आखिर क्यों पूजा के लिए महत्वपूर्ण है सुपारी?
ध्यान देने योग्य बात यह है कि खाने वाली सुपारी और पूजा की सुपारी दोनों अलग वस्तुएं हैं।
नई दिल्ली। हमारे हिंदू शास्त्रों में पूजा-पाठ के लिए कुछ विशेष वस्तुएं निर्धारित की गई हैं। इन्हीं में से एक है सुपारी। हिंदू धार्मिक अनुष्ठानों में सुपारी का इतना महत्व है कि इसके बिना पूजा प्रारंभ ही नहीं होती। ध्यान देने योग्य बात यह है कि खाने वाली सुपारी और पूजा की सुपारी दोनों अलग वस्तुएं हैं। खाने वाली सुपारी बड़ी और गोल होती है, वहीं पूजा की सुपारी आकार में छोटी और शीर्ष पर शिखर जैसा आकार लिए होती है।
इसके साथ ही पूजा की सुपारी का तल एकदम सपाट होता है, जिससे यह स्थापना कार्य को सरल बनाती है। भारतीय पूजा विधान में देवताओं का आवाहन हो या यज्ञ का प्रारंभ, हर कार्य पान के ऊपर सुपारी और बताशा रखकर स्थापना के साथ शुरू किया जाता है।
यह छोटी सी वस्तु पूजा-पाठ में इतनी महत्वपूर्ण क्यों है, आइये जानते हैं-

जीवंत देव है सुपारी
हिंदू शास्त्रों में सुपारी को जीवंत देव का स्थान प्राप्त है। माना जाता है कि इसमें समस्त देवताओं का वास होता है। यही वजह है कि यदि हम किसी देवता का आवाहन कर रहे हों और हमारे पास उनकी प्रतिमा ना हो, तो उनके स्थान पर सुपारी रखी जाती है और पंडित मंत्रों द्वारा उसमें देवताओं का आवाहन कर पूजा संपन्न करवाते हैं। सुपारी को ब्रह्मा, यमदेव, वरूण देव और इंद्रदेव का प्रतीक माना जाता है।

ग्रहशांति से संबंधित पूजा
यदि ग्रहशांति से संबंधित पूजा आयोजित की जा रही हो, तो सुपारी को मंगल, केतु, सूर्य, गुरू आदि ग्रहों का प्रतिनिधि माना जाता है। सुपारी को पूजा में अनुपलब्ध का स्थानापन्न माना जाता है। अर्थात् जिस भी हेतु से पूजा की जा रही है, यदि उसमें मुख्य पात्र उपलब्ध नहीं है, तो उसके स्थान पर सुपारी को रखकर पूजा पूरी की जा सकती है। उदाहरण के लिए कुछ पूजा अनुष्ठान पति-पत्नी दोनों के एक साथ बैठकर करने पर ही संपूर्ण माने जाते हैं। ऐसे में यदि पत्नी कहीं बाहर गई हो, पूजा स्थल पर उपस्थित ना हो या उसकी मृत्यु हो चुकी हो, तो उसके स्थान पर भी सुपारी की स्थापना कर पूजा का संपूर्ण फल पाया जा सकता है।

अपनी कठोरता देवताओं को अर्पण
हमारे यहां पूजन में सुपारी देवताओं को अर्पित की जाती है। इसके पीछे विश्वास यह है कि सुपारी जैसी कड़ी वस्तु अर्पित कर हम अपने जीवन की कठिनाइयां, कठोरता देव को अर्पित कर उनसे याचना करते हैं कि वो हमारे जीवन में कोमलता, सरलता का वरदान दें। विश्वास किया जाता है कि देव उस सुपारी को ग्रहण कर जीवन की संपूर्ण कठिनाइयों को काट देते हैं।

ऐसा कभी न करें
- पूजा में उपयोग की गई सुपारी को कई लोग यहां-वहां रख देते हैं। ऐसा बिलकुल न करें। पूजा में उपयोग की गई सुपारी को या तो जल में प्रवाहित कर दें या लाल कपड़े में अक्षत के साथ बांधकर तिजोरी में रखें। इससे समृद्धि बनी रहती है।
- पूजा की सुपारी को खाने के उपयोग में नहीं लेना चाहिए। अगर ऐसा करते हैं तो यह भयंकर दोष उत्पन्न करती है।
- पूजा में उपयोग की गई सुपारी पुरोहित, पंडित को दान में दे दें अथवा किसी मंदिर में चढ़ा दें।
- पूजा में उपयोग की गई सुपारी को अक्षत के साथ लाल कपड़े में बांधकर तिजोरी या गल्ले में रखें। धन का संचय शीघ्रता से होगा।
- अगर आप कर्ज में डूबे हुए हैं तो सोमवार के दिन सात पूजा की सुपारी लेकर उसे अक्षत के साथ शिवलिंग पर अर्पित करें।
- रोगी के ऊपर से पूजा की एक साबुत सुपारी और एक सिक्का लेकर सात बार पैर से सिर तक घुमाकर बहते पानी में प्रवाहित करें। इससे वह शीघ्रता से ठीक होने लगेगा।













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