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होली स्पेशल: इतनी रंग बिरंगी दुनिया, दो आँखों में कैसे आये...

By डॉ.कुमार विश्वास
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इतनी रंग बिरंगी दुनिया, दो आँखों में कैसे आये,

हमसे पूछो इतने अनुभव, एक कंठ से कैसे गाये.

ऐसे उजले लोग मिले जो, अंदर से बेहद काले थे,

ऐसे चतुर मिले जो मन से सहज सरल भोले-भाले थे.

Beautiful Poem on Holi Wriiten by The great Poet Dr. Kumar Vishwas

ऐसे धनी मिले जो, कंगालो से भी ज्यादा रीते थे,

ऐसे मिले फकीर, जो, सोने के घट में पानी पीते थे.

मिले परायेपन से अपने, अपनेपन से मिले पराये,

हमसे पूछो इतने अनुभव, एक कंठ से कैसे गाये.

इतनी रंग बिरंगी दुनिया, दो आँखों में कैसे आये.

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English summary
Beautiful Poem on Holi Written by The great Poet Dr. Kumar Vishwas.
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