Bakrid 2025: किस बकरे की कुर्बानी बन सकती है कहर की वजह? खरीदने से पहले जान लें जरूरी बातें
Bakrid 2025 Bakra Selection Tips: ईद-उल-अजहा यानी बकरीद का त्योहार बस दरवाजे पर है। 6 या 7 जून 2025 को भारत से लेकर दुबई तक, हर जगह ये पर्व बड़े धूमधाम से मनाया जाएगा। ऐसे में बकरों की मंडियां भी पूरी तरह से सज चुकी हैं। हर कोई अपनी पसंद और बजट के हिसाब से बकरा खरीदने में जुटा है।
लेकिन, अब सवाल उठता है कि हजारों और लाखों कीमत के बकरे खरीदते वक्त किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिए? क्या सिर्फ महंगा या मोटा बकरा ही कुर्बानी के लायक होता है? कौन सा बकरा खरीदना सही है? किस बकरे की कुर्बानी बन सकती है कहर की वजह? आइए इन तमाम सवालों के जवाब जानें...

कुरान में कुर्बानी को लेकर क्या कहा गया?
'कुर्बानी' का मतलब होता है बलिदान। यह एक ऐसा काम है, जिसमें कोई व्यक्ति अपनी सबसे अजीज चीज को त्यागकर अपने ईश्वर के प्रति समर्पण व्यक्त करता है। इस्लाम के पवित्र ग्रन्थ कुरआन का 22 वां सूरा या अध्याय के 37वीं आयत में कहा गया है कि - 'अल्लाह तक न उनका बलि पहुंची है और न खून, बल्कि उसकी ओर तो तुम्हारा तकवा पहुंचता है!' यह आयत स्पष्ट करती है कि अल्लाह के निकट बलि या खून नहीं, बल्कि हमारी नीयत और भक्ति (तकवा) महत्त्वपूर्ण है।
अब बात करते हैं कुर्बानी के लिए बकरे के चयन पर...
इस्लामी शरीयत के अनुसार, कुछ विशेष नियमों और शर्तों का पालन करना आवश्यक होता है, ताकि आपकी कुर्बानी स्वीकार हो। अगर गलत बकरे की कुर्बानी दी गई तो, ऊपर वाले के सितम झेलने पड़ सकते हैं...
कुर्बानी के लिए बकरा चुनते समय ध्यान देने योग्य बातें
1-उम्र (Age) : बकरे की उम्र कम से कम 1 वर्ष होनी चाहिए। यदि बकरा एक वर्ष से कम आयु का है, तो उसकी कुर्बानी मान्य नहीं होती
2- स्वास्थ्य (Health): बकरा पूरी तरह से स्वस्थ होना चाहिए। उसमें कोई गंभीर बीमारी, कमजोरी, या शारीरिक दोष नहीं होना चाहिए। यदि बकरा बीमार, लंगड़ा, अंधा, या बहुत कमजोर है, तो उसकी कुर्बानी अमान्य मानी जाती है।
3- शारीरिक दोष (Physical Defects): बकरे में कोई शारीरिक दोष नहीं होना चाहिए, जैसे-
- एक या दोनों आंखों से अंधापन
- सिंग का जड़ से टूटना।
- कान, पूंछ, या अन्य अंगों का कटना या जन्म से अनुपस्थित होना।
- चलने में लंगड़ापन या गंभीर कमजोरी।
4- खस्सी बकरा (Castrated Goat): खस्सी बकरा (जिसके अंडकोष निकाल दिए गए हों) की कुर्बानी जायज है, क्योंकि इसका मांस अधिक स्वादिष्ट और कोमल होता है।
5- दांत (Teeth): बकरे के दांत पूर्ण और स्वस्थ होने चाहिए। अगर, बकरे के सभी दांत गिर चुके हैं या वह चारा नहीं खा सकता, तो उसकी कुर्बानी अमान्य होती है।
कुर्बानी का समय
कुर्बानी ईद-उल-अजहा की नमाज के बाद, 10वीं, 11वीं, और 12वीं जिलहिज्जा को की जाती है। इन दिनों में कुर्बानी करना वाजिब है, और पहले दिन करना अफजल माना जाता है।
कुर्बानी का इतिहास: हजरत इब्राहीम (अलैहि सलाम)
कुरआन में हजरत इब्राहीम (अलैहि सलाम) द्वारा अपने पुत्र की कुर्बानी की कहानी का उल्लेख है, जो अल्लाह की आज्ञा का पालन करने की उनकी तत्परता को दर्शाता है। अल्लाह ने उनकी भक्ति को देखकर उनके पुत्र की जगह एक बड़ा जानवर (दुम्बा) भेजा। यह घटना ईद-उल-अधा की परंपरा का आधार है।
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