति तुम्हारी॥
  • .शंकर आचारज तप कीनो।
  • काम क्रोध जीति सब लीनो॥
  • .निशिदिन ध्यान धरो शंकर को।
  • काहु काल नहिं सुमिरो तुमको॥
  • .शक्ति रूप का मरम न पायो।
  • शक्ति गई तब मन पछितायो॥
  • .शरणागत हुई कीर्ति बखानी।
  • जय जय जय जगदम्ब भवानी॥
  • .भई प्रसन्न आदि जगदम्बा।
  • दई शक्ति नहिं कीन विलम्बा॥
  • .मोको मातु कष्ट अति घेरो।
  • तुम बिन कौन हरै दुःख मेरो॥
  • .आशा तृष्णा निपट सतावें।
  • रिपु मुरख मोही डरपावे॥
  • .शत्रु नाश कीजै महारानी।
  • सुमिरौं इकचित तुम्हें भवानी॥
  • .करो कृपा हे मातु दयाला।
  • ऋद्धि-सिद्धि दै करहु निहाला।।
  • .जब लगि जियऊं दया फल पाऊं।
  • तुम्हरो यश मैं सदा सुनाऊं॥
  • .श्री दुर्गा चालीसा जो कोई गावै।
  • सब सुख भोग परमपद पावै॥
  • .देवीदास शरण निज जानी।
  • करहु कृपा जगदम्ब भवानी॥
  • .॥इति श्रीदुर्गा चालीसा सम्पूर्ण॥

DISCLAIMER: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। वनइंडिया लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी बात को अमल में लाने से पहले किसी पंडित या ज्योतिषी से जरूर बात करें।

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