Batuk Bhairav Jayanti 2025 Kab Hai: आज है बटुक भैरव जयंती? जानिए पूजा विधि और महत्व

Batuk Bhairav Jayanti 2025 kab hai: प्रतिवर्ष ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि के दिन बटुक भैरव जयंती मनाई जाती है, आज ये पावन दिन आया हुआ है। बटुक भैरव जयंती हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण पर्व है, जो भगवान शिव के रौद्र रूप भगवान भैरव के बाल स्वरूप बटुक भैरव के जन्मोत्सव के रूप में मनाई जाती है।

बटुक भैरव को रक्षक देवता, तंत्रों के अधिपति तथा काशी के कोतवाल के रूप में पूजा जाता है। इस दिन भक्तगण विशेष रूप से व्रत, पूजा, तांत्रिक साधनाएं एवं भैरव स्तोत्रों का पाठ करते हैं। इस दिन बटुक भैरव का पूजन करने से समस्त रोग, शत्रु और तांत्रिक पीड़ाओं से मुक्ति मिलती है।

Batuk Bhairav Jayanti 2025 Kab Hai

बटुक भैरव का स्वरूप (Batuk Bhairav Jayanti 2025)

भगवान भैरव को शिव का एक उग्र और रक्षक रूप माना जाता है, जबकि बटुक भैरव उनके बाल स्वरूप हैं। इस रूप में वे बालक जैसे सरल, चंचल, लेकिन अत्यंत शक्तिशाली होते हैं। बटुक भैरव के स्वरूप को विशेष रूप से तंत्र साधना में महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। इन्हें तंत्र-मंत्र, भूत-प्रेत बाधा और नकारात्मक शक्तियों के नाशक के रूप में पूजा जाता है।

पौराणिक कथा (Batuk Bhairav Jayanti 2025)

पुराणों के अनुसार, एक बार ब्रह्मा जी ने भगवान शिव का अपमान किया, जिससे क्रोधित होकर शिव जी ने अपने क्रोध से भैरव को उत्पन्न किया। भैरव ने ब्रह्मा का अहंकार समाप्त कर दिया। बाद में, जब देवताओं और ऋषियों को राक्षसों से भय सताने लगा, तब उन्होंने भगवान शिव से रक्षा की याचना की। तब शिव ने एक बालक के रूप में बटुक भैरव को प्रकट किया, जिन्होंने समस्त असुरों का नाश कर दिया और देवताओं की रक्षा की।

बटुक भैरव जयंती का महत्व (Batuk Bhairav Jayanti 2025)

इस दिन को भगवान भैरव के अवतरण दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन व्रत और पूजा करने से जीवन के संकट, भय, रोग, शत्रु बाधा तथा तांत्रिक दोषों से मुक्ति मिलती है। साधक इस दिन तंत्र साधनाओं, भैरव कवच, बटुक भैरव स्तोत्र और काल भैरव अष्टक का पाठ करते हैं। यह दिन विशेष रूप से तांत्रिक साधकों के लिए अत्यंत फलदायक माना जाता है।

कैसे करें पूजा (Batuk Bhairav Jayanti 2025)

प्रात: स्नानादि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। फिर बटुक भैरव की मूर्ति या चित्र के समक्ष दीप, धूप, लाल फूल, नैवेद्य (खासकर दही-चूरा, लड्डू, इमरती) और मदिरा अर्पित की जाती है। काले कुत्ते को भोजन कराना, तेल चढ़ाना और हनुमान जी के साथ भैरव स्तुति करना भी अत्यंत शुभ माना जाता है। भक्त "ॐ बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरुकुरु बटुकाय नमः" मंत्र का जाप करें।

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